भारतीय रेलवे के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण स्टेशनों में शुमार वाराणसी जंक्शन पर सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर मानवीयता और सतर्कता की मिसाल पेश की है। आज, यानी 07 सितंबर 2026 को रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की ओर से चलाए गए एक विशेष और सघन चेकिंग अभियान के दौरान छह नाबालिग बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। ये सभी बच्चे अपने घरों से किसी न किसी बात से नाराज होकर या बिना बताए ट्रेनों में सवार हो गए थे, जिन्हें सही समय पर आरपीएफ की सूझबूझ से बचा लिया गया।
ऑपरेशन 'नन्हे फरिश्ते' बना संकट में फंसे बच्चों का सहारा
आरपीएफ के मंडल कार्यालय द्वारा विशेष रूप से गठित टीम ने स्टेशन परिसर में 'ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते' के तहत निगरानी और चेकिंग तेज कर रखी है। इसी क्रम में उप निरीक्षक माधुरी यादव, महिला कांस्टेबल प्रीति और कांस्टेबल अंकित की संयुक्त टीम जब प्लेटफॉर्म और सर्कुलेटिंग एरिया की जांच कर रही थी, तब उनकी नजर कई लावारिस और अकेली हालत में बैठे बच्चों पर पड़ी।
जांच के दौरान टीम को एक 15 वर्षीय किशोरी अकेली बेंच पर सहमी हुई मिली। पूछताछ करने पर उसने अपना नाम प्रिया कुमारी बताया, जो बिहार के अरवल जिले की रहने वाली है और घर पर किसी बात से नाराज होकर बिना बताए निकल आई थी। इसी प्रकार, चंदौली जिले के देनातपुरा की रहने वाली 15 वर्षीय आराधना और चंदौली के ही 17 वर्षीय आकाश कुमार भी अपने घरों से अप्रसन्न होकर ट्रेन पकड़कर वाराणसी पहुंच गए थे।
छोटे बच्चों को भी सुरक्षित निकाला गया
किशोरावस्था के इन बच्चों के अलावा, चेकिंग टीम को मुरादाबाद के रहने वाले तीन छोटे बच्चे भी मिले, जिनकी उम्र बहुत कम थी। इनमें 10 वर्षीय विकास, सात वर्षीय अर्चना और छह वर्षीय सुंदरा शामिल थे। इन तीनों मासूमों ने पूछताछ में बताया कि वे अपने परिजनों को बिना बताए किसी तरह ट्रेन में बैठकर यहां तक आ पहुंचे थे।
इन सभी बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आरपीएफ की टीम ने तुरंत तत्परता दिखाई और सभी छह बच्चों (चार लड़कियां और दो लड़के) को सुरक्षित आरपीएफ पोस्ट लाया गया। इसके बाद नियमानुसार चाइल्ड लाइन (Child Line) को इसकी आधिकारिक सूचना दी गई और सभी बच्चों को सुरक्षित उनके सुपुर्द कर दिया गया ताकि उन्हें उनके वास्तविक परिजनों तक पहुंचाया जा सके।
यात्रियों की सुरक्षा और जहरखुरानी के खिलाफ सख्त संदेश
बच्चों के रेस्क्यू के अलावा इस वृहद अभियान का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को सफर के दौरान होने वाली संभावित धोखाधड़ी और अपराधों से बचाना था। आरपीएफ निरीक्षक संदीप कुमार यादव के कड़े निर्देशन में स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया, प्लेटफॉर्म्स, टिकट काउंटर्स और हाल ही में आने-जाने वाली तमाम एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेनों के अंदर सघन चेकिंग की गई।
इस दौरान सफर कर रहे यात्रियों को 'जहरखुरानी' (Zeharkhurani) जैसी गंभीर आपराधिक वारदातों के प्रति जागरूक किया गया। आरपीएफ अधिकारियों ने लाउडस्पीकर और व्यक्तिगत संवाद के जरिए यात्रियों से अपील की कि वे ट्रेन यात्रा के दौरान किसी भी अपरिचित व्यक्ति द्वारा दी गई खाने-पीने की कोई भी वस्तु भूलकर भी ग्रहण न करें। यदि यात्रा के दौरान कोई भी संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दे या किसी भी प्रकार की आपातकालीन समस्या उत्पन्न हो, तो तुरंत रेलवे के हेल्पलाइन नंबर 'डायल 139' पर सूचना दें।
महिला और दिव्यांग कोचों की विशेष निगरानी
अभियान के दौरान सुरक्षाबलों ने ट्रेनों में बने महिला और दिव्यांग जनों के लिए आरक्षित कोचों की विशेष जांच-पड़ताल की। इस दौरान कई अनाधिकृत यात्रियों को इन आरक्षित डिब्बों में सफर करते हुए पकड़ा गया, जिन्हें कड़ी हिदायत देकर भविष्य में ऐसा न करने की चेतावनी दी गई। इसके साथ ही, यात्रियों से यह भी पुरजोर अपील की गई कि वे चेन पुलिंग (Chain Pulling) जैसी गैर-कानूनी गतिविधियों से बचें, क्योंकि इससे ट्रेनों का संचालन प्रभावित होता है और अन्य यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। स्टेशन के चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम में स्थापित सीसीटीवी कैमरों (CCTV Cameras) के माध्यम से लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
नो पार्किंग जोन में खड़े वाहनों पर भी हुई सख्त कार्रवाई
यात्री सुविधाओं और स्टेशन परिसर में सुगम यातायात व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए आरपीएफ ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भी शिकंजा कसा। चेकिंग अभियान के दौरान स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया के 'नो पार्किंग जोन' (No Parking Zone) में अनाधिकृत रूप से वाहन खड़ा करने वाले पांच वाहन और मोटरसाइकिल चालकों को रंगे हाथ पकड़ा गया।
इन सभी वाहन चालकों के विरुद्ध रेलवे एक्ट की धारा 159 के उल्लंघन के अंतर्गत जन विश्वास अधिनियम 2026 के प्रावधानों के तहत सख्त वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि स्टेशन परिसर में नियमों की अनदेखी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और आगे भी इस तरह के औचक अभियान निरंतर जारी रहेंगे।
निष्कर्ष
वाराणसी रेलवे स्टेशन पर चलाए गए इस बहुआयामी अभियान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि रेलवे सुरक्षा बल केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सामाजिक दायित्वों और मानवीय संवेदनाओं को निभाने में भी पूरी तरह तत्पर है। समय पर की गई इस कार्रवाई से जहां एक ओर छह बच्चों का भविष्य सुरक्षित हाथों में पहुंच गया, वहीं दूसरी ओर हजारों यात्रियों ने सुरक्षित और जागरूक माहौल में अपनी यात्रा पूरी की।