प्रशासन ने स्थानीय पशुधन के लिए चारे की उपलब्धता सुरक्षित करने के लिए उठाया सख्त कदम, आदेश का उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई।
महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में सूखे जैसी स्थिति और आगामी महीनों में संभावित चारा संकट की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष विकास मीना ने जिले की सीमा में बाहरी पशुधन के प्रवेश और चराई पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध 23 अक्टूबर से लागू कर दिया गया है और आगामी आदेशों तक प्रभावी रहेगा।
क्यों उठाया गया यह कदम
वर्ष 2026 के खरीफ सीजन के दौरान ट्रिगर-1 के अंतर्गत आने वाली राज्य की 265 तहसीलों में यवतमाल जिले की सभी 16 तहसीलें शामिल हैं। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने सूखा घोषित किया है और इसके तहत विभिन्न राहत उपाय व रियायतें लागू की जा रही हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में यवतमाल जिले के भीतर कुल 8,18,138 पशुधन मौजूद है, जिनके लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था करना प्रशासन की प्राथमिकता है।
15 अप्रैल 2027 तक चारा पर्याप्त रहने का अनुमान
खरीफ सीजन में हुई बुआई के पैटर्न और पशुसंवर्धन विभाग द्वारा किए जाने वाले चारे के वितरण का आकलन करने के बाद प्रशासन ने यह अनुमान लगाया है कि जिले में उपलब्ध चारा आगामी 15 अप्रैल 2027 तक ही पर्याप्त साबित हो सकता है। यदि अन्य जिलों या पड़ोसी राज्यों से मवेशियों के झुंड यहां आते हैं, तो स्थानीय पशुओं के लिए गंभीर चारा संकट पैदा हो सकता है। इसी संभावित संकट से निपटने के लिए यह रोक लगाई गई है।
प्रवासी मवेशियों के झुंडों पर रहेगी सख्त नजर
नए प्रशासनिक आदेश के तहत दूसरे जिलों या अन्य राज्यों से आने वाली भेड़, बकरी, गाय, भैंस और अन्य पशुओं को यवतमाल जिले की गोचर भूमि पर चराने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई पशुपालक इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसके विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय स्तर पर पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस व्यवस्था की कड़ी निगरानी की जा रही है।