छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सटे खरोरा इलाके में स्थित अडानी पावर प्लांट का परिसर उस वक्त रणक्षेत्र में तब्दील हो गया, जब वहां काम करने वाले मजदूरों के दो गुटों के बीच खूनी संघर्ष छिड़ गया। रविवार की रात हुई इस वीभत्स घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि बीच-बचाव करने पहुंचे थानेदार (टीआई) और सब-इंस्पेक्टर (एसआई) समेत एक दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस सनसनीखेज वारदात के बाद से औद्योगिक क्षेत्र में भारी तनाव का माहौल है, हालांकि प्रशासन ने अब स्थिति पर पूरी तरह नियंत्रण पाने का दावा किया है।
संडे पार्टी और अवैध शराब बना विवाद की जड़
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार की रात प्लांट परिसर और उसके आसपास मजदूरों की 'संडे पार्टी' चल रही थी। इसी दौरान छत्तीसगढ़ी और बाहरी यानी बिहारी मजदूरों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते यह मामूली सी बहस एक भीषण जातीय और क्षेत्रीय संघर्ष में बदल गई।
विवाद की मुख्य जड़ प्लांट के आसपास कथित तौर पर अवैध रूप से शराब की बिक्री को बताया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों और फैक्ट्री के सुरक्षा गार्ड्स के बीच शराब बेचने से मना करने को लेकर पहले से ही सुलग रही चिंगारी ने उस वक्त विकराल रूप ले लिया, जब मजदूरों के दोनों गुट आमने-सामने आ गए। गालियों से शुरू हुआ यह विवाद कुछ ही मिनटों में ईंट-पत्थरों की बरसात और लाठी-डंडों से लैस होकर एक-दूसरे पर टूट पड़ने में बदल गया।
सरपंच की गाड़ी पर हमला और उपद्रव
हिंसा का दायरा सिर्फ मजदूरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी चपेट में स्थानीय जनप्रतिनिधि भी आ गए। उपद्रवियों के सिर पर ऐसा खून सवार था कि उन्होंने वहां से गुजर रहे रायखेड़ा गांव के सरपंच दिनेश वर्मा की गाड़ी को भी अपना निशाना बनाया। भीड़ ने सरपंच के वाहन पर जमकर पथराव किया और उसे बुरी तरह तोड़ डाला। वाहन में तोड़फोड़ होते ही मौके पर भगदड़ मच गई और चीख-पुकार के बीच पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो गया।
बचाव में आए पुलिस अधिकारियों पर भी पथराव
जब हिंसक झड़प और बलवे की सूचना खरोरा थाना पुलिस को मिली, तो थाना प्रभारी (टीआई) अपनी टीम के साथ फौरन घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस का मकसद दोनों पक्षों को शांत कराकर स्थिति को संभालना था, लेकिन बेकाबू हो चुकी भीड़ ने कानून का खौफ पूरी तरह से भुला दिया था।
उपद्रवियों ने पुलिस दल पर भी पथराव शुरू कर दिया। इस अचानक हुए हमले में खरोरा थाना प्रभारी, एक सब-इंस्पेक्टर (एसआई), तीन सुरक्षा गार्ड और कई अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिसकर्मियों पर हमला होने की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई।
आधी रात को रायपुर से भेजा गया अतिरिक्त पुलिस बल
मामले की गंभीरता को भांपते हुए रायपुर जिला मुख्यालय से आधी रात को ही भारी संख्या में अतिरिक्त पुलिस बल को खरोरा अडानी प्लांट के लिए रवाना किया गया। डीएसपी वीरेंद्र चतुर्वेदी के नेतृत्व में पुलिस के आला अधिकारियों ने मोर्चा संभाला और लाठीचार्ज कर उपद्रवियों को खदेड़ना शुरू किया।
पुलिस की त्वरित और सख्त कार्रवाई के चलते कुछ ही घंटों में भीड़ तितर-बितर हो गई। अधिकारियों के अनुसार, भारी फोर्स की तैनाती के बाद अब हालात पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। सोमवार की सुबह तक स्थिति सामान्य हो चुकी थी और सभी मजदूर अपनी-अपनी शिफ्ट में काम पर लौट आए हैं।
परिसर में सख्त चेकिंग और कानूनी कार्रवाई की तैयारी
इस बड़ी घटना के बाद प्रशासन और पुलिस प्रबंधन किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है। अडानी प्लांट के मुख्य गेट और आसपास के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। प्लांट के भीतर आने-जाने वाले हर एक कर्मचारी, मजदूर और बाहरी व्यक्ति की सघन जांच (Checking) की जा रही है।
पुलिस अब इस पूरी घटना के वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर उपद्रवियों की पहचान करने में जुटी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कानून अपने हाथ में लेने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा और सभी दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।