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काशी से राष्ट्रीय पोषण माह का शंखनाद, तमिलनाडु की वर्किंग वुमन ने सुनाई दिल को छू लेने वाली कहानी

काशी से राष्ट्रीय पोषण माह का शंखनाद, तमिलनाडु की वर्किंग वुमन ने सुनाई दिल को छू लेने वाली कहानी

मां अन्नपूर्णा की पावन और ऐतिहासिक नगरी काशी से देश के सबसे बड़े स्वास्थ्य और पोषण महाअभियान का आगाज हो चुका है। यहाँ के अत्याधुनिक रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का भव्य शुभारंभ किया गया। इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन ने देश के अलग-अलग कोनों से आई पोषण परंपराओं और आहार विविधता को एक ही मंच पर ला खड़ा किया है, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि भले ही राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियां और खान-पान के तौर-तरीके जुदा हों, लेकिन सेहत और सेहतमंद भविष्य की प्राथमिकता हर जगह एक जैसी है।

पोषण मेले में दिखी राज्यों की सांस्कृतिक और आहार विविधता

इस राष्ट्रीय पोषण मेले की सबसे बड़ी खासियत इसकी विविधता रही। यहाँ कुल 15 विशेष पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी स्टॉल लगाए गए थे, जिनमें सात अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक स्टॉल विशेष आकर्षण का केंद्र बने। इन स्टॉलों के माध्यम से अनुपूरक पुष्टाहार, प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई), सक्षम आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य विभाग की तमाम महत्वपूर्ण गतिविधियों को बेहद रोचक तरीके से प्रदर्शित किया गया।

मेले में उत्तर प्रदेश के साथ-साथ राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, मिजोरम और बिहार के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। हर राज्य ने अपने यहाँ की स्थानीय कृषि उपज, पारंपरिक व्यंजनों और पोषण संबंधी नवाचारों (Innovations) की खुलकर नुमाइश की। आगंतुकों के लिए यह किसी फूड फेस्टिवल से कम नहीं था, जहाँ पोषण के साथ-साथ राज्यों की सांस्कृतिक झलक भी देखने को मिली।

एक-दूसरे के अनुभवों से सीख रहे हैं राज्य

मिजोरम से इस महाकुंभ में हिस्सा लेने आए जोयला ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि देश के विभिन्न कोनों से आए प्रतिनिधियों के साथ संवाद करना एक अद्भुत अनुभव रहा। उनके अनुसार, दूसरे राज्यों के स्टॉलों पर जाकर यह देखने को मिला कि वहाँ किस प्रकार का पोषण आहार तैयार किया जाता है और उसे बनाने की प्रक्रिया क्या है। वहीं, मिजोरम के स्टॉल पर आने वाले लोगों ने भी वहाँ के पहाड़ी व्यंजनों और पोषण सुधार के अनोखे तरीकों में गहरी रुचि दिखाई।

राजस्थान से आईं एकीकृत बाल विकास सेवा की उपनिदेशक डॉ. मंजू यादव ने उत्तर प्रदेश में चल रहे पोषण अभियानों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs) बेहद सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और आधुनिक पोषण आहार प्लांट का सफल संचालन कर रहे हैं। इसके अलावा, विश्वविद्यालयों के होम साइंस विभाग जिस तरह से ग्रासरूट लेवल पर जागरूकता फैला रहे हैं, वह देश के लिए एक मिसाल है। उन्होंने अक्षय पात्र फाउंडेशन के जरिए स्कूली बच्चों को मिल रहे गर्म और पौष्टिक भोजन की भी सराहना की।

मिलेट्स नूडल्स से लेकर यूनिसेफ की साझेदारियों तक

उत्तराखंड से आईं चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर नीतू पुलारा ने इस आयोजन को सीखने का एक बेहतरीन जरिया बताया। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी और बच्चे पारंपरिक भोजन से दूर होकर फास्ट फूड की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए मिजोरम के स्टॉल पर प्रदर्शित 'मिलेट्स (श्री अन्न) से तैयार नूडल्स' का प्रयोग उन्हें बेहद अनूठा और प्रेरणादायक लगा।

