वाराणसी के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों सरगर्मी तेज हो गई है। रोहनिया विधानसभा क्षेत्र के अवलेशपुर इलाके में रविवार को आयोजित समाजवादी पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक ने राज्य की सियासत का पारा चढ़ा दिया है। इस बैठक में मुख्य रूप से क्षेत्र की बदहाल स्थिति, जलभराव और आसमान छूती महंगाई को केंद्र में रखकर सत्ताधारी दल पर तीखे प्रहार किए गए। पार्टी नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि अब जनता का मोहभंग हो चुका है और वर्ष 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश की तस्वीर बदलने के लिए कार्यकर्ता पूरी तरह तैयार हैं।
अवलेशपुर में हुई सपा की खास बैठक
रोहनिया विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अवलेशपुर में संजय राजभर (पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य) के आवास पर आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष गोपाल यादव ने की, जबकि पूरे कार्यक्रम का कुशल संचालन आनंद पटेल द्वारा किया गया। इस सभा में स्थानीय मुद्दों से लेकर राज्य स्तर की नीतियों तक गहन चर्चा की गई। पार्टी के दिग्गज नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि आगामी चुनावों को लेकर विपक्ष ने अभी से अपनी कमर कस ली है और जनता के बीच सुलगते मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाया जाएगा।
हवाई सर्वेक्षण पर तंज और बुनियादी समस्याओं पर घेराव
बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक महेंद्र सिंह पटेल ने वर्तमान सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने विशेष रूप से रोहनिया विधानसभा क्षेत्र के शहरी और ग्रामीण इलाकों की दुर्दशा का जिक्र करते हुए कहा कि बारिश के दिनों में यह पूरा क्षेत्र जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। सड़कों और गलियों में भरा पानी, जगह-जगह फैली गंदगी और बजबजाती नालियों ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।
महेंद्र सिंह पटेल ने कहा,
"केवल आसमान से हवाई सर्वेक्षण करने से जनता की समस्याओं का समाधान नहीं होता। हुक्मरानों को जमीन पर उतरकर देखना चाहिए कि आम नागरिक किन दुश्वारियों के बीच जीवन गुजारने को मजबूर हैं। जल निकासी और साफ-सफाई की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।"
उन्होंने यह भी जोड़ा कि दुर्गंध और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा भी मंडरा रहा है, लेकिन प्रशासन इस ओर पूरी तरह आंखें मूंद कर बैठा है।
'स्मार्ट सिटी' के दावों पर उठे सवाल
बनारस में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स और विकास के दावों की पोल खोलते हुए पूर्व विधायक ने कहा कि जनता की गाढ़ी कमाई से वसूले जाने वाले टैक्स का भारी दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के पदाधिकारी, अधिकारी और मंत्री अपनी तिजोरी भरने में व्यस्त हैं, जबकि आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है।
उन्होंने डबल इंजन की सरकार पर तंज कसते हुए एक अनूठा उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि यह सरकार ऐसी ट्रेन जैसी है जिसके पास इंजन ही नहीं है और केवल डिब्बे खड़े नजर आते हैं। विकास की रफ्तार कागजों तक सीमित है और जमीन पर सिर्फ नाकामी दिखती है।
2027 के बदलाव का शंखनाद और बूथ मजबूती पर जोर
सपा नेताओं ने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि प्रदेश की जनता ने पिछले 10 सालों में डबल इंजन सरकार के हर वादे को परख लिया है। अब जनता बदलाव चाहती है। पूर्व विधायक ने आह्वान किया कि आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाने के लिए हर कार्यकर्ता को अभी से जुटना होगा। इसके लिए बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
पीडीए (PDA) और महंगाई के मुद्दे पर फोकस
वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष कन्हैया लाल राजभर ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि वाराणसी का वास्तविक और सर्वांगीण विकास तभी संभव है, जब इस तानाशाही सत्ता को उत्तर प्रदेश से बाहर का रास्ता दिखाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी, तो 'पीडीए' (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यकों) समाज के उत्थान के साथ-साथ आम जनता को महंगाई से राहत दिलाने के लिए ठोस नीतियां लागू की जाएंगी। वर्तमान समय में बढ़ती महंगाई से मध्यम और गरीब वर्ग की कमर टूट चुकी है, और सरकार इसपर पूरी तरह संवेदनहीन बनी हुई है।
बैठक में प्रमुख रूप से इनकी रही मौजूदगी
इस उच्च-स्तरीय सांगठनिक बैठक में रोहनिया विधानसभा क्षेत्र के तमाम दिग्गज नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से:
- अखिलेश पटेल (पूर्व जिला पंचायत सदस्य)
- दर्शन यादव (जिला पंचायत सदस्य)
- सचिन प्रजापति
- योगेश सिंह (पूर्व जिला पंचायत सदस्य)
- सुनील बिंद
- दुर्गावती पटेल
इसके अलावा विभिन्न सेक्टरों के प्रभारी, बूथ प्रभारी, जोनल प्रभारी और बड़ी संख्या में पार्टी के उत्साही कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में संगठन के निर्देशों का पालन करते हुए आगामी चुनावों में पार्टी को मजबूत करने का संकल्प लिया।
निष्कर्ष
वाराणसी के रोहनिया में हुई इस बैठक से यह साफ जाहिर होता है कि विपक्ष अब स्थानीय मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाकर राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुट गया है। जलभराव, गंदगी और महंगाई जैसे आम जनता से जुड़े मुद्दे आने वाले दिनों में राजनीतिक बहसों का मुख्य केंद्र रहने वाले हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव का यह शंखनाद आने वाले समय में चुनावी सरगर्मी को और अधिक बढ़ाने वाला है।