संसद से सड़क तक विरोध की गूंज
राजधानी दिल्ली में राजनीतिक पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानवेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों का आक्रोश कम होने का नाम नहीं ले रहा है। विरोध प्रदर्शन के दूसरे दिन भी स्थिति बेहद तनावपूर्ण रही। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारी नेताओं के बीच तीखी झड़पें देखने को मिलीं, जिसके बाद पुलिस ने कई प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब देश की चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक दलों के बीच लगातार बहस छिड़ी हुई है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग का कामकाज लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुकूल नहीं है, जिसके चलते उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
मल्लिकार्जुन खड़गे के लंच से समाजवादी पार्टी की दूरी
एक तरफ जहां विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (INDIA) एकजुट होकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है, वहीं गठबंधन के भीतर की आंतरिक खींचतान भी खुलकर सामने आने लगी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा विपक्षी नेताओं के सम्मान में आयोजित किए गए विशेष दोपहर के भोजन (लंच) कार्यक्रम से समाजवादी पार्टी (SP) के नेताओं की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की दूरियां आने वाले चुनावी समीकरणों और विपक्षी एकता पर बड़ा असर डाल सकती हैं। हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक और विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन गठबंधन के भीतर समन्वय की कमी अब जगजाहिर होने लगी है।
कांग्रेस की आक्रामक रणनीति: आज और तेज होंगे प्रदर्शन
विपक्षी खेमे की प्रमुख पार्टी कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वे इन विरोध प्रदर्शनों की धार को कम नहीं होने देंगे। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मंगलवार को एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह घोषणा की कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आज यानी दूसरे दिन भी प्रदर्शनों का सिलसिला और अधिक आक्रामक तरीके से जारी रहेगा।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे जनता के अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपनी इस लड़ाई को तब तक जारी रखेंगे जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को देश के विभिन्न हिस्सों में शांतिपूर्ण लेकिन कड़े विरोध प्रदर्शन करने के निर्देश दिए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, जगह-जगह बैरिकेडिंग
विपक्ष के इन तेवरों को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। विरोध प्रदर्शन के संभावित मार्गों पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। कई स्थानों पर लोहे की मजबूत बैरिकेडिंग की गई है ताकि प्रदर्शनकारी सुरक्षा घेरा तोड़कर आगे न बढ़ सकें।
प्रशासन का कहना है कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिन इलाकों में धारा 144 लागू है, वहां किसी भी प्रकार की भीड़ को इकट्ठा होने की अनुमति नहीं दी जा रही है। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के बाद कई नेताओं को हिरासत में लेकर नजदीकी पुलिस थानों में ले जाया गया है, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई है।
विपक्ष की मुख्य मांगें और आगे की राह
- चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता: विपक्ष का मुख्य जोर ईवीएम और वीवीपैट पर्ची के मिलान शत-प्रतिशत सुनिश्चित करने पर है।
- निष्पक्षता की मांग: आयोग के निर्णयों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूर्ण निष्पक्षता की गारंटी मांगी जा रही है।
- आपसी समन्वय: विपक्षी दलों के बीच भले ही कुछ मुद्दों पर मतभेद हों, लेकिन CEC के खिलाफ इस साझा मोर्चे ने सरकार के खिलाफ दबाव बढ़ाने का काम किया है।
आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या विपक्षी दल अपनी इस एकजुटता को जमीन पर बरकरार रख पाते हैं या फिर आपसी कलह उनके अभियान को कमजोर कर देगी। फिलहाल, राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है और हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और चुनाव आयोग इस बढ़ते दबाव का क्या जवाब देते हैं।