वाराणसी के व्यापारिक केंद्र के रूप में जाना जाने वाले इलाके में एक बड़े सर्राफ शोरूम के भीतर से भरोसे के कत्ल की एक ऐसी दास्तान सामने आई है, जिसने व्यापारिक जगत को सन्न कर दिया है। मंडुवाडीह थाना क्षेत्र के अवलेशपुर स्थित प्रतिष्ठित 'नारायण दास सर्राफ एंड ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड' में काम करने वाले एक मैनेजर पर करीब 50 लाख रुपये मूल्य का सोना गबन करने का संगीन आरोप लगा है। इस सनसनीखेज मामले ने न सिर्फ शोरूम प्रबंधन को हिलाकर रख दिया है, बल्कि स्थानीय बाजार में भी इसकी चर्चा जोरों पर है।
अंदरखाने की जांच में खुला बड़े फर्जीड़े का राज
घटना का खुलासा तब हुआ जब कंपनी की तरफ से नियमित आंतरिक स्टॉक (Internal Stock Audit) की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। 31 अगस्त को जब ऑडिट टीम ने दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान किया, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। स्टॉक रजिस्टर और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के बीच भारी अंतर पाया गया। शुरुआती जांच में ही यह साफ हो गया कि शोरूम के भीतर कोई बड़ा खेल चल रहा है, जिसकी जड़ें काफी गहरी थीं।
कंपनी के कमर्शियल ऑफिसर श्रीकृष्ण अग्रवाल ने इस पूरी गड़बड़ी को भांपते हुए तुरंत स्थानीय थाने का रुख किया। उनकी दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने शोरूम के मैनेजर रतन अग्रवाल और उसकी पत्नी शारदा रावत के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी की पत्नी शारदा को गिरफ्तार भी कर लिया है, जबकि मुख्य आरोपी मैनेजर अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
गायब हुआ लगभग 300 ग्राम सोना और एडवांस रकम का हेरफेर
शिकायत के मुताबिक, आरोपी मैनेजर रतन अग्रवाल पर कुल मिलाकर लगभग 300 ग्राम सोने के आभूषणों को खुर्द-बुर्द करने का आरोप है। ऑडिट में जो आंकड़े सामने आए, वे बेहद चौंकाने वाले थे:
- 22 कैरेट सोने की छह हाई-वैल्यू ज्वेलरी, जिनका कुल वजन 194.890 ग्राम था, स्टॉक से पूरी तरह गायब मिलीं।
- इसके अतिरिक्त लगभग 100 ग्राम पुराना सोना और अन्य मिश्रित आभूषण भी गायब पाए गए।
- बाजार मूल्य के हिसाब से इन सभी ज्वेल्स की कुल कीमत करीब 50 लाख रुपये आंकी गई है।
केवल सोने की चोरी तक ही यह मामला सीमित नहीं था, बल्कि वित्तीय हेराफेरी के और भी कई पन्ने खुले। जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि 29 जून को राघवेंद्र राय नामक एक ग्राहक के नाम पर 31,32,855.22 रुपये की ज्वेलरी बुक की गई थी। इसके एवज में 50 हजार रुपये की एडवांस राशि जमा कराई गई थी। जब इस ट्रांजैक्शन की गहराई से पड़ताल की गई, तो पता चला कि वह एडवांस रकम कंपनी के खाते में जाने के बजाय सीधे आरोपी मैनेजर की पत्नी के बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी।
बहानेबाजी कर चकमा देकर भागा शातिर मैनेजर
सूत्रों और पुलिस के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, जब कंपनी के स्तर पर पूछताछ और आंतरिक दबाव बढ़ा, तो आरोपी मैनेजर ने अपनी चालाकी का परिचय दिया। उसने अपने बेटे की गंभीर बीमारी का हवाला देते हुए प्रबंधन से एक घंटे की मोहलत मांगी। विश्वास करके उसे छोड़ा गया, लेकिन वह शातिर मैनेजर उसके बाद से दोबारा शोरूम या अपने ठिकाने पर नहीं लौटा। उसने अपना फोन भी बंद कर लिया और भूमिगत हो गया।
इस पूरे मामले पर मंडुवाडीह थाना प्रभारी दिगंबर उपाध्याय ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि कंपनी के कमर्शियल ऑफिसर की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस टीम ने एक आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। मुख्य आरोपी मैनेजर की तलाश में पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। तकनीकी सर्विलांस और कॉल डिटेल्स के आधार पर उसकी लोकेशन ट्रैक की जा रही है।
भरोसे के व्यापार में दीमक बनता आंतरिक भ्रष्टाचार
यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि बड़े कारोबारी संस्थानों और ज्वेलरी शोरूम्स में आंतरिक सुरक्षा और कर्मचारियों के बैकग्राउंड वेरिफिकेशन कितने अहम होते हैं। सर्राफा कारोबार पूरी तरह से आपसी विश्वास और साख पर टिका होता है, और जब कोई उच्च पद पर बैठा व्यक्ति ही इस भरोसे की नींव को खोदने लगे, तो कारोबारियों के लिए संकट खड़ा हो जाता है। फिलहाल, वाराणसी पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस गबन में शोरूम के कुछ अन्य लोग भी शामिल थे या यह पूरी साजिश अकेले मैनेजर ने रची थी। पुलिस का दावा है कि जल्द ही मुख्य आरोपी को भी सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।