आकाश की ऊंचाइयों पर कूटनीति के नए समीकरण पक रहे हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चली आ रही तल्खी का असर अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रास्तों पर साफ दिखाई दे रहा है। पड़ोसी देश पाकिस्तान ने एक बार फिर अपनी जिद दिखाते हुए भारतीय विमानों के लिए अपने एयरस्पेस पर पाबंदियों को आगे बढ़ा दिया है, जो 24 अक्टूबर 2026 तक पूरी तरह लागू रहेंगी। लेकिन कहते हैं न कि जहां राह बंद होती है, वहीं से नए रास्ते भी निकलते हैं। इस संकट के बीच भारत ने एक ऐसा कूटनीतिक दांव चला है, जिससे बीजिंग और नई दिल्ली के बीच आसमान की दूरियां कम होती नजर आ रही हैं।
पाकिस्तान की पाबंदियों से बढ़ा बोझ, क्या है ताजा स्थिति?
पाकिस्तान की ओर से लगाई गई ये पाबंदियां कोई नई नहीं हैं, लेकिन इन्हें बार-बार बढ़ाया जाना भारतीय एविएशन सेक्टर के लिए चिंता का विषय जरूर बन गया है। अप्रैल 2025 में बढ़े तनाव के बाद से ही पाकिस्तान ने अपने आसमान को भारतीय एयरलाइंस, रजिस्टर्ड और लीज पर लिए गए विमानों के लिए बंद कर दिया था। ताजा आदेश के तहत यह बैन 24 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगा।
इस मनमाने फैसले का सीधा असर भारतीय विमान कंपनियों के ऑपरेशनल खर्च और फ्लाइट के समय पर पड़ रहा है। पश्चिमी देशों या मध्य एशिया की तरफ जाने वाली उड़ानों को लंबे अल्टरनेट रूट्स से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे ईंधन की खपत भी बढ़ती है और यात्रियों का समय भी ज्यादा खर्च होता है। पाकिस्तान की इस अड़ंगेबाजी से निपटने के लिए अब भारत ने उत्तर की ओर देखना शुरू कर दिया है, जहां से एक नया और सुरक्षित विकल्प तैयार हो सकता है।
चीन के शिनजियांग कॉरिडोर पर टकटकी
सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के मुताबिक, भारत सरकार चीन के साथ एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक रास्ते पर विचार कर रही है। बातचीत का मुख्य केंद्र चीन का शिनजियांग प्रांत और उसका महत्वपूर्ण इलाका होटान (Hotan) है। भारतीय एविएशन अधिकारी और विदेश मंत्रालय मिलकर यह कोशिश कर रहे हैं कि शिनजियांग के ऊपर के एयरस्पेस को भारतीय एयरलाइंस के लिए एक वैकल्पिक कॉरिडोर के तौर पर इस्तेमाल करने की अनुमति मिल जाए।
यह कूटनीतिक बातचीत पिछले एक साल से अधिक समय से पर्दे के पीछे चल रही थी, लेकिन हाल ही में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के बाद इसे एक नया सकारात्मक मोड़ मिला है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में हुए इस ऐतिहासिक सम्मेलन में शामिल होने के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद में तेजी आई है, जिसका असर अब एविएशन सेक्टर पर भी पड़ता दिख रहा है।
बहाल हो रही हैं भारत-चीन डायरेक्ट फ्लाइट्स
शिनजियांग एयरस्पेस पर चल रही इन वार्ताओं के बीच एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भारत और डायरेक्टर जनरल लेवल पर एयर कनेक्टिविटी को धीरे-धीरे पटरी पर लाया जा रहा है। हाल ही में चाइना सदर्न एयरलाइंस ने ग्वांगझू से नई दिल्ली के बीच अपनी विमान सेवा को फिर से शुरू करने का बड़ा ऐलान किया है। इसके अलावा, एयरलाइन ने दक्षिण एशिया के रीजन में अपनी पकड़ मजबूत करते हुए 8 राउंड-ट्रिप रूटों पर हर हफ्ते 100 से ज्यादा उड़ानें संचालित करने की घोषणा की है।
भारतीय विमानन कंपनियों ने भी इसमें पीछे न रहते हुए ठोस कदम उठाए हैं। इंडिगो और एयर इंडिया जैसी प्रमुख एयरलाइंस ने पिछले कुछ महीनों में चीन के लिए अपनी सीधी उड़ानों को दोबारा शुरू किया है। अक्टूबर 2025 में कोलकाता-ग्वांगझू और नवंबर में दिल्ली-ग्वांगझू रूट पर इंडिगो की उड़ानें शुरू हुईं। इसके बाद, फरवरी 2026 की शुरुआत में एयर इंडिया ने भी दिल्ली और शंघाई के बीच अपनी डायरेक्ट फ्लाइट्स की शुरुआत कर दी, जिसे यात्रियों और बिजनेस सेक्टर से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है।
ग्लोबल एविएशन पर कूटनीति का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीन शिनजियांग कॉरिडोर के इस्तेमाल को लेकर अंतिम सहमति दे देता है, तो यह भारतीय एविएशन इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा गेम-चाेंजर साबित हो सकता है। इससे न केवल यूरोप और सेंट्रल एशिया जाने वाली फ्लाइट्स का रूट छोटा होगा, बल्कि पाकिस्तानी एयरस्पेस पर निर्भरता भी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को लगातार बेनकाब कर रहे भारत ने अपनी विदेश नीति में यह साफ कर दिया है कि देश के आर्थिक और रणनीतिक हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान की हरकतों का जवाब अब कूटनीतिक और आर्थिक विकल्पों की तलाश करके दिया जा रहा है।
आगे की राह
आने वाले हफ्तों में दोनों देशों के बीच तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर होने वाली बैठकें यह तय करेंगी कि शिनजियांग एयरस्पेस का यह नया गलियारा भारतीय विमानों के लिए कब तक खुल पाएगा। यदि यह समझौता सिरे चढ़ता है, तो यह भारतीय उड़ानों के लिए एक नया आसमान और राहत भरा सफर लेकर आएगा, जो पाकिस्तान की मनमानी का एक माकूल जवाब भी होगा।