पुणे शहर की ऐतिहासिक और अत्यधिक व्यस्त वैकुंठ श्मशान भूमि पर लगातार बढ़ते दबाव को कम करने के लिए अब प्रशासनिक स्तर पर बड़े और कड़े कदम उठाए जाने लगे हैं। मध्यवर्ती पुणे क्षेत्र में स्थित होने के कारण इस श्मशान भूमि पर पूरे शहर से अंतिम संस्कार के लिए शव लाए जाते हैं, जिससे यहां रोजाना लंबी प्रतीक्षा और भारी भीड़ की स्थिति बनी रहती है। इस समस्या से निजात पाने के लिए पुणे महानगरपालिका (PMC) ने अब अंतिम संस्कार की सुविधाओं के विकेंद्रीकरण यानी डिसेंट्रलाइजेशन की एक व्यापक योजना पर काम शुरू कर दिया है।
वैकुंठ श्मशान पर क्यों बढ़ रहा है लगातार दबाव?
पुणे के मध्यवर्ती पेठ क्षेत्रों से पिछले कुछ दशकों में बड़ी संख्या में परिवार शहर के विस्तारित और नए इलाकों जैसे कोथरूड, सिंहगढ़ रोड, बाणेर और खराड़ी की तरफ शिफ्ट हो चुके हैं। इसके बावजूद, पुरानी परंपराओं और भावनाओं के चलते मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार के लिए आज भी अधिकांश लोग वैकुंठ श्मशान भूमि को ही पहली प्राथमिकता देते हैं।
इस पुरानी मानसिकता और बढ़ती आबादी के मेल ने वैकुंठ श्मशान की व्यवस्थाओं पर भारी अतिरिक्त भार डाल दिया है। स्थिति यह हो जाती है कि कई बार शोकाकुल परिवारों को अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार के लिए भी घंटों का इंतजार करना पड़ता है। इसी परिस्थिति को भांपते हुए मनपा के विद्युत विभाग ने शहर के विभिन्न कोनों में आधुनिक गैस शवदाह गृह स्थापित करने का खाका तैयार किया है।
7 स्थानों पर मास्टरप्लान, कहां-कहां पूरा हुआ काम?
पुणे महानगरपालिका की इस महत्वकांक्षी योजना के तहत शहर के 7 विस्तारित क्षेत्रों में नए गैस शवदाह गृह बनाए जाने का नियोजन किया गया है। प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार:
- महंमदवाड़ी: यहां निर्माण कार्य पूरी तरह से पूरा हो चुका है।
- खराड़ी: इस प्रमुख पूर्वी क्षेत्र में भी गैस शवदाह गृह बनकर तैयार है।
- बाणेर: पश्चिमी पुणे के इस तेजी से विकसित होते इलाके में भी इंफ्रास्ट्रक्चर का काम पूरा किया जा चुका है।
- म्हालुंगे: इस क्षेत्र में गैस शवदाह गृह स्थापित करने का काम वर्तमान में तेजी से प्रगति पर है।
इन चार प्रमुख स्थानों पर काम लगभग पूरा होने या अंतिम चरण में होने से शहर के अलग-अलग हिस्सों के लोगों को जल्द ही बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
तीन स्थानों पर स्थानीय विरोध बना बड़ी चुनौती
हालांकि विकास कार्यों की यह राह इतनी आसान भी नहीं है। मनपा की इस योजना को कई इलाकों में स्थानीय नागरिकों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ रहा है। जिन तीन प्रमुख स्थानों पर पेंच फंसा हुआ है, उनमें येवलेवाड़ी, उत्तमनगर और खड़कवासला शामिल हैं.
