महाराष्ट्र का ऐतिहासिक और धार्मिक शहर नासिक इस समय पूरी तरह से आध्यात्मिकता के रंग में रंगा हुआ नजर आ रहा है। मौका है आगामी सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों और उसके स्वागत से जुड़े भव्य आयोजनों का। इसी कड़ी में नासिक के ठक्कर डोम परिसर में तीन दिवसीय 'सिंहस्थ महाकुंभ भक्ति संगम' का औपचारिक और भव्य शुभारंभ राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कर-कमलों द्वारा किया गया। उद्घाटन समारोह के साथ ही पूरा शहर भक्ति के सुरों, संतवाणी के गजर और सनातन संस्कृति की त्रिवेणी में गोता लगाने लगा है।
भक्तिरस में डूबा ठक्कर डोम परिसर
नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला प्राधिकरण की ओर से आयोजित इस तीन दिवसीय महाकुंभ भक्ति संगम के पहले दिन ही शहर का माहौल पूरी तरह बदल गया। उद्घाटन समारोह जैसे ही संपन्न हुआ, प. पू. अमृताश्रम स्वामी महाराज के ओजस्वी और आध्यात्मिक कीर्तन ने संपूर्ण परिसर को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। कीर्तन सुनने के लिए हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर इस आयोजन का हिस्सा बने। हर तरफ केवल और केवल ईश्वर के नाम की गूंज सुनाई दे रही थी, जिसने उपस्थित सभी लोगों के मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।
कार्यक्रम के आयोजकों का मुख्य उद्देश्य आने वाले सिंहस्थ महाकुंभ से पहले शहर में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना को जागृत करना है। इस प्रकार के आयोजन न केवल लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं, बल्कि समाज में एक सकारात्मक संदेश भी प्रसारित करते हैं।
राहुल देशपांडे की 'अभंगवारी' ने बांधा समां
इस तीन दिवसीय महाकुंभ भक्ति संगम के पहले दिन का सबसे बड़ा आकर्षण प्रसिद्ध शास्त्रीय और पार्श्व गायक राहुल देशपांडे की विशेष प्रस्तुति रही। रात के सत्र में जब राहुल देशपांडे ने अपनी सुरीली आवाज में 'अभंगवारी' की प्रस्तुतियां दीं, तो पूरा ठक्कर डोम परिसर संगीत और भक्ति के संगम में डूब गया।
संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम और अन्य महान संतों द्वारा रचे गए अभंगों को जब राहुल देशपांडे ने अपने अनूठे अंदाज में गाया, तो वहां मौजूद संगीत प्रेमी और रसिक झूम उठे। सुरों की यह महफिल देर रात तक जमी रही और हर कोई इस संगीत की गहराई में खोया नजर आया। आधुनिकता की दौड़ के बीच पारंपरिक संतों की वाणी को इस प्रकार सुनना एक बेहद दुर्लभ और अलौकिक अनुभव साबित हुआ।
निशुल्क प्रवेश और दूसरे दिन के खास कार्यक्रम
यह तीन दिवसीय 'सिंहस्थ महाकुंभ भक्ति संगम' 28 अगस्त से शुरू होकर 30 अगस्त 2026 तक यानी आज तक जारी है। इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि आम नागरिकों और श्रद्धालुओं के लिए इसमें प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क रखा गया है, ताकि समाज के हर वर्ग के लोग इस भव्य आयोजन का हिस्सा बन सकें और भक्ति की इस गंगा में डुबकी लगा सकें।
महोत्सव के अन्य दिनों में केवल संगीत ही नहीं, बल्कि बौद्धिक और वैचारिक सत्रों का भी आयोजन किया जा रहा है। संत परंपरा, भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता जैसे बेहद महत्वपूर्ण और प्रासंगिक विषयों पर विशेष विचार-गोष्ठियां और भक्ति सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। इन सत्रों का उद्देश्य युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ना और समाज में आपसी भाईचारे और एकता के संदेश को मजबूत करना है।
सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के नासिक उपकेंद्र का लोकार्पण
भक्ति और आध्यात्मिकता के इस पावन माहौल के बीच नासिक के शैक्षणिक विकास के लिए भी आज का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ है। भक्ति संगम के उद्घाटन के साथ-साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के नवनिर्मित नासिक उपकेंद्र का भी आधिकारिक उद्घाटन किया।
इस महत्वपूर्ण उद्घाटन समारोह में महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल, पालकमंत्री गिरीश महाजन, स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे, वरिष्ठ मंत्री छगन भुजबल, सांसद भास्कर भगरे और विधायक गोकुल गीते सहित कई गणमान्य अतिथि, शिक्षाविद् और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के इस नए कैंपस के शुरू होने से नासिक और आसपास के जिलों के छात्रों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।
नासिक के शैक्षणिक भविष्य का नया स्वर्णिम अध्याय
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राज्य के वरिष्ठ नेता और मंत्री छगन भुजबल ने इसे नासिक के शिक्षा जगत के लिए एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक इमारत का लोकार्पण नहीं है, बल्कि नासिक के शैक्षणिक विकास के एक नए और आधुनिक चरण की आधिकारिक शुरुआत है।
- उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर: इस उपकेंद्र के शुरू होने से स्थानीय छात्रों को महानगरों की ओर रुख करने की मजबूरी से राहत मिलेगी।
- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: अब छात्रों को उनके अपने गृह जिले में ही विश्वस्तरीय शैक्षणिक सुविधाएं और पाठ्यक्रम उपलब्ध हो सकेंगे।
- शोध और अनुसंधान: विश्वविद्यालय के इस परिसर से शोध कार्यों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय युवाओं को नए अवसर मिलेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक तरफ जहां सिंहस्थ महाकुंभ भक्ति संगम नासिक की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को और अधिक प्रगाढ़ कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय का यह नया उपकेंद्र शहर को शिक्षा के क्षेत्र में एक नई ऊंचाई पर ले जाने का काम करेगा। आध्यात्मिकता और आधुनिक शिक्षा का यह अनूठा मेल नासिक को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है।
फिलहाल, ठक्कर डोम परिसर में चल रहे महाकुंभ भक्ति संगम में उमड़ती जनसैलाब और छात्रों में नए कैंपस को लेकर दिखा उत्साह इस बात का प्रमाण है कि नासिक विकास और संस्कृति के मामले में एक साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है।
