काशी नगरी में इन दिनों मौसम का मिजाज कुछ अलग ही रंग दिखा रहा है। कभी चिलचिलाती धूप तो कभी अचानक बादलों का डेरा और झमाझम बौछारें—यह पिछले कुछ दिनों से वाराणसी की पहचान बन गया है। सितंबर 2026 के इस दौर में बादलों की आवाजाही के बीच शहरवासियों को गर्मी से पूरी तरह राहत नहीं मिल पा रही है। भले ही पिछले चौबीस घंटों के भीतर रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई हो, लेकिन इसके तुरंत बाद फैली उमस ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया है।
पिछले 24 घंटों में हुई झमाझम बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों की समयावधि में वाराणसी और उसके आस-पास के इलाकों में कुल 51.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यह मानसूनी गतिविधि शहर के लिए एक बड़े बदलाव के रूप में देखी जा रही है। बारिश की वजह से सड़कों पर पानी भरने और तापमान में एक निश्चित गिरावट दर्ज होने की उम्मीद थी, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। बारिश के तुरंत बाद जब तेज धूप खिली, तो ज़मीन से उठा भाप और नमी का गुबार लोगों के लिए मुसीबत बन गया।
तापमान में आई गिरावट, पर नमी ने बढ़ाई चुनौती
तापमान के मोर्चे पर राहत जरूर महसूस की गई है। रविवार को वाराणसी का अधिकतम तापमान सामान्य से करीब 1.4 डिग्री सेल्सियस नीचे लुढ़ककर 31.8 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। वहीं, न्यूनतम तापमान भी सामान्य से एक डिग्री कम यानी 24.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके बावजूद, हवा में नमी (Humidity) का स्तर अपने चरम पर बना हुआ है।
वातावरण में नमी का यह स्तर 85 फीसदी तक पहुंच गया है। यही मुख्य कारण है कि थर्मामीटर का पारा नीचे गिरने के बावजूद इंसानी शरीर को गर्मी और चिपचिपी उमस से कोई खास राहत नहीं मिल पा रही है। लोग पसीने से तरबतर नजर आ रहे हैं और घरों व दफ्तरों में पंखे-कूलर भी इस उमस के आगे बेदम साबित हो रहे हैं।
मौसम की मुख्य बातें: एक नजर में
- पिछले 24 घंटे की बारिश: 51.7 मिमी
- अधिकतम तापमान: 31.8 डिग्री सेल्सियस (सामान्य से 1.4 डिग्री कम)
- न्यूनतम तापमान: 24.7 डिग्री सेल्सियस (सामान्य से 1 डिग्री कम)
- हवा में नमी (Humidity): अधिकतम 85% तक
दिनभर बदलते रहे मौसम के रंग
रविवार का पूरा दिन उतार-चढ़ाव से भरा रहा। सुबह की शुरुआत हल्की धूप के साथ हुई, लेकिन दोपहर होते-होते आसमान में बादलों ने डेरा जमा लिया। कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बौछारें भी पड़ीं। हालांकि, बारिश का यह दौर ज्यादा लंबा नहीं खिंचा और कुछ ही देर में तीखी धूप ने दोबारा बादलों को चीरते हुए अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। धूप निकलते ही धरती की गर्मी और आसमान की नमी मिलकर एक ऐसा चक्रव्यूह बना रहे हैं, जिससे वातावरण में सफोकेशन (घुटन) जैसी स्थिति पैदा हो रही है।
आने वाले तीन दिनों का पूर्वानुमान
मौसम विशेषज्ञों और क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक, अभी काशी के निवासियों को इस मिले-जुले मौसम से तुरंत राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। अगले तीन दिनों तक शहर में हल्की से मध्यम बारिश का दौर छिटपुट रूप से जारी रहने की पूरी संभावना है।
अच्छी खबर यह है कि फिलहाल किसी भी तरह की भारी बारिश या बाढ़ जैसी चेतावनी जारी नहीं की गई है, जिससे आम जनजीवन के अस्त-व्यस्त होने का कोई बड़ा खतरा नहीं है। हालांकि, लगातार होने वाली हल्की बारिश और आसमान में बादलों की लुकाछिपी के कारण तापमान में बहुत ज्यादा उछाल आने की संभावना भी न के बराबर है। कुल मिलाकर, आने वाले कुछ और दिन उमस भरी घुटन और छिटपुट बौछारों के नाम रहने वाले हैं।
आम जनजीवन पर असर और जरूरी सावधानियां
इस प्रकार के परिवर्तनशील मौसम का असर इंसानी सेहत पर भी साफ तौर पर देखा जा रहा है। उमस और पसीने के कारण वायरल संक्रमण, सर्दी-जुकाम और त्वचा संबंधी समस्याओं के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस मौसम में लोगों को बाहर का खुला खाना खाने से बचने और पर्याप्त मात्रा में पानी व तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी है ताकि शरीर में डिहाइड्रेशन न हो।
वाराणसी प्रशासन और आपदा प्रबंधन इकाइयां भी पूरी तरह से मुस्तैद हैं ताकि किसी भी अचानक बदलाव की स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। फिलहाल, काशीवासी बारिश की फुहारों का आनंद तो ले रहे हैं, लेकिन साथ ही उमस से निपटने के लिए बारिश के स्थाई और बड़े दौर का इंतजार कर रहे हैं।