अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के पटल पर भारत का प्रभाव लगातार मजबूत होता जा रहा है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उज्बेकिस्तान दौरे के दौरान एक ऐतिहासिक क्षण आया, जब उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों की नई ऊंचाइयों को दर्शाता है। राजधानी ताशकंद में हुए इस भव्य कार्यक्रम ने वैश्विक स्तर पर एक बार फिर भारत की बढ़ती कूटनीतिक साख को रेखांकित किया है।
राष्ट्रपति शवकत मिर्जोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक
रविवार को अपने इस महत्वपूर्ण दौरे के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जोयेव के साथ एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई और आर्थिक साझेदारी जैसे गंभीर मुद्दों पर खुलकर चर्चा की। बैठक का माहौल बेहद गर्मजोशी भरा रहा, जो दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच आपसी भरोसे और व्यक्तिगत तालमेल को स्पष्ट रूप से बयां करता है।
मध्य एशिया के इस अहम देश के साथ भारत के रिश्ते हमेशा से प्रगाढ़ रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में इन संबंधों को एक नया आयाम मिला है। राष्ट्रपति मिर्जोयेव ने भारत के साथ हर मोर्चे पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है, जिससे आने वाले दिनों में दक्षिण और मध्य एशिया के इस भू-भाग में भू-राजनीतिक समीकरणों पर गहरा असर पड़ना तय माना जा रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा और यूरेनियम सप्लाई पर अहम बात
इस दौरे का सबसे बड़ा और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिस्सा ऊर्जा और साफ ईंधन की आपूर्ति से जुड़ा रहा। भारत अपनी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार नए और भरोसेमंद स्रोतों की तलाश कर रहा है। उज्बेकिस्तान के पास प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधन हैं, जिनमें यूरेनियम का नाम सबसे ऊपर आता है।
बैठक के दौरान भारत को दीर्घकालिक आधार पर यूरेनियम की निर्बाध सप्लाई को लेकर बेहद सकारात्मक और निर्णायक बातचीत हुई है। परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल और देश के ऊर्जा सेक्टर को मजबूती देने के लिहाज से यह समझौता मील का पत्थर साबित हो सकता है। जानकारों का मानना है कि इस डील से भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों को एक स्थिर और दीर्घकालिक ईंधन स्रोत मिलेगा, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और अधिक पुख्ता होगी।
व्यापार और कनेक्टिविटी को नई गति
केवल ऊर्जा ही नहीं, बल्कि द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए भी कई नए रास्तों पर सहमति बनी है। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच कनेक्टिविटी को लेकर लंबे समय से काम चल रहा है। इंटरनेशनल नॉर्थ-दक्षिण ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) और चाबहार बंदरगाह के माध्यम से मध्य एशिया तक पहुंच बनाने के भारत के प्रयासों को उज्बेकिस्तान का पूरा समर्थन मिल रहा है।
- व्यापारिक लक्ष्य: दोनों देशों ने आपसी व्यापार को तय समय सीमा के भीतर दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
- फार्मास्युटिकल सेक्टर: भारतीय दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की उज्बेकिस्तान के बाजार में भारी मांग है, जिसे और सुगम बनाया जाएगा।
- आईटी और डिजिटल तकनीक: तकनीकी सहयोग और आईटी हब के विकास के क्षेत्र में भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पीपल-टू-पीपल कनेक्ट
कूटनीति की भाषा से इतर, भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव बहुत पुराना है। बाबर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से लेकर बॉलीवुड की फिल्मों और संगीत तक, उज्बेकिस्तानी अवाम भारत के साथ एक खास भावनात्मक लगाव महसूस करती है। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा ने इस 'पीपल-टू-पीपल कनेक्ट' को और मजबूत किया है।
शैक्षणिक संस्थानों के बीच आदान-प्रदान, छात्रों के लिए स्कॉलरशिप और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी कई समझौतों को अंतिम रूप दिया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि आज की बदलती वैश्विक परिस्थितियों में मध्य एशिया के साथ मजबूत रिश्ते रखना भारत की विदेश नीति की एक बड़ी प्राथमिकता है, और यह दौरा इस दिशा में एक ठोस कदम साबित हुआ है।
वैश्विक भू-राजनीति पर प्रभाव
जब दुनिया के तमाम देश कड़े आर्थिक संकटों और रणनीतिक खींचतान से जूझ रहे हैं, तब भारत का इस तरह मध्य एशिया के साथ अपनी स्थिति मजबूत करना बेहद अहम है। उज्बेकिस्तान जैसे देश के साथ परमाणु ऊर्जा (यूरेनियम) और रक्षा मामलों में नजदीकी बढ़ाना यह साफ दिखाता है कि भारत अब वैश्विक पटल पर एक 'डिसाइडर' की भूमिका निभा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिला यह सर्वोच्च सम्मान केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं है, बल्कि यह 140 करोड़ भारतीयों की बढ़ती ताकत और वैश्विक सम्मान की मुहर है। इस दौरे के बाद भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्ते एक नए युग में प्रवेश कर चुके हैं, जिसके आने वाले समय में आर्थिक और सामरिक मोर्चे पर बहुत दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे।
