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रीवा में अनूठी पहल: उप मुख्यमंत्री ने गौ अभ्यारण्य में मनाई कान्हा की जयंती, गूंजे जयकारे

रीवा में अनूठी पहल: उप मुख्यमंत्री ने गौ अभ्यारण्य में मनाई कान्हा की जयंती, गूंजे जयकारे

त्योहारों को मनाने के तरीके समय के साथ बदलते हैं, लेकिन जब बात लोक आस्था और संस्कृति की हो, तो उसका मूल स्वरूप हमेशा दिल को छूने वाला होता है। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक ऐसी ही मनमोहक तस्वीर सामने आई है, जिसने आम जनता का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यहां पारंपरिक मंदिरों की चारदीवारी से बाहर निकलकर, प्रकृति की गोद में और बेजुबान जीवों के बीच कृष्ण जन्मोत्सव का पावन पर्व मनाया गया। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक उल्लास को बढ़ाया, बल्कि समाज को पशु प्रेम और सेवा का एक बड़ा संदेश भी दिया है।

बसामन मामा गौ अभ्यारण्य बना आस्था का केंद्र

रीवा का प्रसिद्ध बसामन मामा गौ अभ्यारण्य इन दिनों अपनी अनूठी व्यवस्थाओं के लिए जाना जाता है। श्री कृष्ण जन्मोत्सव के इस पावन अवसर पर इस अभ्यारण्य का नजारा देखने लायक था। यहां प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल पहुंचे और उन्होंने पूरी तल्लीनता के साथ गौ सेवकों और साधकों के बीच भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया। इस दौरान पूरा परिसर नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के जयकारों से गूंज उठा।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक विधि-विधान के साथ हुई। उप मुख्यमंत्री ने गौ माता की पूजा-अर्चना की और उन्हें अपने हाथों से चारा खिलाकर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान वहां मौजूद गौ सेवकों के चेहरे पर एक अलग ही चमक और संतोष का भाव साफ झलक रहा था।

गौ सेवा ही सबसे बड़ी सच्ची पूजा: उप मुख्यमंत्री

इस अवसर पर अपने संबोधन में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पूरे जीवन में गौ माता को सबसे अधिक महत्व दिया। उनका पूरा बालपन ग्वालों और गायों के बीच ही बीता। ऐसे में, कान्हा का जन्मोत्सव यदि गौशाला या गौ अभ्यारण्य में मनाया जाए, तो इससे बड़ा सौभाग्य और कुछ नहीं हो सकता।

उन्होंने आगे कहा, "बेजुबान जीवों की सेवा करना ही सबसे बड़ी ईश्वर की आराधना है। सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है कि प्रदेश के हर गौवंश को सुरक्षित आश्रय मिले और उनकी देखरेख में समाज के हर वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित हो। बसामन मामा गौ अभ्यारण्य इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो प्रबंधन के क्षेत्र में मील के पत्थर स्थापित किए जा सकते हैं।"

उत्सव में दिखा अद्भुत सांस्कृतिक माहौल

  • भव्य सजावट: गौ अभ्यारण्य परिसर को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया था, जो किसी भव्य मंदिर से कम नहीं लग रहा था।
  • भजन-कीर्तन: स्थानीय कलाकारों और गौ सेवकों ने पारंपरिक लोक धुनों पर मनमोहक भजन प्रस्तुत किए।
  • प्रसाद वितरण: कार्यक्रम के अंत में हजारों श्रद्धालुओं और गौ सेवकों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।
  • जनसहभागिता: इस आयोजन में स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और गौ संरक्षण का संकल्प लिया।

क्यों खास है रीवा का यह गौ अभ्यारण्य?

बसामन मामा गौ अभ्यारण्य केवल एक शेल्टर होम नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ रहा एक बड़ा मॉडल है। यहां सैकड़ों बेसहारा और बीमार गौवंश की सेवा की जाती है। आधुनिक सुविधाओं से लैस इस अभ्यारण्य में गायों के स्वास्थ्य परीक्षण से लेकर उनके चारे-पानी तक का विशेष ध्यान रखा जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से समाज में एक सकारात्मक संदेश जाता है। जब राज्य के जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग इस प्रकार के आयोजनों में खुद शामिल होते हैं, तो आम जनता का जुड़ाव स्वतः ही उस मुहिम से हो जाता है। कृष्ण जन्मोत्सव पर रीवा में हुए इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि उत्सव मनाने का असली आनंद तब आता है जब उसमें समाज के सबसे उपेक्षित या मौन जीवों की भी भागीदारी हो जाए।

भविष्य के लिए प्रेरणा

यह आयोजन सिर्फ एक दिन का उत्सव नहीं था, बल्कि यह इस बात का प्रतीक था कि हमारी संस्कृति में प्रकृति और जीव-जंतुओं का कितना गहरा स्थान है। द्वापर युग से लेकर आज कलयुग तक, कृष्ण का संदेश वही है—प्रेम, करुणा और सेवा। रीवा के इस गौ अभ्यारण्य में जो दीप जले और जो प्रार्थनाएं हुईं, उन्होंने आने वाले दिनों के लिए हर नागरिक के मन में सेवा का एक नया दीया प्रज्वलित कर दिया है।

जैसे-जैसे कार्यक्रम संपन्न हुआ, लोगों के मन में एक संतुष्टि का भाव था। इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर रीवा को राष्ट्रीय पटल पर एक सकारात्मक और सांस्कृतिक पहचान दिलाई है, जिसकी चर्चा दूर-दूर तक हो रही है।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer (स्थानीय खबरें)

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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