अमेरिकी प्रशासन में बड़ा फेरबदल, पहली ब्रीफिंग, वकालत के दावे और चीन पर बयानों से घिरे विवाद के बाद हुआ एक्शन
अमेरिकी प्रशासन से सामने आए एक बड़े घटनाक्रम के तहत व्हाइट हाउस की नवनियुक्त प्रेस सचिव केटी जकारिया को पद संभालने के महज पांच दिन के भीतर ही हटाए जाने की रिपोर्ट्स सामने आई हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट और एएफपी समाचार एजेंसी के अनुसार, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर इस घटनाक्रम की पुष्टि की है। इस नियुक्ति और उनके बेहद संक्षिप्त कार्यकाल के दौरान कई तरह के विवाद जुड़े रहे, जिनमें उनकी पहली प्रेस ब्रीफिंग का छोटा दायरा, वकालत की परीक्षा को लेकर सामने आए तथ्य और चीन की बुनियादी सुविधाओं पर की गई टिप्पणी शामिल हैं।
पद से हटाने से पहले ट्रंप ने दी थी पुनर्विचार की सलाह
केटी जकारिया को पद से हटाए जाने की खबर सामने आने से कुछ ही घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के बाहर संवाददाताओं से बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने जिक्र किया था कि उन्होंने जकारिया से पूछा था कि क्या उन्हें वास्तव में यह नौकरी चाहिए। राष्ट्रपति ट्रंप ने संवाददाताओं को बताया था कि उन्होंने जकारिया को इस प्रशासनिक फैसले पर दोबारा सोचने की सलाह दी थी। इस बातचीत के कुछ ही घंटों बाद उनके पद से हटने की खबरें सार्वजनिक हो गईं, जिससे अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गईं। जकारिया ने इससे पहले कैरोलिन लेविट की जगह यह पद संभाला था।
पहली प्रेस ब्रीफिंग और प्रदर्शन पर उठे सवाल
कैबिनेट और प्रशासन की नीतियों को मीडिया के सामने रखने वाली प्रेस सचिव के रूप में केटी जकारिया की पहली आधिकारिक प्रेस ब्रीफिंग मंगलवार को आयोजित हुई थी। यह ब्रीफिंग 15 मिनट से भी कम समय तक चली, जिसमें उन्होंने ट्रंप प्रशासन की उपलब्धियों का जिक्र किया और पत्रकारों के केवल तीन सवालों के जवाब दिए। व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर शुरुआती ब्रीफिंग का यह छोटा स्वरूप और मीडिया के सवालों का सीमित दायरा चर्चा का विषय बन गया, जिससे उनके प्रशासनिक प्रदर्शन को लेकर सवाल खड़े हुए।
वकालत की परीक्षा और पेशेवर योग्यता पर विवाद
केटी जकारिया की पेशेवर पृष्ठभूमि और कानूनी योग्यता को लेकर भी विवाद की स्थिति बनी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट और विभिन्न टेलीविजन कार्यक्रमों में खुद को वकील बताया था। इसके अलावा उन्होंने कैलिफोर्निया स्थित एक कंजर्वेटिव गैर-लाभकारी संगठन में जनरल काउंसल यानी कानूनी सलाहकार के रूप में अपनी भूमिका का उल्लेख भी किया था। हालांकि, गुरुवार को फॉक्स न्यूज के एंकर सीन हैनिटी के साथ एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने खुद स्वीकार किया कि वह बार परीक्षा यानी वकालत की परीक्षा पास नहीं कर पाई थीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने दोबारा परीक्षा नहीं दी और न ही उनका आगे वकालत करने का इरादा था। अपनी नियुक्ति का बचाव करते हुए उन्होंने फॉक्स न्यूज को दिए एक अन्य इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था, न कि व्हाइट हाउस के कानूनी सलाहकार के रूप में। इन बयानों के बाद उनकी साख और योग्यता को लेकर सार्वजनिक बहस छिड़ गई।
चीन के शौचालयों पर टिप्पणी और बीजिंग की प्रतिक्रिया
अपने कार्यकाल के दौरान जकारिया द्वारा चीन की सुविधाओं पर की गई टिप्पणी ने भी कूटनीतिक और राजनीतिक स्तर पर विवाद को हवा दी। दक्षिणपंथी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जैक पोसोबिएक के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने चीन में अपने पुराने अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा था कि वहां ढंग के शौचालय भी नहीं हैं और इसी आधार पर उन्होंने सवाल उठाया था कि चीन अगला बड़ा देश कैसे बन सकता है। उनकी इस टिप्पणी की काफी आलोचना हुई। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने सुझाव दिया था कि जकारिया को चीन का अधिक बार दौरा करना चाहिए। इन तमाम विवादों और शुरुआती असहजताओं के बीच पांच दिन का यह कार्यकाल समाप्त हो गया।