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पहाड़ों पर महाजाम: नैनीताल से मनाली तक सड़कों पर कटी पर्यटकों की रात, होटलों के दाम आसमान पर

पहाड़ों पर महाजाम: नैनीताल से मनाली तक सड़कों पर कटी पर्यटकों की रात, होटलों के दाम आसमान पर

पहाड़ी राज्यों की हसीन वादियां इन दिनों पर्यटकों से पूरी तरह पट चुकी हैं। तीन दिन के लंबे अवकाश (वीकेंड) के चलते उत्तराखंड से लेकर हिमाचल प्रदेश तक के पर्यटन स्थलों पर ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गईं। नैनीताल, कैंची धाम, मसूरी और मनाली जैसे प्रमुख पर्यटक स्थलों पर वाहनों का ऐसा रेला दिखा कि हाईवे से लेकर गलियों तक सब कुछ घंटों जाम रहा। हालात इतने बदतर हो गए कि कई पर्यटकों को अपनी रात होटलों के कमरों की बजाय खुली सड़कों के किनारे बितानी पड़ी।

नैनीताल और कैंची धाम में व्यवस्थाएं ध्वस्त, सड़कों पर उमड़ा रेला

उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल का मुख्य केंद्र नैनीताल इस वीकेंड पर्यटकों के भारी दबाव से जूझता नजर आया। स्थिति यह थी कि शहर के सभी छोटे-बड़े होटल, होमस्टे और रिसॉर्ट पूरी तरह पैक हो चुके थे। जिन लोगों ने पहले से बुकिंग नहीं कराई थी, उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शुक्रवार की रात जब सैलानियों को कहीं भी रहने के लिए कमरा नहीं मिला, तो उन्हें मल्लीताल और तल्लीताल के रिक्शा स्टैंड, बस स्टेशनों तथा बंद पड़ी दुकानों के बाहर खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ी।

शनिवार को स्थिति और अधिक गंभीर हो गई। सुबह होते ही नैनीताल की ओर आने वाले रास्तों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। रूसी बाईपास से लेकर भूमियाधार और नारायण नगर तक वाहनों का ऐसा तांता लगा कि ट्रैफिक रेंगने लगा। एक अनुमान के मुताबिक, इस दौरान करीब 15 हजार पर्यटक अकेले नैनीताल पहुंचे। काठगोदाम से आगे ज्योलीकोट और भीमताल मार्ग पर भी वाहनों के अत्यधिक दबाव के कारण स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई थी।

बाबा नीम करौली के दरबार में उमड़े 60 हजार से अधिक श्रद्धालु

विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम में इस वीकेंड आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि प्रशासन के सारे दावे धरे के धरे रह गए। सुबह से लेकर शाम तक बाबा नीम करौली के दर्शन के लिए करीब 60 हजार श्रद्धालु वहां पहुंच गए। सामान्य दिनों की तुलना में यह संख्या कई गुना अधिक थी। इस भारी भीड़ के कारण कुमाऊं की लाइफलाइन कहे जाने वाले हल्द्वानी-अल्मोड़ा हाईवे पर भीषण जाम लग गया।

गाड़ियों के पहिए थमने के कारण हजारों पर्यटक और स्थानीय लोग घंटों तक भूखे-प्यासे अपने वाहनों में ही फंसे रहे। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि पुलिस प्रशासन के नियंत्रण से बाहर निकलती दिखाई दी। इस जाम की चपेट में सिर्फ पर्यटक ही नहीं, बल्कि आपातकालीन सेवाओं और अस्पताल जा रहे मरीज भी फंसे रहे, जिससे मानवीय संकट जैसी स्थिति पैदा हो गई।

होटलों की मनमानी: 2 हजार का कमरा 12 हजार में बिका

मांग और आपूर्ति के असंतुलन का फायदा उठाते हुए कई जगहों पर होटल कारोबारियों ने कथित तौर पर मनमाने दाम वसूले। सामान्य दिनों में जो कमरे दो से तीन हजार रुपये में मिल जाते हैं, उन्हें इस भारी भीड़ के दौरान 10 से 12 हजार रुपये तक में बेचा गया। जिन सैलानियों के पास होटल की प्री-बुकिंग नहीं थी, उन्हें रूसी बाईपास और नारायणनगर बैरियर से ही वापस लौटा दिया गया। रूसी बाईपास से नैनीताल शहर के बीच चलने वाले शटल वाहनों द्वारा भी पर्यटकों से अधिक किराया वसूले जाने की शिकायतें सामने आईं।

