पड़ोसी देश नेपाल इन दिनों प्रकृति के सबसे बड़े तांडव का सामना कर रहा है। लगातार हो रही भारी मानसूनी बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। नेपाल के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ और भयानक भूस्खलन (Landslides) के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 95 के पार पहुंच गई है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच भारत की ओर से भी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस दुखद घड़ी में भारत सरकार से नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता मुहैया कराने की अपील की है।
नेपाल में तबाही का मंजर: अब तक क्या कुछ हुआ?
नेपाल के गृह मंत्रालय से मिले आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते देश की कई नदियां उफान पर हैं। राजधानी काठमांडू घाटी सहित कई अन्य जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। मलबे में कई मकान दब गए हैं, और सैकड़ों परिवार बेघर हो चुके हैं।
स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियों की टीमें दिन-रात रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं, लेकिन लगातार खराब मौसम और टूट चुके सड़क संपर्क के कारण राहत सामग्री पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नेपाल सरकार ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं।
राहुल गांधी ने मोदी सरकार से की बड़ी अपील
इस विकट परिस्थिति में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के जरिए नेपाल के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि वह अपने करीबी पड़ोसी और मित्र राष्ट्र नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में खुलकर मदद करे।
राहुल गांधी ने अपने संदेश में लिखा, "नेपाल से आ रही बाढ़ और भूस्खलन की तस्वीरें बेहद व्यथित करने वाली हैं। जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। संकट की इस घड़ी में भारत को एक सच्चे पड़ोसी का फर्ज निभाते हुए नेपाल को राहत और बचाव कार्यों में हरसंभव सहायता प्रदान करनी चाहिए।"
नेपाल एम्बेसी का आधिकारिक बयान आया सामने
बढ़ते संकट के बीच नेपाल दूतावास ने भी स्थिति को लेकर एक बयान जारी किया है। दूतावास के अधिकारियों ने बताया कि नेपाल सरकार स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मदद के लिए संपर्क साधा जा रहा है।
बयान में कहा गया है कि भारतीय अधिकारियों के साथ भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि सीमावर्ती इलाकों में जलभराव और बाढ़ के पानी से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। नेपाल एम्बेसी ने भारत के उन तमाम नागरिकों और राजनीतिक दलों का भी आभार व्यक्त किया है जिन्होंने इस आपदा पर संवेदना जताई है।
भारत और नेपाल के रिश्ते और मानवीय सहायता
भारत और नेपाल के संबंध हमेशा से सांस्कृतिक और भौगोलिक रूप से बेहद प्रगाढ़ रहे हैं। इतिहास गवाह है कि जब भी नेपाल पर कोई प्राकृतिक आपदा आई है, भारत ने हमेशा 'पहले पड़ोसी' (Neighbour First) की नीति के तहत सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाया है। साल 2015 के विनाशकारी भूकंप के दौरान भी भारत ने बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया था।
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि केंद्र सरकार जल्द ही नेपाल के लिए राहत पैकेज या एनडीआरएफ (NDRF) की विशेष टीमों के सहयोग का ऐलान कर सकती है।
