भ्रष्टाचार के मामलों में एसीबी (ACB) की पैनी नजर हमेशा से भ्रष्ट अधिकारियों की नींद उड़ाती रही है। राजस्थान से एक ऐसा ही बेहद चौकाने वाला मामला सामने आया है, जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। जिस विभाग में पारदर्शिता और किसानों की सेवा की जिम्मेदारी होनी वहां किस तरह से खेल चल रहा है, इसका अंदाजा इस ताजा खुलासे से लगाया जा सकता है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच में दो ऐसे कृषि अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, जिनके पास से भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई है, जबकि कागजों में उनकी वित्तीय स्थिति और दावों की पोल पूरी तरह से खुल चुकी है।
दो महीने से नहीं मिली थी सैलरी, फिर बैग में कहां से आए ढाई लाख से ज्यादा?
मामला तब गरमाया जब एसीबी ने रूटीन जांच और खुफिया इनपुट के आधार पर दो कृषि अधिकारियों की गतिविधियों पर शिकंजा कसा। शुरुआती पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने अपने बचाव में जो दलीलें दीं, वे जांच अधिकारियों को बिल्कुल भी गले नहीं उतरीं। पकड़े गए अधिकारियों के पास से बैग में 2.63 लाख रुपये की संदेहास्पद नकदी बरामद हुई थी।
जब एसीबी ने उनसे इस मोटी रकम के बारे में पूछताछ की, तो अधिकारियों ने दावा किया कि यह पैसा बैंक से निकाला गया है। लेकिन, जब ब्यूरो की टीम ने उनके बैंक खातों के रिकॉर्ड और पिछले लेन-देन की गहराई से छानबीन की, तो यह दावा पूरी तरह झूठा साबित हुआ। बैंक रिकॉर्ड में इस तरह की किसी भी बड़ी निकासी का कोई प्रमाण नहीं मिला। सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाली बात यह थी कि पिछले दो महीनों से इन दोनों अधिकारियों को विभाग से किसी प्रकार की सैलरी (वेतन) भी जारी नहीं हुई थी। ऐसे में बिना सैलरी के इतने नकद रुपये उनके पास कहां से आए, यह सवाल सबसे बड़ा रहस्य बन गया था।
मोबाइल चैट्स और कॉल डिटेल्स ने खोले राज
सिर्फ बैंक रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि एसीबी की टेक्निकल इन्वेस्टिगेशन ने इस पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया। जब अधिकारियों के मोबाइल फोन की डिजिटल फॉरेंसिक जांच की गई, तो उसमें कई चौंकाने वाले राज बाहर आए।
मोबाइल से कई औद्योगिक इकाइयों (Industrial Units) के प्रतिनिधियों और दलालों के साथ हुई चैट्स और कॉल डिटेल्स (CDR) बरामद हुईं। इन चैट्स से साफ हो गया कि यह रकम किसी बैंक से निकाली गई बचत नहीं थी, बल्कि उद्योगों और संबंधित सप्लायरों से वसूली गई अवैध रिश्वत (Bribe) की रकम थी। अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधियों के बीच हुए संवाद इस बात की गवाही दे रहे थे कि फाइलों के निस्तारण और एनओसी के एवज में इस मोटी रकम का सौदा तय हुआ था।
एसीबी की सख्त कार्रवाई और दर्ज हुई एफआईआर
तथ्यों और डिजिटल सबूतों के पुख्ता होने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बिना कोई वक्त गंवाए दोनों कृषि अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत औपचारिक रूप से एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। एसीबी के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में सिर्फ इन दोनों तक ही जांच सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों और उच्चाधिकारियों की संलिप्तता की भी बारीकी से जांच की जाएगी।
- बरामदगी: 2.63 लाख रुपये नकद (लिफाफे में बंद)।
- मुख्य बहाना: बैंक से पैसे निकालने का दावा (जो रिकॉर्ड में झूठा साबित हुआ)।
- बड़ा मोड़: मोबाइल चैट्स और कॉल डिटेल्स से खुली अवैध वसूली की पोल।
- अगला कदम: एसीबी द्वारा नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरों की तलाश जारी।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति
राजस्थान में एसीबी लगातार उन सरकारी बाबुओं और अधिकारियों पर शिकंजा कस रही है जो अपनीदद और पद का दुरुपयोग कर अवैध कमाई करने में लगे हैं। इस ताजा मामले ने एक बार फिर सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों की मदद के लिए बनी कृषि इकाइयों में यदि इस स्तर पर भ्रष्टाचार पनप रहा है, तो यह आम जनता के साथ सीधा धोखा है।
एसीबी के इस कड़े एक्शन से महकमे में हड़कंप मच गया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ यह कार्रवाई अन्य भ्रष्ट कर्मचारियों के लिए भी एक कड़ी चेतावनी है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और डिजिटल युग में सबूतों को छिपाना नामुमकिन है।