इसके अलावा, नैनीताल के पास एक पर्यटक वाहन के गहरी खाई में गिर जाने का भी दुखद समाचार मिला, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया।

मसूरी से लेकर चारधाम यात्रा मार्गों पर भी लगा महाजाम

उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। मसूरी में सिविल अस्पताल रोड, मसूरी-धनोल्टी मार्ग और मसूरी-टिहरी रोड पर लक्ष्मणपुरी के पास लंबा जाम लग गया। इस भयंकर जाम के आगे पुलिस और प्रशासन के तमाम ट्रैफिक प्लान फेल साबित हुए। लैंसडौन और कोटद्वार मार्गों पर भी गाड़ियों की लंबी कतारें लगी रहीं।

तीर्थयात्रा मार्गों पर भी भारी हलचल रही। बद्रीनाथ हाईवे पर शुक्रवार रात से शनिवार सुबह तक करीब 12 किलोमीटर लंबा जाम लगा रहा, जिसमें हजारों यात्री घंटों फंसे रहे। चमोली जिले में ज्योतिर्मठ से मारवाड़ी तक सात किलोमीटर लंबा जाम सैलानियों और स्थानीय नागरिकों के लिए सिरदर्द बन गया। केदारनाथ यात्रा मार्ग पर श्रीनगर, रुद्रप्रयाग और गौरीकुंड क्षेत्र में भी दिनभर वाहनों का दबाव बना रहा और रुक-रुक कर जाम लगता रहा। ऋषिकेश शहर में भी गंगा घाटों की ओर जाने वाले रास्तों पर सैलानी जाम से जूझते नजर आए।

हिमाचल प्रदेश के मनाली और शिमला में भी पैर रखने की जगह नहीं

उत्तराखंड की तरह ही पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी पर्यटकों का सैलाब उमड़ पड़ा। मनाली, शिमला और चंबा जिले का ऐतिहासिक डलहौजी पूरी तरह पर्यटकों से भरा हुआ था। शिमला के मशहूर पिकनिक स्पॉट कुफरी में वाहनों की संख्या अचानक इतनी बढ़ गई कि वहां भारी ट्रैफिक जाम लग गया।

इस जाम की वजह से एक बड़ी प्रशासनिक और मानवीय चिंता तब खड़ी हो गई जब शिमला के एक प्रतिष्ठित स्कूल (सेंट एडवर्ड स्कूल) के करीब 100 छोटे छात्र कुफरी में पिकनिक मनाने के बाद जाम में फंस गए। बच्चे तय समय पर अपने घरों तक नहीं पहुंच पाए, जिससे उनके अभिभावक తీవ్ర चिंता में डूब गए। मासूम बच्चे करीब तीन से चार घंटे तक गाड़ियों के बीच जाम में फंसे रहे। परेशान माता-पिता लगातार पुलिस और प्रशासन से संपर्क साधकर बच्चों की सलामती की जानकारी लेते रहे।

निष्कर्ष और आगे के लिए सबक

इस वीकेंड की घटनाओं ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि हमारे पर्वतीय पर्यटन स्थलों पर इंफ्रास्ट्रक्चर की एक सीमा है। जब एक साथ लाखों लोग इन सीमित क्षमता वाले क्षेत्रों का रुख करते हैं, तो यातायात प्रबंधन और बुनियादी सुविधाएं चरमरा जाती हैं। पर्यटन से आजीविका और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा जरूर मिलता है, लेकिन इस तरह की बेकाबू भीड़ और कुप्रबंधन आने वाले समय में गंभीर पर्यावरणीय और प्रशासनिक चुनौतियों को जन्म दे रहा है। आवश्यकता इस बात की है कि प्रशासन भविष्य में ऐसे लंबे अवकाशों के दौरान ट्रैफिक और होटल बुकिंग को लेकर पहले से ही कोई ठोस और सख्त डिजिटल रेगुलेशन तैयार करे, ताकि न तो पर्यटकों को भूखे-प्यासे सड़कों पर रात गुजारनी पड़े और न ही स्थानीय नागरिकों को असुविधा हो।

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रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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