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बिहार में बेटियों की सुरक्षा पर बड़ा एक्शन, मुख्य सचिव ने डीएम-एसपी को दी कड़ी चेतावनी

बिहार में बेटियों की सुरक्षा पर बड़ा एक्शन, मुख्य सचिव ने डीएम-एसपी को दी कड़ी चेतावनी

बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बार फिर से कानून-व्यवस्था को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य में हाल ही के दिनों में सामने आई कुछ अप्रिय घटनाओं के बाद शासन स्तर पर एक्शन का दौर शुरू हो गया है। इसी कड़ी में राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की है। इस बैठक का मुख्य केंद्रबिंदू राज्य में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा था, जिस पर सरकार अब किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में बिल्कुल नहीं दिख रही है।

अपराधियों में दिखना चाहिए कानून का खौफ

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य सचिव ने दो टूक शब्दों में प्रशासनिक अधिकारियों को चेताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराधियों के मन में कानून का डर स्पष्ट रूप से नजर आना चाहिए। यदि पुलिस प्रशासन की तरफ से किसी भी स्तर पर सुस्ती या शिथिल कार्यशैली देखने को मिलती है, तो उसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार का साफ मानना है कि समाज में सुरक्षा का माहौल बनाए रखना और अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करना स्थानीय प्रशासन की सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

हाल के दिनों में जमुई, समस्तीपुर और बांका जिलों से युवतियों के साथ बदसलूकी और छेड़खानी की कुछ घटनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं, विशेषकर बांका में वायरल हुए वीडियो के बाद से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया था। इन मामलों ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया है।

अब सीधे तय होगी डीएम और एसपी की जवाबदेही

इस नई व्यवस्था के तहत अब हर जिले में कानून-व्यवस्था की सीधी और संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित पुलिस अधीक्षक (SP) और जिलाधिकारी (DM) की होगी। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि एसपी को केवल कार्यालयों तक सीमित न रहकर पुलिस बल के एक वास्तविक लीडर के तौर पर मैदान में उतरकर काम करना होगा। अधिकारियों के कामकाज का आकलन अब कागजी रिपोर्ट के आधार पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाले नतीजों से होगा।

  • त्वरित प्रतिक्रिया (Quick Response): किसी भी घटना के बाद पुलिस कितनी जल्दी एक्शन लेती है, यह मूल्यांकन का मुख्य आधार होगा।
  • जनता का फीडबैक: आम जनता और विशेषकर महिलाओं से मिलने वाली प्रतिक्रिया को प्रशासनिक रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।
  • जमीनी सुरक्षा: जमीनी स्तर पर पुलिस की मौजूदगी कितनी मजबूत है, इसकी नियमित मॉनिटरिंग होगी।

खराब प्रदर्शन करने वाले या अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अब बिना किसी देरी के तत्काल विभागीय और कानूनी कार्रवाई की गाज गिरेगी।

जमुई की कार्रवाई को बनाया गया मिसाल

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने जमुई में हुई घटना के बाद पुलिस द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई की सराहना की। जमुई जिले में कोचिंग से लौट रहे एक किशोर और किशोरी को कुछ असामाजिक तत्वों ने घेर लिया था, जिसके बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपियों के खिलाफ तुरंत सख्त कदम उठाए थे। शासन ने इस कार्रवाई को एक सकारात्मक उदाहरण के तौर पर पेश किया है और राज्य के बाकी जिलों के पुलिस प्रशासन को भी इसी तरह की फुर्ती दिखाने के निर्देश दिए हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों से कहा गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सघन पुलिस गश्त (Patrolling) बढ़ाएं और अनुमंडल स्तर तक कड़ी निगरानी तंत्र विकसित करें। सड़कों पर पुलिस की मौजूदगी का अहसास आम नागरिकों को सुरक्षित महसूस कराना चाहिए।

फर्जी खबरों और अफवाहों पर भी रहेगी पैनी नजर

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के मोर्चे पर केवल अपराधियों से निपटना ही काफी नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया के दौर में फैलने वाली अफवाहों पर रोक लगाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसे ध्यान में रखते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और शांति व्यवस्था भंग करने के इरादे से जो लोग भी फर्जी खबरें या भ्रामक सूचनाएं फैलाते हैं, उनके खिलाफ तत्काल कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। ऐसे तत्वों पर साइबर सेल और स्थानीय पुलिस मिलकर कड़ी नजर रखेगी।

आगामी त्योहारों को लेकर खुफिया तंत्र मजबूत

चूंकि आने वाले दिनों में कई बड़े पर्व और त्योहार नजदीक हैं, इसलिए स्थानीय खुफिया तंत्र (Intelligence Network) को पूरी तरह से सक्रिय और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील इलाकों की पहचान कर वहां अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने और असामाजिक तत्वों पर पहले से ही नकेल कसने की रणनीति तैयार की गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।

पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों को भी यह निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल मुख्यालय में न बैठें, बल्कि जिलों का नियमित दौरा करें और आवश्यकता पड़ने पर रात्रि प्रवास भी करें ताकि मैदानी हकीकत का जायजा लिया जा सके।

बिहार सरकार और प्रशासन के इन कड़े रुख से यह स्पष्ट हो जाता है कि आने वाले दिनों में पुलिसिंग के स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। मुख्य सचिव के इन सख्त निर्देशों के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जिलों में तैनात डीएम और एसपी इस व्यवस्था को कितनी प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारते हैं और राज्य की बेटियों को कितना सुरक्षित माहौल मिल पाता है।

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रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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