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नैनीताल में पानी बना काल! 100 से ज्यादा लोग बीमार, 2 की मौत से खौफ

नैनीताल में पानी बना काल! 100 से ज्यादा लोग बीमार, 2 की मौत से खौफ

उत्तराखंड के पर्यटन शहर नैनीताल के पास के ग्रामीण इलाकों में इस समय दहशत का माहौल है। कभी शुद्ध हवा और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाने जाने वाले ज्योलीकोट और उसके आसपास के गांवों में नल का पानी अब जीवनदायिनी की बजाय मौत का पैगाम बनकर बरस रहा है। इलाके में पीलिया और डायरिया जैसी गंभीर जलजनित बीमारियों ने पैर पसार लिए हैं, जिनकी चपेट में आकर अब तक 100 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से बीमार हो चुके हैं। इस प्रकोप के चलते दो लोगों की दर्दनाक मौत भी हो चुकी है, जिसके बाद से पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

ज्योलीकोट, गांजा और सरियाताल में फैला संक्रमण

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नैनीताल के करीब स्थित ज्योलीकोट, गांजा, सरियाताल समेत आधा दर्जन से अधिक गांवों में यह संकट गहराया है। शुरुआत में लोगों को लगा कि यह कोई आम मौसमी बीमारी या सामान्य पेट दर्द है, जिसे घरेलू नुस्खों या स्थानीय डॉक्टरों की मामूली दवाओं से ठीक किया जा सकता है। लेकिन देखते ही देखते मरीजों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी होने लगी। जब डॉक्टरों ने मरीजों की जांच की, तो संक्रमण के पीछे पीलिया (Jaundice) और डायरिया के फैलने की पुष्टि हुई। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हर उम्र के लोग इस जानलेवा संक्रमण की चपेट में आते चले गए।

स्थिति इतनी डरावनी हो गई कि कई मरीजों को तुरंत नैनीताल और हल्द्वानी के बड़े अस्पतालों के लिए रेफर करना पड़ा। हालत में सुधार न होने पर कुछ गंभीर मरीजों को उत्तर प्रदेश के बरेली और देश की राजधानी दिल्ली तक के बड़े अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा है। लगातार बिगड़ती स्थिति के बीच दो लोगों की मौत ने ग्रामीणों के पैरों तले जमीन खिसका दी है।

इलाज के दौरान दो ने توड़ा दम, सहमे हैं परिवार

इस जानलेवा संक्रमण के चलते जान गंवाने वालों में 26 वर्षीय नीमा जोशी शामिल हैं, जिनकी मौत इलाज के दौरान हुई। वहीं, 16 वर्षीय किशोर जीना ने भी उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। मिली जानकारी के अनुसार, इस किशोर की मौत दिल्ली के प्रतिष्ठित राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज के दौरान हुई। इन दोनों मौतों के बाद से प्रभावित गांवों में मातम और डर का साया है। जिन घरों में लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं, वहां बाकी परिवार के सदस्य भी अपनी और अपने बच्चों की सलामती को लेकर सहमे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस बीमारी के असली कारण पर तुरंत लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले दिनों में हालात और भी ज्यादा भयावह हो सकते हैं.

पेयजल व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

इस पूरे संकट के केंद्र में पानी की सप्लाई और उससे जुड़ी व्यवस्थाएं हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके के वाटर सप्लाई टैंक तक पहुंचने वाले जलस्रोतों में दूषित पानी मिल रहा है। लोगों ने गंभीर आशंका जताई है कि नैनीताल शहर की मुख्य सीवर लाइन का गंदा पानी किसी तरह इन पेयजल स्रोतों या टैंकों में रिस रहा है, जिसे अनजाने में ग्रामीण पी रहे हैं। हालांकि, यह अभी ग्रामीणों के स्तर पर लगाए गए गंभीर आरोप और आशंकाएं हैं। बीमारी का वैज्ञानिक और पुख्ता कारण क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

जनता में बढ़ते आक्रोश और डर को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत ऐक्शन लेते हुए उस संदिग्ध जलस्रोत को मुख्य वाटर सप्लाई टैंक से अलग कर दिया है, जिसमें सीवर का पानी मिलने की आशंका जताई जा रही थी। इसके बावजूद लोगों के मन से डर निकला नहीं है और वे घरों में नल का पानी भरने से पहले हजार बार सोच रहे हैं।

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की बड़ी चुनौतियां

स्थानीय निवासी कविता जोशी का कहना है कि मौजूदा हालात में पानी पीना भी किसी खतरे से खाली नहीं लग रहा है। परिवार के लोग पानी को लेकर अब अत्यधिक सावधानी बरत रहे हैं, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी की जरूरत तो होती ही है। इस गंभीर मसले पर ब्लॉक प्रमुख हरीश बिष्ट ने भी चिंता व्यक्त करते हुए इसे एक बड़ी स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति बताया है।

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में डेरा डाले हुए हैं। जगह-जगह कैंप लगाकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है और दवाइयां बांटी जा रही हैं। हालांकि, ग्रामीणों की मांग है कि सिर्फ कैंप लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि स्वास्थ्य कर्मियों को घर-घर जाकर हर एक व्यक्ति की जांच करनी चाहिए ताकि शुरुआती लक्षण वाले मरीजों को समय पर बचाया जा सके। इसके अलावा सभी जल स्रोतों और सप्लाई लाइनों के पानी के सैंपल लेकर तत्काल लैब टेस्टिंग की मांग की जा रही है।

एहतियातन 10 स्कूल और 5 आंगनबाड़ी केंद्र बंद

बच्चों में संक्रमण के खतरे को सबसे बड़ा मानते हुए जिला प्रशासन ने कड़े एहतियाती कदम उठाए हैं। ज्योलीकोट, गांजा और सरियाताल क्षेत्र के कुल 10 स्कूलों और 5 आंगनबाड़ी केंद्रों को आगामी एक सप्ताह के लिए पूरी तरह बंद रखने का आदेश दिया गया है। प्रशासन का मानना है कि बच्चों को इस संभावित खतरे से फिलहाल दूर रखना बेहद जरूरी है। हालांकि, स्कूल बंद करने से समस्या की जड़ खत्म नहीं होगी। जब तक पानी के दूषित होने के पुख्ता कारणों का खुलासा नहीं होता और पूरी जल आपूर्ति व्यवस्था को सैनिटाइज व सुरक्षित नहीं किया जाता, तब तक यह तलवार लोगों के सिर पर लटकती रहेगी।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

Writer (स्थानीय खबरें)

निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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