राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर देश भर में अहिंसा और सादगी के संदेश दिए जा रहे थे, वहीं पंजाब के होशियारपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और आबकारी विभाग के दावों की पोल खोल दी है। यहाँ के तलवाड़ा क्षेत्र में सरकारी नियमों और आदेशों को ताक पर रखकर गांधी जयंती के पावन अवसर पर भी शराब के ठेके खुले रहे और बेधड़क शराब की बिक्री होती रही। इस घटना के बाद से स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों में भारी रोष देखने को मिल रहा है।
ड्राई डे के नियमों की उड़ी धज्जियां
भारत सरकार और राज्य सरकारों के नियमानुसार 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन देश भर में 'ड्राई डे' घोषित किया जाता है। इस दिन किसी भी तरह की शराब की दुकान या अहाते को खोलने की अनुमति नहीं होती है। लेकिन, तलवाड़ा के निवासियों का दावा है कि इस बार के ड्राई डे पर नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई गईं। स्थानीय लोगों के अनुसार, शाम ढलने के बाद जब प्रतिबंधित समय शुरू हो चुका था, तब भी क्षेत्र के कई प्रमुख मार्गों पर शराब की दुकानें पूरी तरह आबाद थीं और ग्राहकों का आना-जाना जारी था।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मेन बाजार, व्यस्त बस स्टैंड क्षेत्र, पौंग बांध मार्ग और स्थानीय पुलिस चेक पोस्ट के बेहद करीब स्थित शराब के ठेके खुले हुए थे। हैरानी की बात यह है कि पुलिस चेक पोस्ट के इतने पास नियमों का उल्लंघन होना प्रशासन की सुस्ती या मिलीभगत की ओर इशारा करता है। इसके अलावा, पंजाब-हिमाचल सीमा से लगे इलाकों में भी शराब के अवैध कारोबार और खुली बिक्री की खबरें जोरों पर हैं।
स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद स्थानीय ग्रामीण और जागरूक नागरिक बेहद आक्रोशित हैं। लोगों का कहना है कि जब सरकार एक राष्ट्रीय पर्व और महापुरुष की जयंती पर शराब बंदी का स्पष्ट आदेश जारी करती है, तब भी धरातल पर उसका पालन कराने में प्रशासन क्यों विफल साबित होता है? ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि क्या आबकारी विभाग के अधिकारियों और शराब ठेकेदारों के बीच कोई अंदरूनी समझौता है, जिसके चलते नियमों को ताक पर रख दिया जाता है?
इतना ही नहीं, स्थानीय लोगों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि तलवाड़ा क्षेत्र में यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। यहाँ के अधिकांश ठेके आम दिनों में भी तय समय सीमा के बाद देर रात तक खुले रहते हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी के कारण इन ठेकेदारों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें राष्ट्रीय पर्व और ड्राई डे जैसे विशेष दिनों का भी कोई लिहाज नहीं रहा।
अधिकारियों की चुप्पी पर उठ रहे गंभीर सवाल
इस गंभीर मामले पर जब मीडिया ने सच्चाई जानने की कोशिश की और जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क साधना चाहा, तो दूसरी ओर से पूरी तरह चुप्पी साध ली गई। जिला आबकारी अधिकारी प्रीत भूपिंदर सिंह और एटीसी हनुमंत सिंह से उनका आधिकारिक पक्ष जानने के लिए कई बार फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इसके बाद उन्हें डिजिटल माध्यम यानी व्हाट्सएप पर भी विस्तृत संदेश भेजकर स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया, परंतु खबर लिखे जाने तक विभाग के किसी भी जिम्मेदार अधिकारी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
अधिकारियों की इस चुप्पी को लेकर जनता में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इस मामले पर उच्च स्तर से संज्ञान नहीं लिया गया, तो विभाग की छवि पर और अधिक बट्टा लगेगा।
आगे की कार्रवाई पर टिकी लोगों की नजरें
गांधी जयंती के दिन शराब बिकने के इस वाकये ने तलवाड़ा की आबकारी व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या जिला प्रशासन या राज्य का आबकारी विभाग इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए कोई ठोस जांच बिठाता है या नहीं। यदि निष्पक्ष जांच होती है और आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो क्या दोषियों और नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले ठेकेदारों पर कोई सख्त शिकंजा कसा जाएगा? फिलहाल, क्षेत्र के आम नागरिकों और बुद्धिजीवियों की नजरें पूरी तरह से प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।