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ग्वालियर में बनेगा देश का पहला टेलीकॉम हब, 1 रुपए में जमीन और बंपर छूट

ग्वालियर में बनेगा देश का पहला टेलीकॉम हब, 1 रुपए में जमीन और बंपर छूट

ग्वालियर अब भारत को टेलीकॉम सेक्टर में ग्लोबल पावर हाउस बनाने की रेस में सबसे आगे निकल आया है। मप्र के इस ऐतिहासिक शहर में देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ) आकार लेने जा रहा है, जिससे न सिर्फ स्थानीय स्तर पर आर्थिक क्रांति आएगी बल्कि भारत वैश्विक बाजार में भी अपनी स्थिति मजबूत करेगा। हाल ही में चैंबर भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय कार्यशाला के दौरान इस मेगा प्रोजेक्ट का पूरा ब्लूप्रिंट देश के सामने रखा गया, जिसे लेकर निवेशकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है।

170 एकड़ में फैलेगा देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन

इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को दो चरणों में जमीन पर उतारा जाएगा। एमपीआईडीसी (MPIDC) की कार्यकारी निदेशक अनीषा श्रीवास्तव ने प्रेजेंटेशन के जरिए बताया कि टीएमजेड का 'फेज-ए' ग्वालियर के आईटी पार्क के पास गारमेंट पार्क के नजदीक 70 एकड़ क्षेत्र में विकसित होगा। वहीं, इसका 'फेज-बी' साडा (SADA) क्षेत्र में 100 एकड़ जमीन पर फैला होगा। इस तरह कुल 170 एकड़ के विशाल भूभाग पर यह हाई-टेक टेलीकॉम हब तैयार किया जाएगा।

इस प्रोजेक्ट की एग्जिक्यूटिव बॉडी एमपीआईडीसी होगी, जिसमें मध्य प्रदेश सरकार की 51 प्रतिशत और केंद्र सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट के लिए 493 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता दे रही है, जिससे वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा।

निवेशकों के लिए महा-ऑफर: 1 रुपए में जमीन और 200 करोड़ तक सब्सिडी

सरकार की ओर से निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ऐसी नीतियां बनाई गई हैं, जो देश के किसी भी इंडस्ट्रियल जोन में शायद ही देखने को मिलेंगी। प्रोजेक्ट के तहत निवेशकों को कई लुभावने लाभ दिए जा रहे हैं:

  • जमीन और लीज: महज 1 रुपए के प्रीमियम पर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी और अगले 30 साल तक लीज रेंट भी सिर्फ 1 रुपए प्रति वर्गमीटर रहेगा।
  • बिजली राहत: उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बिजली दरों पर 5 साल तक 2 रुपए प्रति यूनिट की सीधी छूट दी जाएगी।
  • कैपिटल सब्सिडी: निवेशकों को 50 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी मिलेगी, जिसकी अधिकतम सीमा 200 करोड़ रुपए तक है।
  • रोजगार और ट्रेनिंग सपोर्ट: स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए प्रति कर्मचारी 5,000 रुपए वेतन सहायता और 13,000 रुपए तक का ट्रेनिंग सपोर्ट दिया जाएगा।

63 लाख करोड़ के ग्लोबल मार्केट में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी

दूरसंचार विभाग (DoT) के उपमहानिदेशक अनिल कुमार भारद्वाज ने कार्यशाला में चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि दुनिया में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग का कुल कारोबार 636 बिलियन डॉलर (करीब 63 लाख करोड़ रुपए) का है, लेकिन इसमें भारत की हिस्सेदारी फिलहाल महज 1 फीसदी यानी 63 हजार करोड़ रुपए के आसपास है। इसी बड़े गैप को पाटने के लिए ग्वालियर के इस टीएमजेड को गेम-चेंजर माना जा रहा है।

सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 10,000 करोड़ रुपए के निवेश और 20,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजन का स्पष्ट लक्ष्य रखा है। कार्यशाला के दौरान ही देश की दिग्गज कंपनियों के नुमाइंदों ने जमीन का दौरा किया और शुरुआती दौर में ही 150 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव सौंप दिए गए। ज्योरथ वेंचर्स इंटरनेशनल के सीईओ प्रमोद यादव और आईकैम्प के अंशुल एस. सक्सेना ने मौके पर ही अपने प्रस्ताव सौंपकर इस पर मुहर लगा दी।

टाइमलाइन और स्थानीय कारोबारियों के लिए मौके

निवेशकों के मन में उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए अधिकारियों ने साफ किया कि अगले 3 से 4 महीनों के भीतर जमीन का आवंटन शुरू हो जाएगा और महज 1 से 2 साल के भीतर पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर धरातल पर उतर जाएगा। दूरसंचार विभाग के नेतृत्व में एमवी इलेक्ट्रोसिस्टम, ऑप्टिमस, स्पर्श सीसीटीवी, टेस्कॉम, टेक्नोट्रेंड्ज और वीएनटी जैसी बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने प्रस्तावित साइट्स (सेजल फार्म और साडा क्षेत्र) का निरीक्षण किया है।

यह प्रोजेक्ट सिर्फ बड़े निवेशकों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्वालियर के स्थानीय व्यापारी और उद्यमी भी इसके वैल्यू चेन पार्टनर, सप्लायर या एसोसिएट के रूप में जुड़कर इस आर्थिक क्रांति का हिस्सा बन सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: ग्वालियर में बनने वाले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ) का कुल क्षेत्रफल कितना है?

Ans: यह जोन कुल 170 एकड़ में बनेगा, जिसमें से 70 एकड़ आईटी पार्क के पास (फेज-ए) और 100 एकड़ साडा क्षेत्र में (फेज-बी) विकसित किया जाएगा।

Q2: निवेशकों को जमीन किस दर पर दी जा रही है?

Ans: निवेशकों को जमीन मात्र 1 रुपए के प्रीमियम पर दी जाएगी और अगले 30 वर्षों तक इसका लीज रेंट भी केवल 1 रुपए प्रति वर्गमीटर होगा।

Q3: इस प्रोजेक्ट से कितने रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है?

Ans: इस मेगा प्रोजेक्ट के जरिए लगभग 20,000 नए रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर नौकरियां मिलेंगी।

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

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अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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