वाशिंगटन, 09 सितंबर 2026। वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के पटल पर एक बार फिर उत्तर अमेरिकी महाद्वीप से बड़ी हलचल की खबर सामने आ रही है। दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और दशकों पुराने व्यापारिक साझीदार माने जाने वाले अमेरिका और कनाडा के बीच कड़वाहट अब चरम सीमा पर पहुंच चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आने वाले डेयरी प्रोडक्ट्स, शराब और मोटरसाइकिलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लिया है। अमेरिका के इस सख्त कदम से दोनों देशों के बीच चल रहा ट्रेड वॉर अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर आ गया है, जिससे आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों पर भी गहरा असर पड़ना तय माना जा रहा है।
29 सितंबर से लागू होगा नया प्रतिबंध, क्या है इसके मायने?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमेरिका की ओर से घोषित किए गए ये नए प्रतिबंध आगामी 29 सितंबर से पूरी तरह से प्रभावी हो जाएंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस और मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से सामने आया है कि इस आदेश के दायरे में मुख्य रूप से कनाडा से आयात होने वाली वाइन, विभिन्न प्रकार की शराब और अल्कोहल-फ्री बीयर को शामिल किया गया है। इसके साथ ही, दूध से जुड़े कई चुनिंदा डेयरी उत्पाद भी अब अमेरिकी सीमाओं के भीतर प्रवेश नहीं कर सकेंगे।
हालांकि, अमेरिकी प्रशासन का यह भी दावा है कि इन प्रतिबंधों के दायरे को रणनीतिक रूप से सीमित रखा गया है ताकि घरेलू स्तर पर अमेरिकी नागरिकों को रोजमर्रा की जरूरी चीजों के लिए अचानक से आसमान छूती महंगाई का सामना न करना पड़े। इसके बावजूद, सीमा के दोनों ओर बैठे कारोबारियों, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं के बीच भारी अनिश्चितता का माहौल पैदा हो गया है, क्योंकि दशकों से सहज रूप से चल रहा व्यापारिक पहिया अब अचानक ब्रेक लगाता दिख रहा है।
1930 के ऐतिहासिक टैरिफ एक्ट का हो रहा है इस्तेमाल
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प और गंभीर पहलू यह है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बार किसी आम व्यापारिक नीति के बजाय दशकों पुराने कानून का सहारा लिया है। व्हाइट हाउस की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, ये ताजा प्रतिबंध 1930 के ऐतिहासिक 'टैरिफ एक्ट' की धारा 338 के तहत लगाए गए हैं।
यह विशेष कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को इस बात की कानूनी शक्ति प्रदान करता है कि वे उन देशों से होने वाले आयात को रोक सकें, जो अमेरिकी व्यापार के खिलाफ किसी भी प्रकार का भेदभावपूर्ण रवैया अपनाते हैं या उसे बढ़ावा देते हैं। ट्रंप प्रशासन का साफ तौर पर आरोप है कि कनाडा लगातार अमेरिकी उत्पादों और कंपनियों के साथ अनुचित व्यवहार कर रहा है, जिसके चलते उन्हें यह कड़ा कदम उठाना पड़ रहा है।
स्टील, एल्यूमीनियम और फर्नीचर पर भी गिरेगी गाज
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल डेयरी और शराब ही नहीं, बल्कि अमेरिकी सरकार ने अपने शिकंजे का दायरा और अधिक व्यापक कर दिया है। व्हाइट हाउस की घोषणा के अनुसार, 15 सितंबर से दर्जनों अन्य कनाडाई उत्पादों पर भी मौजूदा 50 प्रतिशत के भारी-भरकम टैरिफ का दायरा और अधिक बढ़ा दिया जाएगा। इस दायरे में मुख्य रूप से स्टील और एल्यूमीनियम से बने सामान, लकड़ी का फर्नीचर और कागज उद्योग से जुड़े उत्पाद शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के फैसलों से दोनों देशों की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित होगी। निर्माण कार्यों से लेकर ऑटोमोबाइल और पैकेजिंग इंडस्ट्री तक, हर जगह इसके नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
कहाँ से शुरू हुआ यह विवाद? बातचीत टूटने के बाद बिगड़े हालात
आखिर इन दो पड़ोसी देशों के बीच रिश्तों में इतनी खटास कैसे आई? इसकी जड़ें पिछले महीने दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठकों के बेनतीजा रहने और बातचीत पूरी तरह टूटने में छिपी हैं। वार्ताओं के विफल होने के बाद से ही व्यापारिक तनाव में बेतहाशा तेजी आई।
- अमेरिका ने पहले कनाडा के लगभग 20 अरब डॉलर मूल्य के सामानों पर 50 प्रतिशत का भारी टैरिफ थोप दिया।
- इसके जवाब में कनाडा की सरकार ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिका के लगभग इतनी ही कीमत के सामानों पर 50 प्रतिशत तक का भारी-भरकम टैरिफ लगा दिया।
- इस जवाबी कार्रवाई से भड़के अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगामी वर्ष से कनाडाई गाड़ियों (ऑटोमोबाइल्स) पर और भी अधिक दंडात्मक टैरिफ लगाने की खुली धमकी दे दी है।
विमान निर्माता कंपनी बॉम्बार्डियर और सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स पर भी संकट
इस व्यापारिक संघर्ष की आंच अब कमान संभालने वाले बड़े औद्योगिक घरानों तक भी पहुंच चुकी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में कनाडा की प्रसिद्ध विमान निर्माता कंपनी 'बॉम्बार्डियर' को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ संकेत दिए हैं कि कनाडा की इस दिग्गज कंपनी को अमेरिका में अपने जेट विमान बेचने से प्रतिबंधित किया जा सकता है। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रस्ताव पर फिलहाल गंभीरता से विचार चल रहा है और जल्द ही इस पर अंतिम मुहर लग सकती है।
इसके अलावा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर अपने आक्रामक तेवर दिखाते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी ऐलान किया है कि वे देश के संबंधित विभागों और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर रहे हैं। इन निर्देशों के तहत, कनाडा में निर्मित किसी भी उत्पाद को अमेरिकी सरकार के विभिन्न प्रकार के सरकारी ठेकों (Government Contracts) और प्रोक्योरमेंट से पूरी तरह बाहर रखा जाएगा। ट्रंप का कहना है कि यह प्रतिबंध तब तक जारी रहेगा जब तक कनाडा अमेरिकी किसानों और कॉरपोरेट कंपनियों के लिए पूरी तरह से निष्पक्ष, न्यायसंगत और बराबरी का व्यापारिक माहौल दोबारा बहाल नहीं कर देता।
आम जनता और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर
अर्थशास्त्रियों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और कनाडा के बीच चल रहा यह ट्रेड वॉर यदि जल्द ही कूटनीतिक बातचीत के जरिए नहीं सुलझाया गया, तो इसके दूरगामी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। एक तरफ जहां सीमा के दोनों तरफ के छोटे और मध्यम व्यापारी अपनी आजीविका को लेकर चिंतित हैं, वहीं दूसरी तरफ ग्लोबल मार्केट में कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका बढ़ गई है। 29 सितंबर को यह प्रतिबंध लागू होने के बाद स्थितियां और अधिक स्पष्ट होंगी, लेकिन फिलहाल दोनों देशों के बीच किसी भी तरह के समझौते के आसार दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं।