हिमालय की गोद में बसे पड़ोसी देश नेपाल से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। नेपाल की मशहूर और उग्र भोटेकोशी नदी में आई भयंकर बाढ़ ने ऐसा तांडव मचाया है कि पूरा इलाका खंडहर में तब्दील हो गया है। इस प्राकृतिक आपदा के खौफनाक आंकड़े अब धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं, जिन्हें सुनकर किसी का भी दिल दहल जाए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस विनाशकारी आपदा में अब तक 1,365 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 4,000 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
तबाही के आंकड़े और सबसे ज्यादा प्रभावित जिले
आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इस बाढ़ का सबसे ज्यादा कहर नेपाल के कई प्रमुख जिलों पर टूटा है। चितवन जिला इस तबाही का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है, जहां अकेले 363 शव बरामद किए गए हैं। इसके बाद पूर्वी नवलपरासी में 226 और पश्चिमी नवलपरासी में 222 शवों को निकाला जा चुका है।
नुकसान का यह सिलसिला यहीं नहीं थमता। इसके अलावा नुवाकोट में 197, रसुवा में 174, गोरखा में 75, धादिङ में 70 और तनहुँ जिले से 38 शव बरामद किए गए हैं। प्रशासन और राहत टीमों के लिए इन जिलों में मलबे के ढेर से अपनों की तलाश करना किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं है।
अधिकारियों की कड़ी चुनौती: डीएनए और पहचान की प्रक्रिया
इतनी बड़ी संख्या में हुई मौतों के बाद प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती मृतकों की पहचान करने की थी। फॉरेंसिक विशेषज्ञों और मेडिकल टीमों ने दिन-रात एक करके अब तक कुल 2,698 डीएनए नमूने एकत्र किए हैं। इनमें से 1,286 नमूने सीधे तौर पर पीड़ितों से और 1,412 नमूने उनके लापता परिजनों से लिए गए हैं ताकि मिलान किया जा सके।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि अब तक कुल 1,147 शवों को सभी कानूनी और चिकित्सकीय प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद सुरक्षित तरीके से दफना दिया गया है। शवों से डीएनए सैंपल लेने और पहचान के सभी दस्तावेज सुरक्षित करने के बाद ही यह कदम उठाया गया है। इसके साथ ही, 1,310 अज्ञात शवों का पूरा विवरण नेपाल पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दिया गया है ताकि देश या विदेश में बैठा कोई भी परिजन अपने प्रियजन की सुराग लगा सके।
युद्ध स्तर पर जारी है खोज और बचाव अभियान
वर्तमान समय में भी नेपाल के प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का कार्य उतनी ही तेजी से चल रहा है जितना पहले दिन था। सरकार ने सुरक्षा बलों की एक बड़ी टुकड़ी को मैदान में उतार दिया है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, लापता लोगों की तलाश, राहत सामग्री का वितरण और नदियों के किनारे से शवों की बरामदगी के लिए कुल 7,975 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
राहत शिविरों में गुजर रही जिंदगी
घर-बार गंवा चुके लोगों के सामने जीने का संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ और भूस्खलन के कारण विस्थापित हुए 3,030 से अधिक लोग वर्तमान में विभिन्न जिलों में बनाए गए अस्थायी होल्डिंग सेंटरों और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठन इन शिविरों में रह रहे लोगों तक भोजन, पानी और चिकित्सा सहायता पहुंचाने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
लापता लोगों की तलाश की उम्मीदें अब भी बाकी
भले ही आपदा को बीते हुए कुछ वक्त बीत चुका हो, लेकिन 4,077 लोगों के अब भी लापता होने से उनके परिवारों की सांसें अटकी हुई हैं। हर दिन सुबह होती है तो अपनों के जिंदा मिलने की एक छोटी सी उम्मीद के साथ लोग राहत शिविरों और पुलिस थानों के चक्कर काटते हैं। सुरक्षा एजेंसियां भारी कठिनाइयों का सामना करते हुए उन दुर्गम इलाकों में भी तलाशी अभियान चला रही हैं जहां पहुंचना बेहद मुश्किल है।
यह आपदा न केवल नेपाल के बुनियादी ढांचे के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि इसने इंसानी जिंदगियों पर ऐसा गहरा जख्म छोड़ा है जिसे भरने में वर्षों लग जाएंगे। पूरी दुनिया की नजरें इस वक्त नेपाल के इस राहत अभियान पर टिकी हैं, और हर कोई यही प्रार्थना कर रहा है कि स्थिति जल्द से जल्द सामान्य हो सके।