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बिहार में बनेगी देश की अनोखी यूनिवर्सिटी, वीसी से लेकर छात्राएं तक होंगी सिर्फ महिलाएं

बिहार में बनेगी देश की अनोखी यूनिवर्सिटी, वीसी से लेकर छात्राएं तक होंगी सिर्फ महिलाएं

बिहार की धरती पर महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रक्षाबंधन के पावन अवसर पर महिलाओं को ऐसा तोहफा दिया है, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। सरकार ने एक ऐसी अनूठी यूनिवर्सिटी स्थापित करने का ऐलान किया है, जिसकी रूपरेखा और संचालन पूरी तरह से महिलाओं के हाथों में होगा। यह भारत के उच्च शिक्षा इतिहास में अपनी तरह का एक अनूठा कदम माना जा रहा है, जो बेटियों को पंख देने का काम करेगा।

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छात्रा से लेकर वीसी तक, सब होंगी सिर्फ महिलाएं

इस प्रस्तावित महिला यूनिवर्सिटी की सबसे बड़ी और खास विशेषता यह है कि इसका पूरा इकोसिस्टम नारी शक्ति पर आधारित होगा। इस विश्वविद्यालय के गलियारों में केवल छात्राओं की ही गूंज होगी, यानी इसमें सिर्फ महिलाओं को ही प्रवेश मिलेगा। हैरान करने वाली और बेहद गर्व की बात यह है कि इस संस्थान में पढ़ाई करने वाली छात्राओं से लेकर, उन्हें पढ़ाने वाली प्रोफेसर (टीचिंग स्टाफ), प्रशासनिक कामकाज संभालने वाले लोग (नॉन-टीचिंग स्टाफ) और यहां तक कि विश्वविद्यालय की सर्वोच्च अधिकारी यानी वाइस चांसलर (कुलपति) पद पर भी केवल महिलाएं ही आसीन होंगी।

यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में जेंडर इक्वलिटी और महिलाओं के नेतृत्व को एक नए शिखर पर ले जाने वाली है। सरकार का मानना है कि एक सुरक्षित, अनुकूल और पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित शैक्षणिक माहौल मिलने से राज्य की बेटियां उच्च शिक्षा में और अधिक उत्साह के साथ आगे आएंगी।'समृद्ध महिला, समृद्ध बिहार अभियान' और डीबीटी का कमाल

इस बड़े ऐलान की पृष्ठभूमि पटना के ऐतिहासिक बापू सभागार में रची गई। गुरुवार, 27 अगस्त को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 'समृद्ध महिला, समृद्ध बिहार अभियान' का भव्य आगाज किया। इसी मंच से रक्षाबंधन के तोहफे के रूप में महिला रोजगार योजना की पहली और दूसरी किस्त सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी गई।

सरकार ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से लगभग 5 लाख महिलाओं के बैंक खातों में कुल 600 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि ट्रांसफर की है। इस आर्थिक मदद का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी इलाकों की महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।

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जीविका दीदियों के लिए 20,000 करोड़ रुपये का मेगा प्लान

बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुकी 'जीविका दीदियों' के लिए सरकार ने तिजोरी खोल दी है। बापू सभागार के मंच से सीएम सम्राट चौधरी ने बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि साल 2030 तक बिहार सरकार जीविका दीदियों के समग्र विकास और सशक्तिकरण पर लगभग 20,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

यह राशि उन महिलाओं के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में मदद करेगी जिन्होंने ग्रासरूट लेवल पर अपनी मेहनत और संगठन की ताकत से पूरे बिहार की तस्वीर बदल दी है। ग्रामीण इलाकों में स्वरोजगार, वित्तीय साक्षरता और छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय निवेश माना जा रहा है।महिलाओं और बच्चियों के लिए तीन और धमाकेदार योजनाएं

यूनिवर्सिटी के ऐलान से ठीक एक दिन पहले यानी बुधवार, 26 अगस्त को बिहार सरकार ने महिला कल्याण और सुरक्षा के मोर्चे पर तीन बेहद अहम योजनाओं को हरी झंडी दिखाई थी। ये योजनाएं राज्य की बेटियों के भविष्य को सुरक्षित और सुदृढ़ करने के लिए डिजाइन की गई हैं:

  • बेटी स्टार्टअप चैलेंज: महिला उद्यमियों को अपने बिजनेस आइडिया को धरातल पर उतारने और उसे रफ्तार देने के लिए सरकार 50,000 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद देगी। इस योजना के तहत लगभग 2,100 महिलाओं को सीधे तौर पर लाभान्वित किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य इनोवेशन करने वाली बेटियों को प्रोत्साहित करना है।
  • बालिका पीएचडी फेलोशिप: उच्च शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार ने इस अनूठी फेलोशिप की शुरुआत की है। इसके तहत राज्य की जो बेटियां पीएचडी कर रही हैं, उन्हें लगातार 4 साल तक हर महीने 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ शुरुआती चरण में 1,000 छात्राओं को मिलेगा।
  • पुलिस दीदी और सुरक्षा का पहरा: स्कूल और कॉलेजों के आसपास छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'पुलिस दीदी' अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत विशेष रूप से तैनात पुलिस दीदियों के लिए 4,700 दोपहिया वाहनों (स्कूटी/बाइक्स) का भी शुभारंभ किया गया है, ताकि वे शिक्षण संस्थानों के बाहर गश्त कर सकें और मनचलों पर लगाम कस सकें।

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बदल रही है बिहार की तस्वीर

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार सरकार के ये तमाम कदम सिर्फ चुनावी लोकलुभावन वादे नहीं हैं, बल्कि यह एक सुविचारित रणनीति का हिस्सा हैं। जब राज्य की आधी आबादी को शिक्षा, स्टार्टअप्स, उच्च शोध और सुरक्षा के मोर्चे पर एक साथ मजबूत किया जाता है, तो समाज की संरचना में सकारात्मक बदलाव आना तय है।

देश की पहली ऐसी ऑल-विमेन यूनिवर्सिटी का निर्माण और उसके साथ जुड़ी अन्य योजनाएं यह साबित करती हैं कि आने वाले दिनों में बिहार की बेटियां देश और दुनिया के पटल पर अपनी एक अलग और सशक्त पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सरकार के इन फैसलों से न सिर्फ महिला साक्षरता दर में सुधार होगा, बल्कि जेंडर गैप को पाटने में भी ऐतिहासिक सफलता मिलेगी।


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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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