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अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर पीयूष गोयल का बड़ा बयान, रखी ये शर्त

अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर पीयूष गोयल का बड़ा बयान, रखी ये शर्त

वैश्विक व्यापार के बदलते समीकरणों के बीच भारत ने अमेरिका के साथ होने वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को लेकर अपनी स्थिति बिल्कुल स्पष्ट कर दी है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अमेरिका के साथ किसी भी व्यापार समझौते को अंतिम रूप तभी दिया जाएगा, जब वाशिंगटन की ओर से भारत को ऐसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर और तरजीही शर्तों की पेशकश की जाएगी, जिससे भारतीय निर्यातकों को ग्लोबल मार्केट में साफ तौर पर बढ़त मिल सके।

कड़े रुख के पीछे की रणनीति और वैश्विक बाजार की प्रतिस्पर्धा

नई दिल्ली में वाणिज्य मंत्रालय द्वारा आयोजित मुक्त व्यापार समझौतों पर एक विशेष कार्यशाला को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने यह बात कही। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत दुनिया के कई प्रमुख देशों के साथ अपने व्यापारिक रिश्तों को नए आयाम दे रहा है और वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी स्थिति को और मजबूत करने में जुटा हुआ है।

श्रीलंका, बांग्लादेश, थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देश अमेरिकी बाजार में भारत के सबसे बड़े और कड़े प्रतिस्पर्धी माने जाते हैं। इन देशों की तुलना में यदि अमेरिकी बाजार में भारतीय वस्तुओं को शुल्क (टैरिफ) के मोर्चे पर रियायतें या विशेष लाभ नहीं मिलता है, तो भारतीय उत्पादों के लिए वहां टिकना और मुकाबला करना कठिन हो सकता है। यही वजह है कि भारत सरकार इस मामले में बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रही है और अपने हितों से किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है।

किन देशों के साथ आगे बढ़ रहा है भारत का व्यापारिक दायरा?

कार्यशाला के दौरान पीयूष गोयल ने देश के ट्रेड नेटवर्क के विस्तार का पूरा खाका भी सामने रखा। उन्होंने जानकारी दी कि न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौता बहुत जल्द लागू होने जा रहा है। इसके तुरंत बाद 27 यूरोपीय देशों के समूह यानी यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ भी मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) लागू कर दिया जाएगा।

भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति के तहत अब तक ब्रिटेन, मॉरीशस, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापार समझौते सफलतापूर्वक लागू किए जा चुके हैं। इसके अलावा, आने वाले दो-तीन वर्षों में कनाडा, मैक्सिको, चिली, मर्कोसुर, दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (एसएसीयू), खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) और इजराइल के साथ भी एफटीए को अमलीजामा पहनाने की पुख्ता तैयारी है।

व्यापार समझौतों का डेटा और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

  • भारत के मौजूदा 9 मुक्त व्यापार समझौते ऐसे देशों के साथ हैं जिनकी कुल जीडीपी करीब 60 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर है।
  • इन समझौतों के जरिए भारत को वैश्विक व्यापार के लगभग दो-तिहाई हिस्से तक तरजीही पहुंच मिल रही है।
  • आसियान, दक्षिण कोरिया और जापान के साथ पहले से मौजूद समझौतों की समीक्षा के बाद यह दायरा और बढ़ेगा।
  • समीक्षा के बाद भारतीय उत्पादों की पहुंच वैश्विक बाजार के 75 प्रतिशत हिस्से तक अपने प्रतिस्पर्धियों से कम दरों पर सुनिश्चित हो सकेगी।

अमेरिका के साथ मौजूदा स्थिति और आगामी बैठकें

भारत और अमेरिका के बीच इस साल फरवरी के महीने में व्यापार समझौते के पहले चरण की रूपरेखा को अंतिम रूप दिए जाने की घोषणा की गई थी। हालांकि, इसके बाद अमेरिकी शुल्क व्यवस्था में आए बदलावों के कारण दोनों देशों के बीच वार्ताओं का दौर दोबारा शुरू हुआ। स्थिति तब और बदल गई जब अमेरिका ने 24 जुलाई से भारत समेत कई अन्य देशों के उत्पादों पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क लगा दिया, जिसके बाद से कूटनीतिक स्तर पर वार्ताओं का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

इन तमाम कूटनीतिक और आर्थिक गतिविधियों के बीच, पीयूष गोयल सितंबर के अंत में अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर रवाना होने वाले हैं। अपनी इस यात्रा के दौरान वह अमेरिकी राज्य विस्कॉन्सिन के मिल्वौकी शहर में आयोजित होने वाली जी-20 व्यापार मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही, उनका अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकों का भी कार्यक्रम है, जिसमें दोनों देशों के बीच रुके हुए व्यापार समझौतों और शुल्क से जुड़े विवादों पर प्रमुखता से चर्चा होने की पूरी संभावना है।

निर्यातकों के लिए क्या हैं मायने?

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने अकेले अमेरिका को लगभग 87 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की वस्तुओं का निर्यात किया है। ऐसे में यदि अमेरिकी प्रशासन भारत को अन्य विकासशील या प्रतिस्पर्धी एशियाई देशों की तुलना में बेहतर शुल्क लाभ देता है, तो भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और कपड़ा, इंजीनियरिंग, फार्मा जैसे प्रमुख क्षेत्रों को भारी बूस्ट मिलेगा।

कुल मिलाकर, भारत ने यह साफ कर दिया है कि व्यापार समझौते केवल औपचारिकता नहीं होने चाहिए, बल्कि उनसे देश के निर्यातकों और घरेलू उद्योगों को वास्तविक आर्थिक लाभ मिलना चाहिए। अमेरिका यात्रा के दौरान होने वाली आगामी बैठकों से ही यह तय होगा कि दोनों देशों के बीच अटकी हुई ट्रेड डील को पटरी पर लाने में कितनी सफलता मिलती है।

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काव्या त्रिपाठी

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Senior Editor (Business & Technology)

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

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