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गयाजी में महासंगम: पितृपक्ष मेले का भव्य आगाज, CM सम्राट चौधरी आज करेंगे उद्घाटन

गयाजी में महासंगम: पितृपक्ष मेले का भव्य आगाज, CM सम्राट चौधरी आज करेंगे उद्घाटन

मोक्ष की भूमि गयाजी में आज से आस्था, परंपरा और तर्पण का वह महाकुंभ शुरू हो रहा है, जिसकी प्रतीक्षा देश और दुनिया के कोने-कोने में बैठे सनातन धर्मावलंबी पूरे साल करते हैं। पितरों के प्रति अटूट श्रद्धा का प्रतीक यह महापर्व यानी पितृपक्ष मेला आज से विधिवत रूप से अपनी पूरी भव्यता के साथ शुरू हो चुका है। फल्गु नदी के तट से लेकर विष्णुपद मंदिर के प्रांगण तक, पूरा शहर इस समय एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत नजर आ रहा है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया है और पूरा गयाजी धाम मानों अपने पूर्वजों के स्वागत के लिए पलकें बिछाए बैठा है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे मेले का औपचारिक उद्घाटन

इस बार के पितृपक्ष मेले का प्रशासनिक और राजकीय महत्व काफी बढ़ गया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज विशेष विमान यानी हेलीकॉप्टर से सीधे गया पहुंचेंगे। उनके आगमन को लेकर स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। मुख्यमंत्री के गया पहुंचते ही सबसे पहले उनका कार्यक्रम प्रसिद्ध और ऐतिहासिक विष्णुपद मंदिर में पूजा-अर्चना करने का है। यहां वे भगवान विष्णु के चरण चिह्नों पर शीश नवाकर अपने मंत्रिमंडल और प्रदेश की जनता की सुख-शांति की कामना करेंगे।

विष्णुपद मंदिर में दर्शन के पश्चात मुख्यमंत्री सीधे गया के मुख्य गांधी मैदान पहुंचेंगे, जहां इस विशाल मेले का भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया है। इस समारोह में राज्य सरकार के कई अन्य वरिष्ठ मंत्री, स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। उद्घाटन के तुरंत बाद मुख्यमंत्री के देवघाट का दौरा करने और वहां फल्गु नदी के तट पर की गई व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लेने की भी योजना है।

25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलेगा आस्था का यह सफर

पंचांग और ग्रह-नक्षत्रों की गणना के अनुसार, इस वर्ष पितृपक्ष मेला 25 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा। यह पूरा पखवाड़ा उन आत्माओं को समर्पित होता है, जिनकी पीढ़ियों को हम अपनी व्यस्त जिंदगी में पीछे छोड़ आए होते हैं। इन 16 दिनों के दौरान देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि अमेरिका, नेपाल, ब्रिटेन और मॉरीशस जैसे विदेशी राष्ट्रों से भी बड़ी संख्या में पिंडदानी गयाजी की पावन भूमि पर पहुंच रहे हैं।

श्रद्धालु फल्गु नदी के तट, विष्णुपद मंदिर, अक्षयवट और विभिन्न प्राचीन पिंडवेदी स्थलों पर अपने पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति और मोक्ष प्राप्ति के लिए पिंडदान, तर्पण और ब्राह्मण भोजन जैसे अनुष्ठान संपन्न करेंगे। मान्यता है कि गयाजी में पिंडदान करने से पूर्वजों को चौरासी लाख योनियों के बंधनों से मुक्ति मिल जाती है और वे सीधे बैकुंठ को प्राप्त होते हैं।

प्रशासनिक तैयारियां और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

लाखों की संख्या में जुटने वाली भीड़ को नियंत्रित करना और उन्हें हरसंभव सुविधा मुहैया कराना किसी भी सरकार और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। हालांकि, इस बार गया जिला प्रशासन, नगर निगम और पर्यटन विभाग ने मिलकर महीनों पहले से ही इसकी चाक-चौबंद तैयारियां शुरू कर दी थीं। शहर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक न हो सके।

  • स्वच्छता अभियान: शहरभर में विशेष सफाई कर्मियों की फौज तैनात की गई है ताकि मेला क्षेत्र में कहीं भी गंदगी का नामोनिशन न रहे।
  • पेयजल और अस्थायी शौचालय: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह शुद्ध पेयजल के प्याऊ और आधुनिक मोबाइल शौचालयों का निर्माण किया गया है।
  • विद्युत सज्जा: ऐतिहासिक विष्णुपद मंदिर, गांधी मैदान और मुख्य मार्गों को रंग-बिरंगी दूधिया रोशनी से सजाया गया है, जिससे रात के समय गयाजी की खूबसूरती देखते ही बनती है।
  • यागम और ट्रैफिक नियंत्रण: भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाते हुए शहर के भीतर सुगम यातायात और पार्किंग के खास इंतजाम किए गए हैं।

भीड़ प्रबंधन और सहूलियत पर विशेष जोर

चूंकि इस बार देश और दुनिया से रिकॉर्डतोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है, इसलिए नगर प्रशासन ने आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं को भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा है। हर प्रमुख पिंडवेदी स्थल पर मेडिकल कैंप बनाए गए हैं जहां डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ चौबीसों घंटे तैनात रहेंगे। इसके अलावा, खोया-पाया केंद्र (Lost and Found Counters) भी बनाए गए हैं ताकि बुजुर्गों या बच्चों के बिछड़ने की स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।

सनातन संस्कृति और अर्थव्यवस्था का अनूठा संगम

पितृपक्ष मेला केवल धार्मिक आस्था का ही केंद्र नहीं है, बल्कि यह गयाजी की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी एक नई गति प्रदान करता है। इन 16 दिनों में यहां के होटल व्यवसायियों, स्थानीय पंडा समाज, कुटीर उद्योगों, हस्तशिल्प विक्रेताओं और खान-पान के दुकानदारों का कारोबार अपने चरम पर होता है। आतिथ्य और सेवा भाव का जो अनूठा रूप गयाजी की गलियों में इन दिनों देखने को मिलता है, वह दुनिया में कहीं और दुर्लभ है।

आज से शुरू हुए इस महाकुंभ के साथ ही पूरा गयाजी धाम 'श्री विष्णुपद की जय' और 'पिंडदान महात्म्य' के जयकारों से गूंज उठा है। प्रशासन से लेकर आम नागरिकों तक, हर कोई इस बात का संकल्प लिए हुए है कि इस बार गया आने वाले किसी भी तीर्थयात्री को कोई असुविधा न हो और वे एक अलौकिक संतोष के साथ अपने घर वापस लौटें।

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रोली सिंह

रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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