देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर अपने उग्र रूप में लौट आया है। सितंबर महीने की शुरुआत के साथ ही मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, आज यानी 5 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई इलाकों में बादलों का भयंकर तांडव देखने को मिल सकता है। इन दोनों राज्यों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जिससे निचले इलाकों में पानी भरने और जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।
मौसम प्रणाली (Synoptic Systems) का असर
इस बार की मानसूनी गतिविधियों के पीछे कई महत्वपूर्ण मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं। उत्तरी मध्य प्रदेश के मध्य भागों और उससे सटे दक्षिणी उत्तर प्रदेश के ऊपर एक स्पष्ट रूप से चिह्नित कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) बना हुआ है, जो लगभग स्थिर स्थिति में है। इसके अलावा, निचले और मध्य क्षोभमंडल (troposphere) में कई ट्रफ लाइन गुजर रही हैं।
ये ट्रफ उत्तर-पूर्वी राजस्थान से लेकर मणिपुर तक, दक्षिणी गुजरात से झारखंड तक, और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक से मन्नार की खाड़ी तक फैली हुई हैं। साथ ही, मध्य और ऊपरी क्षोभमंडल स्तर पर एक पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) भी सक्रिय है, जिसके कारण देश के एक बड़े हिस्से में मौसम बेहद खतरनाक और परिवर्तनशील बना हुआ है।
मध्य प्रदेश और राजस्थान में बहुत भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग के अनुसार, इन मजबूत मौसमी प्रणालियों के प्रभाव से पश्चिमी मध्य प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में मूसलाधार बारिश होने की पूरी संभावना है। इन क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर 115.6 से 204.4 मिलीमीटर तक भारी बारिश (Very Heavy Rainfall) दर्ज की जा सकती है, जो कि जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर सकती है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अत्यधिक आवश्यक होने पर ही अपने घरों से बाहर निकलें और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें। नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
इन राज्यों में भी होगी झमाझम बारिश
मध्य प्रदेश और राजस्थान के अलावा देश के कई अन्य राज्यों में भी बादलों के बरसने का अनुमान है। निम्नलिखित क्षेत्रों में भारी बारिश (64.5 से 115.5 मिमी) की उम्मीद जताई गई है:
- पूर्वी मध्य प्रदेश
- हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड
- हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली
- पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश
- बिहार
- उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम
- पूर्वोत्तर भारत (अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और NMMT क्षेत्र - नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा)
गौरतलब है कि प्रयागराज में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से ससुर खदेरी नदी में भी बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है, जिससे आसपास के निचले इलाकों और किसानों की फसलों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
दिल्ली-NCR का मौसम: राहत और बादलों का डेरा
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इससे सटे इलाकों (NCR) में आज आसमान मुख्य रूप से बादलों से घिरा रहेगा। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि आज दिनभर में बारिश के दो अलग-अलग दौर देखने को मिल सकते हैं।
सुबह से लेकर दोपहर से पहले तक हल्की से मध्यम बारिश के साथ-साथ आंधी और बिजली कड़कने की गतिविधियां दर्ज की जाएंगी। इसके बाद दोपहर से शाम के बीच एक बार फिर बादलों के गरजने और हल्की से मध्यम बारिश का दौर शुरू हो सकता है।
तापमान और हवा की चाल
बारिश के चलते दिल्ली-एनसीआर के तापमान में खासी गिरावट दर्ज की जाएगी। आज का अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस से 31 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा सकता है। ज़्यादातर इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से करीब 1.6°C से 3.0°C तक कम रहेगा, जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी।
हवाओं की गति की बात करें तो, सुबह के समय दक्षिण-पूर्वी हवाएं करीब 18 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी। दोपहर के वक्त इनकी गति में थोड़ी कमी आएगी और ये 15 किमी/घंटा हो जाएंगी, जबकि शाम और रात के समय हवाएं फिर से तेज होकर 18 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ लेंगी।
किन राज्यों में जारी किया गया है येलो अलर्ट?
अचानक बदलने वाले मौसम और तूफानी हवाओं को देखते हुए कई राज्यों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र (हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड), पूर्वी राजस्थान, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य बंगाल, बिहार, कोंकण, गोवा और तटीय कर्नाटक में गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने की पूरी आशंका है।
तूफानी हवाओं का प्रकोप
पहाड़ी और मैदानी इलाकों के अलावा दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों में भी मौसम के कड़े तेवर देखने को मिल रहे हैं। तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 40 से 50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जो गरज-चमक के साथ आंधी का रूप ले सकती हैं। इन इलाकों में हवा के झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक भी पहुंच सकते हैं। वहीं, उत्तरी और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में 30 से 40 किमी/घंटा (झोंकों के साथ 50 किमी/घंटा) की तेज सतही हवाएं चलने की संभावना है।
आम जनता के लिए जरूरी सावधानियां
मौसम विशेषज्ञों और आपदा प्रबंधन विभागों ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे खराब मौसम के दौरान पेड़ों के नीचे बिल्कुल शरण न लें, क्योंकि आकाशीय बिजली (Thunderbolt) गिरने का खतरा सबसे अधिक होता है। वाहन चालकों को भी बारिश के दौरान सड़कों पर विजिबिलिटी कम होने पर गाड़ी धीमी चलाने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की हिदायत दी गई है। अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें और मौसम विभाग के ताजा अपडेट्स पर लगातार नजर बनाए रखें।