उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के चहनिया क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक रामगढ़ मठ में इन दिनों भक्ति और अध्यात्म की अद्भुत बयार बह रही है। अवसर है अघोराचार्य बाबा कीनाराम के 427वें जन्म महोत्सव का, जिसे लेकर देश भर के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए हर कोई अपने-अपने तरीके से योगदान दे रहा है। इसी कड़ी में, वाराणसी महिला मंडल ने एक सराहनीय पहल करते हुए श्रद्धालुओं के लिए बनने वाले प्रसाद हेतु 25 क्विंटल चीनी भेजी है, जिसकी कुल कीमत करीब 1 लाख 35 हजार रुपए आंकी गई है।
भव्य जन्म महोत्सव की तैयारियां और प्रसाद की व्यवस्था
परम पूज्य अघोरेश्वर पीठाधीश्वर बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी के मार्गदर्शक सान्निध्य में आयोजित इस वर्ष के जन्म महोत्सव में लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना जताई जा रही है। इतने बड़े पैमाने पर आने वाले भक्तों के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था करना एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। आयोजकों की इस चिंता को दूर करने में क्रि कुंड वाराणसी महिला मंडल आगे आया है।
महिला मंडल की ओर से भेजी गई 25 क्विंटल चीनी को एक पिकअप वाहन के जरिए सुरक्षित रामगढ़ मठ पहुंचाया गया। आयोजकों ने इस सहयोग को बेहद महत्वपूर्ण बताया है, क्योंकि इसके जरिए महोत्सव में आने वाले हर एक भक्त तक प्रसाद की सुगमता सुनिश्चित की जा सकेगी। महिला मंडल की यह टीम हर साल की तरह इस बार भी इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाने में अपनी अहम भूमिका निभा रही है.
अघोर पंथ के महान संत: भगवान शिव के अवतार बाबा कीनाराम
वाराणसी महिला मंडल की अध्यक्ष रूबी सिंह ने इस पावन अवसर पर बाबा कीनाराम के जीवन और दर्शन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्हें साक्षात भगवान शिव का अवतार माना जाता है। बाबा कीनाराम अघोर पंथ के उन महान और प्रखर संतों में शुमार हैं, जिनके जीवन से जुड़ी कई अलौकिक और चमत्कारी घटनाएं इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं।
उनकी असीम सिद्धियों और चमत्कारों के चलते अघोर पंथ और सनातन धर्म में उन्हें अत्यंत उच्च और आदरणीय स्थान प्राप्त है। यही कारण है कि उनके जन्म महोत्सव के दौरान देश के कोने-कोने से श्रद्धालु रामगढ़ मठ पहुंचते हैं और बाबा की समाधि के दर्शन कर खुद को धन्य महसूस करते हैं।
समतामूलक समाज के प्रबल समर्थक थे संत शिरोमणि
केवल आध्यात्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक सुधारों के लिहाज से भी बाबा कीनाराम का जीवन प्रेरणा का एक स्त्रोत रहा है। रूबी सिंह ने आगे बताया कि संत शिरोमणि अघोरेश्वर बाबा कीनाराम सच्चे अर्थों में सामाजिक समरसता और बराबरी के प्रतीक थे। उनके विचारों में जाति-पाति, ऊंच-नीच, भेदभाव और छुआछूत जैसी कुप्रथाओं के लिए कोई स्थान नहीं था।
उन्होंने अपने समय में अखंड भारत के भीतर एक समतामूलक समाज की स्थापना के लिए पुरजोर प्रयास किया। उन्होंने न केवल जमींदारी प्रथा का खुलकर विरोध किया, बल्कि समाज के सबसे निचले और कमजोर पायदान पर खड़े लोगों के हक, अधिकार और सम्मान की रक्षा के लिए भी आवाज उठाई।
कुरीतियों और अंधविश्वास के खिलाफ फूंका था बिगुल
मध्यकालीन और संक्रमण काल के समाज में फैली रूढ़िवादिता को तोड़ने में बाबा कीनाराम का योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने समाज को एक नई और सही दिशा दिखाने के लिए बाल विवाह, अंधविश्वास, पाखंड और तमाम बुरी रीतियों का कड़ा विरोध किया। समाज में हो रहे अन्याय और अत्याचारी शासकों के विरुद्ध उन्होंने आम जनता को जागरूक करने का बीड़ा उठाया।
उनके इन क्रांतिकारी विचारों ने समाज में समानता और भाईचारे की भावना को सुदृढ़ करने का काम किया। आज भी जब उनका जन्म महोत्सव मनाया जाता है, तो उनके इन्हीं प्रेरणादायी संदेशों को याद किया जाता है ताकि युवा पीढ़ी उनके आदर्शों पर चल सके।
महिला मंडल की सक्रिय भागीदारी से बढ़ रहा उत्साह
रामगढ़ मठ परिसर में चल रहे इन आयोजनों को सुचारू रूप से चलाने के लिए वाराणसी महिला मंडल की पूरी टीम मुस्तैदी से जुटी हुई है। चीनी के इस बड़े सहयोग को भेजने में मंडल की अध्यक्ष रूबी सिंह के अलावा मधु सिंह, सत्या और संजू श्रीवास्तव जैसी समर्पित महिलाओं ने अहम भूमिका निभाई है।
महिला मंडल की इस सक्रियता और सेवा भाव से मठ परिसर का माहौल पूरी तरह से ऊर्जावान हो गया है। प्रसाद के लिए रसद सामग्री समय पर पहुंच जाने से अब बाकी की व्यवस्थाओं को भी और अधिक गति मिल गई है। 427वें इस दीक्षोत्सव और जन्मोत्सव को लेकर रामगढ़ क्षेत्र का कोना-कोना भक्तिमय हो चुका है और श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया है।