स्थानीय नागरिकों और रहिवासियों का तर्क है कि उनके इलाके में गैस शवदाह गृह शुरू होने से शहर के दूर-दराज के हिस्सों से भी शव यहां लाए जाएंगे। इससे न केवल उनके स्थानीय परिसरों में गाड़ियों का ट्रैफिक और भीड़ बढ़ेगी, बल्कि श्मशान भूमि पर भी अतिरिक्त दबाव पैदा हो जाएगा।
स्थानीय राजनीति और सुलह की कोशिशें
विवाद को सुलझाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रयास जारी हैं। उदाहरण के लिए, येवलेवाड़ी क्षेत्र में स्थानीय विधायक के हस्तक्षेप और मध्यस्थता के बाद नागरिकों का विरोध कुछ हद तक कम हुआ है और स्थिति नियंत्रण में है। हालांकि, उत्तमनगर और खड़कवासला में अभी भी लोगों की आपत्तियां कायम हैं। पुणे मनपा अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों, कमेटियों और नागरिकों के साथ लगातार बैठकें कर रही है ताकि संवाद के जरिए इस समस्या का कोई व्यावहारिक समाधान निकाला जा सके।
कई अन्य इलाकों से भी उठ रही है आधुनिक सुविधाओं की मांग
एक तरफ जहां कुछ इलाकों में विरोध के सुर सुनाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शहर के कई ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां के स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने खुद आगे बढ़कर मनपा से आधुनिक गैस शवदाह गृह स्थापित करने की पुरजोर मांग की है।
मांजरी, रामटेकड़ी, नांदेड़ सिटी, धायरी और सुतारवाड़ी जैसे इलाकों के स्थानीय प्रतिनिधियों ने मनपा प्रशासन को पत्र लिखकर अपने क्षेत्रों में भी आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल शवदाह गृह बनाने की गुहार लगाई है। हालांकि, इनमें से कुछ जगहों पर तकनीकी अड़चनें भी हैं। उदाहरण के तौर पर, नांदेड़ सिटी में जिस जमीन पर श्मशान भूमि प्रस्तावित है, वह अभी तक आधिकारिक तौर पर मनपा के कब्जे में नहीं आई है। इसलिए वहां का पूरा भविष्य भूमि हस्तांतरण (Land Transfer) की प्रक्रिया पर टिका हुआ है। वहीं, धायरी इलाके में प्रशासन ने आधुनिक तकनीक से लैस शवदाह गृह जल्द ही विकसित करने का आश्वासन दिया है।
शास्त्रीनगर के लिए 7.5 करोड़ रुपये का बड़ा विस्तार पैकेज
वैकुंठ पर पड़ रहे लोड को तुरंत प्रभाव से कम करने के लिए कोथरूड स्थित शास्त्रीनगर श्मशान भूमि के कायाकल्प की योजना को भी मंजूरी मिल गई है। इस पर करीब 7.5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की जाएगी।
इस मास्टरप्लान के तहत शास्त्रीनगर श्मशान भूमि का पुनर्विकास किया जाएगा, जिसमें तीन पारंपरिक लकड़ी की चिताओं के साथ-साथ एक अत्याधुनिक गैस शवदाह गृह भी स्थापित किया जाएगा। चूँकि पेठ इलाकों से निकलकर बड़ी संख्या में मध्यम और उच्चवर्गीय परिवार कोथरूड तथा सिंहगढ़ रोड बेल्ट में बस चुके हैं, इसलिए शास्त्रीनगर में यह सुविधा शुरू होने से स्थानीय स्तर पर एक बेहतरीन और सुलभ विकल्प मिल जाएगा।
प्रशासन का आधिकारिक बयान
इस पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए पुणे महानगरपालिका के विद्युत विभाग की मनीषा शेकटकर ने स्पष्ट किया है कि मध्यवर्ती पेठ क्षेत्र की वैकुंठ श्मशान भूमि पर लगातार बढ़ते बोझ को कम करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। शहर के विभिन्न हिस्सों में गैस शवदाह गृहों का जाल बिछाया जा रहा है, जिसमें से चार स्थानों पर काम या तो पूरा हो चुका है या अंतिम चरण में है। जो तीन स्थान बचे हैं, वहां के स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों को भरोसे में लेकर और उनसे विस्तृत चर्चा करके ही आगे का काम गति पकड़ेगा।
पुणे शहर की बदलती जनसांख्यिकी और भौगोलिक विस्तार को देखते हुए अंतिम संस्कार जैसी मूलभूत और संवेदनशील सुविधाओं का विकेंद्रीकरण वक्त की सबसे बड़ी मांग बन चुका है। यदि मनपा स्थानीय विरोध के बाद भी सभी पक्षों को साधते हुए इस योजना को समय पर अमलीजामा पहनाने में सफल रहती है, तो आने वाले दिनों में नागरिकों को खासी राहत मिलना तय है।