क्राइम ब्रांच ने 20 रुपये के नकली सिक्के बनाने और सप्लाई करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। मोहाली निवासी सरगना समेत चार आरोपित गिरफ्तार।
मोहाली के सरगना समेत चार आरोपितों की गिरफ्तारी से खुला बड़ा नेटवर्क, एक लाख रुपये के नकली सिक्के बरामद
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 20 रुपये के नकली सिक्के ढालकर उन्हें बाजार में सप्लाई करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान गिरोह के सरगना समेत कुल चार शातिर आरोपितों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह सुनियोजित तरीके से देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के अवैध धंधे में संलिप्त था। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से भारी मात्रा में नकली सिक्के और अन्य साक्ष्य बरामद किए गए हैं।
गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए क्राइम ब्रांच की टीम ने मुंडका मेट्रो स्टेशन के नजदीक एक टोयोटा एटियोस कार को घेरा। डीसीपी क्राइम ब्रांच हर्ष इंदौरा ने बताया कि पकड़े गए मुख्य आरोपित की पहचान उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह के रूप में हुई है, जो मूल रूप से मोहाली का रहने वाला है और इस पूरे सिंडिकेट का संचालन कर रहा था। इसके अलावा अन्य तीन आरोपियों में संत रविदास नगर निवासी अनुराग पाल उर्फ लंकेश, मधुबनी निवासी जनार्दन कुमार चौरसिया उर्फ संतोष और दिल्ली के निहाल विहार निवासी पारस जैन शामिल हैं।
छापेमारी और बरामदगी का पूरा विवरण
एसीपी राज कुमार और इंस्पेक्टर आशीष शर्मा के नेतृत्व वाली पुलिस टीम को आठ सितंबर को पुख्ता सूचना मिली थी कि पारस जैन सफेद रंग की टोयोटा एटियोस कार में सवार होकर नकली सिक्कों की एक बड़ी खेप लेकर मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया मेट्रो स्टेशन के पास आने वाला है। इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने तय स्थान पर जाल बिछाया और कार को रोककर चालक पारस जैन को दबोच लिया।
तलाशी के दौरान कार की पिछली सीट पर रखे एक काले लैपटॉप बैग और प्लास्टिक के बोरों से 50 पॉलीथीन पैकेट बरामद किए गए। प्रत्येक पैकेट में 20 रुपये के 100 नकली सिक्के रखे हुए थे। इस तरह बरामद कुल नकली सिक्कों का बाजार मूल्य एक लाख रुपये आंका गया। पुलिस ने नकली सिक्कों की इस खेप के साथ-साथ परिवहन में इस्तेमाल की गई कार और पारस जैन का आईफोन भी अपने कब्जे में ले लिया।
सरगना की गिरफ्तारी और नेटवर्क का दायरा
पूछताछ के दौरान पारस जैन ने खुलासा किया कि उसने ये नकली सिक्के सीधे मुख्य सरगना उपकार लूथरा से खरीदे थे। उपकार एक लाख रुपये मूल्य के नकली सिक्कों की खेप को मात्र 70 हजार रुपये में बेचता था, जिन्हें ये अपराधी आगे बाजार में असली सिक्कों की तरह चलाकर भारी मुनाफा कमाते थे। जब पुलिस ने पारस जैन को गिरफ्तार किया, उस समय मुख्य सरगना उपकार अपनी नकली सिक्कों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को हरियाणा के सोनीपत से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर शिफ्ट करने की फिराक में था।
हालांकि, इसी बीच उत्तर प्रदेश पुलिस की एसओजी टीम ने उसे और उसके साथियों को अन्य मामलों में पकड़कर सहारनपुर जेल भेज दिया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उसे सहारनपुर जेल से प्रोडक्शन वारंट पर दिल्ली लाकर गहन पूछताछ की। पूछताछ से मिली कड़ियों के आधार पर ही पुलिस ने बाद में अनुराग पाल और जनार्दन कुमार चौरसिया को भी धर दबोचा।
आपराधिक इतिहास और आगे की जांच
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, गिरोह का सरगना उपकार लूथरा बेहद शातिर अपराधी है, जो दिल्ली, हरियाणा और बिहार में नकली सिक्के बनाने, हत्या और चोरी जैसे छह से अधिक गंभीर मामलों में शामिल रहा है। उसके खिलाफ लोधी कॉलोनी, केएन काटजू मार्ग और हिसार के सिविल लाइंस थाने में मुकदमे दर्ज हैं। वहीं, चौथे आरोपित पारस जैन पर भी हत्या, धोखाधड़ी और लूटपाट के कई आपराधिक मामले पहले से दर्ज हैं। क्राइम ब्रांच अब इस गिरोह से जुड़े अन्य खरीदारों, अवैध सिक्कों के ठिकानों और इस नेटवर्क के अन्य गुप्त चेहरों की तलाश में जुटी हुई है।