उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के युवाओं और छात्र-छात्राओं के भविष्य को और अधिक मजबूत तथा आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक बेहद दूरदर्शी कदम उठाया है। अब स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ हुनरमंद भी बनाया जाएगा। इसी कड़ी में समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों के तीन हजार से अधिक विद्यार्थियों को व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने की व्यापक तैयारी पूरी कर ली गई है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की ओर से इस वित्तीय वर्ष में 'प्रोजेक्ट प्रवीण' के तहत यह महत्वाकांक्षी अभियान शुरू किया जा रहा है, जो छात्रों के करियर को एक नई दिशा देगा।
प्रोजेक्ट प्रवीण: शिक्षा से कौशल और रोजगार का सफर
वर्तमान समय में केवल सामान्य शिक्षा प्राप्त कर लेना ही पर्याप्त नहीं माना जाता। आधुनिक समय की माँग को देखते हुए तकनीकी और व्यावसायिक दक्षता का होना बेहद आवश्यक है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने 'प्रोजेक्ट प्रवीण' की रूपरेखा तैयार की है। इसके तहत प्रदेश की 31 प्रतिष्ठित प्रशिक्षण प्रदाता संस्थाओं को कुल 3 हजार से अधिक विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करने का स्पष्ट लक्ष्य सौंपा गया है। इन सभी चयनित संस्थाओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित समयसीमा के भीतर अपने प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करें, उनका विधिवत अनुमोदन कराएं और विद्यार्थियों का पंजीकरण कर बैच का गठन सुनिश्चित करें। आधिकारिक घोषणा के अनुसार, आगामी 30 सितंबर 2026 तक राज्य के सभी निर्धारित प्रशिक्षण केंद्रों पर कक्षाओं की शुरुआत करना अनिवार्य किया गया है।
छात्रों की रुचि के अनुसार चुने जाएंगे सेक्टर
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि छात्रों को उनकी व्यक्तिगत रुचि और योग्यता के आधार पर विभिन्न उभरते हुए सेक्टरों में प्रशिक्षित किया जाएगा। व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य सर्वोदय विद्यालयों के बच्चों को ऐसे व्यावहारिक कौशल से लैस करना है जो उन्हें भविष्य में स्वरोजगार, नौकरी और बेहतरीन करियर के अवसरों के लिए पूरी तरह तैयार कर सकें। विद्यार्थियों को अपैरल (वस्त्र निर्माण), आईटी-आईटीईएस (सूचना प्रौद्योगिकी), मैनेजमेंट और अन्य आधुनिक रोजगारपरक क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। स्कूल स्तर पर ही इस प्रकार का व्यावसायिक प्रशिक्षण मिलने से बच्चों में आत्मविश्वास की वृद्धि होगी और वे कम उम्र में ही पेशेवर दुनिया की प्राथमिकताओं से परिचित हो सकेंगे।
बैच का आकार और प्रशिक्षण की रूपरेखा
प्रशिक्षण की गुणवत्ता और पारदर्शिता से किसी भी प्रकार का समझौता न हो, इसके लिए सरकार ने कड़े मानक तय किए हैं। प्रत्येक बैच में अधिकतम 35 विद्यार्थियों को ही शामिल किया जाएगा ताकि शिक्षक हर एक छात्र पर व्यक्तिगत ध्यान केंद्रित कर सकें। वहीं, पूरे पाठ्यक्रम की कुल अवधि 300 घंटे तक निर्धारित की गई है। इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि यह प्रशिक्षण छात्रों की नियमित स्कूली शिक्षा में किसी भी प्रकार की बाधा न बने, बल्कि उसके पूरक के रूप में काम करे।
पारदर्शिता और नियमों का सख्ती से पालन
- अनुबंध और अनुमोदन: प्रशिक्षण प्रदाता संस्थाओं को सबसे पहले मिशन मुख्यालय में अपना अनुबंध जमा कर उसकी आधिकारिक पुष्टि करानी होगी।
- डीपीएमयू की अनुमति: इसके बाद ही संबंधित जिले की जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (DPMU) द्वारा बैच गठित करने की अनुमति प्रदान की जाएगी।
- पोर्टल जांच: बैच को मंजूरी मिलने से पहले NCVET और NQR पोर्टल पर संबंधित जॉब रोल की पूरी जाँच की जाएगी ताकि केवल वैध और मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों में ही शिक्षा दी जा सके।
सात दिन के भीतर मिलेगी पूरी पाठ्य सामग्री
प्रशिक्षण प्रक्रिया के दौरान छात्रों को किसी भी संसाधन की कमी का सामना न करना पड़े, इसके लिए सख्त प्रशासनिक निर्देश जारी किए गए हैं। नियम के मुताबिक, जैसे ही किसी बैच की शुरुआत होगी, उसके ठीक सात दिनों के भीतर सभी विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से पाठ्य सामग्री (स्टडी मटेरियल) उपलब्ध करानी होगी। इसके साथ ही, छात्रों को सामग्री मिलने की हस्ताक्षरित रसीद और उसकी तस्वीरें भी आधिकारिक मिशन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है।
पूरा पाठ्यक्रम और छात्रों का मूल्यांकन संबंधित सेक्टर स्किल काउंसिल (SSC) के तय किए गए उच्च मानकों के अनुसार ही किया जाएगा। प्रशिक्षण संस्थाओं को भुगतान भी निर्धारित कॉमन कॉस्ट नॉर्म्स के तहत ही पारदर्शी तरीके से किया जाएगा, जिससे भ्रष्टाचार या कोताही की कोई गुंजाइश न बचे।
मिशन निदेशक की दो टूक: गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे ने सभी प्रशिक्षण प्रदाताओं को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए हैं कि सभी प्रशासनिक प्रक्रियाएं तय समयसीमा और नियमों के दायरे में ही पूरी की जानी चाहिए। उनका कहना है कि मिशन की सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि यह योजना केवल फाइलों या कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि इससे जमीनी स्तर पर विद्यार्थियों को वास्तविक और उपयोगी हुनर हासिल हो सके।
"हमारा मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के माध्यम से विद्यार्थी अपनी स्कूली शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक हुनर में भी पूरी तरह कुशल बन सकें, ताकि वे भविष्य की हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहें। स्कूल के दिनों से ही कौशल से जुड़ने से बच्चों का आत्मविश्वास मजबूत होता है और वे रोजगार के बेहतर अवसरों के लिए अधिक सक्षम बनते हैं। प्रशिक्षण की गुणवत्ता और समयबद्धता हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।"
— पुलकित खरे, मिशन निदेशक, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन
युवाओं के सुनहरे भविष्य की ओर एक मजबूत कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल राज्य के सामाजिक और शैक्षणिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव लेकर आएगी। सर्वोदय विद्यालयों में पढ़ने वाले अक्सर दूर-दराज और ग्रामीण पृष्ठभूमि के मेधावी छात्र होते हैं, जिन्हें इस प्रकार के व्यावसायिक प्रशिक्षण मिलने से एक नया क्षितिज मिलेगा। किताबी शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी दक्षता हासिल करने वाले ये छात्र आने वाले समय में न सिर्फ अपने लिए रोजगार के नए रास्ते बनाएंगे, बल्कि देश के आर्थिक विकास में भी अपनी सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। 30 सितंबर 2026 से शुरू होने वाले इन प्रशिक्षण केंद्रों पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं, और यह देखना दिलचस्प होगा कि यह योजना किस प्रकार जमीनी स्तर पर अपनी सफलता की इबारत लिखती है।