महाराष्ट्र के वाशिम जिले से एक बेहद ही दहला देने वाली और दुखद खबर सामने आ रही है। राज्य में गणेशोत्सव का समापन उत्साह और उमंग के साथ होना चाहिए था, लेकिन मालेगांव तहसील के तिवली गांव में यह पावन पर्व मातम में बदल गया। गणेश विसर्जन के एक जुलूस के दौरान दो मंडलों के बीच ट्रैक्टर आगे बढ़ाने को लेकर मामूली सी बात पर विवाद शुरू हो गया, जो देखते ही देखते खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया। इस हिंसक झड़प में एक पूर्व पंचायत समिति सभापति की जान चली गई, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और भारी तनाव का माहौल बना हुआ है।
मामूली बात से शुरू हुआ विवाद और खूनी अंत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वाशिम जिले के मालेगांव अंतर्गत आने वाले तिवली गांव में अनंत चतुर्दशी के मौके पर गणेश विसर्जन का जुलूस निकाला जा रहा था। गांव के ही अलग-अलग गणेश मंडल अपनी-अपनी मूर्तियों के साथ विसर्जन स्थल की ओर बढ़ रहे थे। इसी दौरान जुलूस में आगे कौन सा ट्रैक्टर चलेगा, इसे लेकर दो मंडलों के कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी शुरू हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए। बहस ने जल्द ही हिंसक रूप ले लिया और दोनों तरफ से जमकर लाठी-डंडे और धारदार हथियार चलने लगे।
इस पूरी झड़प के दौरान बीच-बचाव करने और स्थिति को शांत कराने की कोशिश कर रहे पूर्व पंचायत समिति सभापति पर हमला हो गया। इस गंभीर हमले में वे बुरी तरह घायल हो गए और जमीन पर गिर पड़े। आनन-फानन में उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है और पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
पुलिस प्रशासन की सख्त कार्रवाई, 40 लोगों पर मामला दर्ज
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत हरकत में आ गई। वाशिम जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण में लिया। तिवली गांव में तनाव की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना या प्रतिशोध की कार्रवाई को रोका जा सके।
पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों के लगभग 40 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामले दर्ज किए हैं। आरोपियों की पहचान के लिए जुलूस के दौरान बनाए गए वीडियो और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और सभी आरोपियों को जल्द ही सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।
स्थानीय लोगों में आक्रोश और सुरक्षा व्यवस्था
इस মর্মান্তिक घटना के बाद से तिवली गांव और आसपास के इलाकों के नागरिकों में गहरा आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव के दौरान इस तरह की हिंसा होना बेहद शर्मनाक है। उत्सव आपसी भाईचारे का प्रतीक होते हैं, न कि खून-खराबे का। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में शामिल मुख्य दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
प्रशासन लगातार गांव के गणमान्य नागरिकों और दोनों पक्षों के प्रमुख लोगों के साथ शांति समिति की बैठकें कर रहा है, ताकि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में बनी रहे और शांति बहाल हो सके। पुलिस ने लोगों से किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।