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मुंबई 3.0 और 4.0 का मेगा ब्लूप्रिंट तैयार, 565 गांवों का डिजिटल सर्वे पूरा

मुंबई 3.0 और 4.0 का मेगा ब्लूप्रिंट तैयार, 565 गांवों का डिजिटल सर्वे पूरा

महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी और उसके आसपास के इलाकों की तकदीर बदलने के लिए एक बहुत बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने 'मुंबई 3.0' और 'मुंबई 4.0' के अपने महत्वाकांक्षी विजन को धरातल पर उतारने के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। प्राधिकरण ने महज ढाई महीने के रिकॉर्ड समय में विशाल भूभाग का डिजिटल सर्वे पूरा करते हुए अपनी मजबूत नींव तैयार कर ली है। इस आधुनिक और दूरदर्शी योजना से न केवल शहरी बुनियादी ढांचे को नई रफ्तार मिलेगी, बल्कि लाखों युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।

ढाई महीने में 565 गांवों की डिजिटल मैपिंग

आमतौर पर इतने बड़े पैमाने पर सरकारी योजनाओं के लिए सर्वे और डेटा जुटाने में वर्षों का समय लग जाता है, लेकिन एमएमआरडीए ने इस पुरानी धारणा को बदलते हुए अभूतपूर्व गति से काम किया है। प्राधिकरण ने केवल ढाई महीने के भीतर तीन महत्वपूर्ण 'एग्जिस्टिंग लैंड यूज' (ईएलयू) रिपोर्ट सफलतापूर्वक तैयार कर ली हैं। इस व्यापक अभियान के तहत लगभग 2,008 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैले 565 गांवों की मौजूदा भूमि उपयोग, बुनियादी ढांचे और पर्यावरण संसाधनों की डिजिटल मैपिंग का काम पूरी तरह से संपन्न हो चुका है।

जमीनी हकीकत का यह अत्यंत सटीक और डिजिटल नक्शा सामने आने के बाद अब एक व्यापक मास्टर प्लान बनाने की कवायद तेजी से शुरू हो चुकी है। यह मास्टर प्लान भविष्य की एक सुनियोजित, आधुनिक और स्मार्ट 'नई मुंबई' को आकार देने का सबसे मजबूत मार्ग प्रशस्त करेगा, जहां ट्रैफिक, प्रदूषण और अनियोजित विकास जैसी पुरानी समस्याओं से स्थायी राहत मिल सकेगी।

मुख्यमंत्री को सौंपी गई अहम ईएलयू रिपोर्ट

'इन्वेस्ट महाराष्ट्र' के भव्य शुभारंभ के अवसर पर एमएमआरडीए के महानगर आयुक्त डॉ. संजय मुखर्जी ने आधिकारिक तौर पर यह बहुमूल्य ईएलयू रिपोर्ट राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपी। इस अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर पर राज्य की राजनीति और शासन के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे, जिनमें उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, आशीष शेलार, जयकुमार रावल, संजय सावकारे और उदय सामंत प्रमुख रूप से शामिल थे। इन नेताओं की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि सरकार इस प्रोजेक्ट को लेकर कितनी गंभीर और उत्साहित है।

इस सर्वे को अंजाम देने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का खुलकर इस्तेमाल किया गया है। हवाई कैमरों, लेजर तकनीक और हाई-क्वालिटी सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए पूरे इलाके के चप्पे-चप्पे को रिकॉर्ड किया गया है। इसके अलावा, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) और सरकारी राजस्व रिकॉर्ड को आधार बनाते हुए प्रशासनिक टीमों ने मौके पर जाकर हर एक जमीन, बस्ती और ढांचे की सच्चाई को परखा। इस जमीनी सत्यापन के जरिए बस्तियों, बुनियादी ढांचे, प्राकृतिक प्रणालियों और वर्तमान भूमि उपयोग का एक बेहद विस्तृत और अचूक डेटाबेस तैयार किया गया है।

अब घर के पास ही मिलेगा युवाओं को रोजगार

मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में रहने वाले युवाओं के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं होगी। आने वाले समय में इस क्षेत्र में उद्योग, आईटी हब, लॉजिस्टिक्स पार्क और आधुनिक डेटा सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसके परिणामस्वरुप, युवाओं को नौकरी और अपने काम-धंधे के लिए दूर-दराज के इलाकों या मुंबई के मुख्य केंद्र की तरफ भागने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही, रोजगार के इन नए केंद्रों और रेलवे व मेट्रो स्टेशनों के बिल्कुल नजदीक किफायती आवास (affordable housing) विकसित किए जाएंगे, जिससे आम आदमी का अपने खुद के घर का सपना बहुत आसानी से और कम लागत में पूरा हो सकेगा।

जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याओं से मिलेगी मुक्ति

मुंबई और उसके आसपास मॉनसून के दौरान जलभराव और सड़कों पर पानी भरने की समस्या एक नासूर बन चुकी है। इस नई डिजिटल योजना में इस समस्या का वैज्ञानिक समाधान निकाला गया है। अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक और मैपिंग की मदद से योजना बनाकर नालों, नदियों और प्राकृतिक जल निकासी के रास्तों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, विकास कार्यों के साथ-साथ कुल क्षेत्र के लगभग 45 फीसदी हिस्से में घने जंगल, हरियाली, मैंग्रोव और प्राकृतिक झीलों को पूरी तरह संरक्षित रखा जाएगा। इससे न केवल प्रदूषण के स्तर में भारी कमी आएगी, बल्कि स्थानीय नागरिकों को साफ-सुथरी हवा और एक बेहद खूबसूरत प्राकृतिक माहौल भी मिलेगा। सबसे खास बात यह है कि स्थानीय किसानों की उपजाऊ जमीन, पारंपरिक संस्कृति और आजीविका को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाए बिना यह पूरा विकास कार्य आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा, पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय लोगों की कमाई के नए और स्थायी रास्ते खुलेंगे।

गांव और शहर की दूरियां होंगी खत्म, एक ही जगह मिलेंगी सभी सुविधाएं

अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट के तहत आधुनिक रिहायशी केंद्र (residential hubs) विकसित किए जाएंगे। इन केंद्रों की खास बात यह होगी कि नागरिकों को उनके घर के नजदीक ही बेहतरीन स्कूल, कॉलेज, बड़े अस्पताल, आधुनिक बाजार और सुकून भरे पार्क उपलब्ध होंगे। रोजमर्रा की छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए अब लोगों को मीलों दूर भटकने की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ेगी।

अटल सेतु, नए एयरपोर्ट, विरार-अलीबाग कॉरिडोर और अत्याधुनिक सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों के जरिए गांव और शहर आपस में तेजी से जुड़ेंगे। इन सभी प्रोजेक्ट्स के धरातल पर उतरने के बाद घर से ऑफिस आने-जाने में लगने वाला समय आधा रह जाएगा, जिससे लोगों के जीवन की गुणवत्ता (quality of life) में सुधार होगा।

भविष्य का टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल विकास

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि परिवहन, रोजगार, आवास और पर्यावरण का यह समन्वित और संतुलित विकास 'मुंबई 3.0' और 'मुंबई 4.0' की पूरी योजना को अभूतपूर्व मजबूती देगा। वहीं, एमएमआरडीए का दृढ़ विश्वास है कि यह तैयार किया गया डिजिटल डेटाबेस भविष्य में एक रहने योग्य, कॉम्पैक्ट और जलवायु-अनुकूल (climate-resilient) विकास केंद्र तैयार करने में सबसे महत्वपूर्ण और ठोस आधार साबित होगा।

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रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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