वाराणसी के पवित्र अस्सी घाट पर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब गंगा के तेज बहाव के बीच एक व्यक्ति अपनी जिंदगी और मौत की जंग लड़ने लगा। घाट पर मौजूद लोगों की सांसें थम गईं क्योंकि डूब रहे शख्स को बचाने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा था। ऐसे संकट के वक्त देवदूत बनकर पहुंचे 36वीं वाहिनी पीएसी, रामनगर के तीन जांबाज जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना गंगा में छलांग लगा दी और सूरज पाल नाम के उस व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाल लाए।
अस्सी घाट पर मची चीख-पुकार और सेकेंडों का फैसला
घटना के वक्त अस्सी घाट पर रोजाना की तरह चहल-पहल थी। अचानक गंगा के पानी में कुछ हलचल हुई और लोगों ने चिल्लाना शुरू किया कि कोई डूब रहा है। सूरज पाल नामक व्यक्ति किसी तरह गहरे पानी में चला गया था और वह पानी के तेज बहाव में संभल नहीं पाया। देखते ही देखते वह डूबने लगा। घाट पर मौजूद लोगों की भीड़ सिर्फ तमाशा देख रही थी और मदद के लिए चिल्ला रही थी, क्योंकि गंगा का वह हिस्सा अपनी गहराई के लिए कुख्यात है।
हरिशंकर मौर्य ने बिना एक पल गंवाए लगाई छलांग
इस खतरनाक परिस्थिति में 36वीं वाहिनी पीएसी, रामनगर के जवान ड्यूटी पर तैनात थे। जैसे ही जवानों की नजर डूबते हुए सूरज पाल पर पड़ी, मुख्य आरक्षी हरिशंकर मौर्य ने एक सेकंड की भी देरी नहीं की। उन्होंने अपनी वर्दी के परवाह किए बिना सीधा गंगा के तेज बहाव में छलांग लगा दी। हरिशंकर का यह त्वरित निर्णय किसी की जिंदगी बचाने के लिए सबसे अहम साबित हुआ।
सहयोगी जवानों ने दिखाई अद्भुत सूझबूझ
नदी के अंदर संघर्ष कर रहे सूरज पाल तक पहुंचना अकेले हरिशंकर के लिए मुश्किल हो रहा था, क्योंकि पानी का दबाव बहुत ज्यादा था। इसे भांपते हुए मुख्य आरक्षी हरेन्द्र यादव और आरक्षी शनि देवल गुप्ता ने भी तुरंत बचाव कार्य में छलांग लगा दी और अपने साथी का सहयोग किया। तीनों जवानों ने मिलकर एक अचूक टीम वर्क दिखाया। एक ने डूब रहे शख्स को थामा तो दूसरे ने सुरक्षित किनारे की तरफ खींचने में मदद की।
सुरक्षित बाहर निकाला गया सूरज पाल
तीनों पीएसी जवानों के संयुक्त और अथक प्रयास का परिणाम यह रहा कि कुछ ही पलों में सूरज पाल को मौत के मुंह से खींचकर सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बाहर आने पर सूरज पाल पूरी तरह से बेसुध हो चुके थे और उनके पेट में काफी पानी भर गया था। जवानों ने तुरंत प्राथमिक उपचार और सीपीआर (CPR) की प्रक्रिया शुरू की, जिससे कुछ ही देर में उन्हें होश आ गया और उनकी सांसें सामान्य होने लगीं।
प्रशासन और जनता ने की जवानों की सराहना
इस घटना के बाद अस्सी घाट पर मौजूद सैकड़ों पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने पीएसी के इन तीनों जवानों—हरिशंकर मौर्य, हरेन्द्र यादव और शनि देवल गुप्ता—की जमकर तारीफ की। लोगों का कहना था कि अगर ये जवान समय पर मुस्तैदी नहीं दिखाते, तो एक बड़ा हादसा हो सकता था। इस साहसिक कार्य ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि खाकी और वर्दीधारी जवान केवल कानून-व्यवस्था संभालने के लिए ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों की रक्षा के लिए भी हमेशा तत्पर रहते हैं।
- घटना स्थल: अस्सी घाट, वाराणसी
- बचाया गया व्यक्ति: सूरज पाल
- बचाने वाले जवान: हरिशंकर मौर्य (मुख्य आरक्षी), हरेन्द्र यादव (मुख्य आरक्षी), शनि देवल गुप्ता (आरक्षी)
- वाहिनी: 36वीं वाहिनी पीएसी, रामनगर, वाराणसी
यह घटना उन तमाम लोगों के लिए एक मिसाल है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपनी जान की बाजी लगाकर दूसरों की रक्षा करना अपना सर्वोच्च कर्तव्य मानते हैं। वाराणसी पुलिस और पीएसी प्रशासन ने भी अपने इन जवानों के इस अदम्य साहस और मानवीय दृष्टिकोण की सराहना की है। वर्तमान में सूरज पाल पूरी तरह से स्वस्थ हैं और अपने परिवार के पास सुरक्षित लौट चुके हैं।