उन्होंने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ के स्टॉल पर उन्हें यूनिसेफ के सहयोग से चलाए जा रहे विशेष कार्यक्रमों की बारीकियों को जानने का मौका मिला। ऐसे संवादों से यह स्पष्ट होता है कि जमीनी स्तर पर पोषण सुधार के लिए बड़े संगठनों और तकनीकी साझेदारियों का किस प्रकार बेहतर तालमेल बिठाया जा सकता है। उत्तराखंड की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों से बातचीत करके कई नई तकनीकें और पद्धतियां सीखीं, जिन्हें वे अपने कार्यक्षेत्र में लागू करेंगी।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के चेहरे पर खुशी, सरकार का जताया आभार

वाराणसी और उसके आसपास के जनपदों से बड़ी संख्या में पहुँची आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं में इस आयोजन को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखा गया। हाल ही में मानदेय में हुई बढ़ोतरी और कैशलेस चिकित्सा जैसी सौगात मिलने के बाद इन जमीनी योद्धाओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति अपना हार्दिक आभार व्यक्त किया।

गाजीपुर से आईं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शशिकला और सहायिका स्नेहलता का कहना था कि इस राष्ट्रीय स्तर के मेले में शिरकत करने से उनके ज्ञान के दायरे में काफी विस्तार हुआ है। यहाँ सीखी गई नई बातों को वे अपने गाँवों और कार्यक्षेत्रों में धरातल पर उतारने का पूरा प्रयास करेंगी। वहीं, तारा पांडेय ने कहा कि मुख्यमंत्री के संबोधन में उन्हें बाल विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मंत्र मिले, जिन्हें वे सीधे जरूरतमंद परिवारों तक पहुँचाएंगी।

मुख्यमंत्री संवाद: जब तमिलनाडु की कार्यकर्ता ने कहा 'वणक्कम'

कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायक पल तब आया जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और सीधे संवाद के जरिए ओडिशा, तमिलनाडु, गुजरात और गोरखपुर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से बातचीत की।

तमिलनाडु की समर्पित आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आर. रंजनी ने अपनी बात की शुरुआत पारंपरिक अभिवादन 'वणक्कम' के साथ की। उन्होंने एक दिल दहला देने वाली लेकिन प्रेरणादायक कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में जन्म के मात्र 21 दिन बाद जुड़वां बच्चों की माँ का असामयिक निधन हो गया था। ऐसे में उस बेसहारा परिवार को ढांढस बंधाना और उन दोनों मासूमों के पालन-पोषण की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाना एक बड़ी चुनौती थी। रंजनी ने न केवल आंगनवाड़ी केंद्र के माध्यम से बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी उन बच्चों की हर संभव देखभाल की। आज वे दोनों जुड़वां बच्चे दो साल के हो चुके हैं और नियमित रूप से आंगनवाड़ी केंद्र आते हैं। स्वस्थ और हंसते-खेलते उन बच्चों को देखकर रंजनी की आँखों में खुशी के आंसू आ जाते हैं। यह घटना साबित करती है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता केवल सूखा या गीला राशन बांटने वाली मशीन नहीं हैं, बल्कि वे समाज की वह ढाल हैं जो संकट के समय परिवार को भावनात्मक और मानसिक संबल देती हैं।

इसके अलावा, ओडिशा से आईं सहायिका से मुख्यमंत्री ने कुपोषण मुक्ति के उपायों पर चर्चा की। गोरखपुर के बसियापुर गाँव की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के साथ संवाद के दौरान जब मुख्यमंत्री ने कहा कि वह उस गाँव में पहले भी आ चुके हैं, तो कार्यकर्ता ने बड़े ही सहज और अपनेपन भरे अंदाज में कहा, "आप तो मेरे घर भी आए हैं!" इस सरलता और आत्मीयता ने पूरे सभागार में बैठे लोगों का दिल जीत लिया।

भविष्य की दिशा और निष्कर्ष

काशी की पवित्र भूमि से शुरू हुआ यह 9वाँ राष्ट्रीय पोषण माह इस बात का गवाह है कि जब तक समाज की अंतिम पायदान पर खड़ी महिला और बच्चा पोषित नहीं होगा, तब तक एक सशक्त राष्ट्र की कल्पना अधूरी है। विभिन्न राज्यों के प्रयोगों का यह आदान-प्रदान भारत को कुपोषण मुक्त बनाने के संकल्प को और अधिक गति प्रदान करेगा।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer (स्थानीय खबरें)

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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