वाराणसी स्थित देश के प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के परिसर में एक बार फिर छात्र राजनीति गरमा गई है। नए शैक्षणिक सत्र में प्रवेश लेने वाले दूर-दराज के छात्रों की मदद के लिए लगाए जाने वाले 'हेल्प डेस्क' को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच बड़ा टकराव देखने को मिला है। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब एक छात्र संगठन ने प्रशासन पर सीधा पक्षपात करने का संगीन आरोप मढ़ दिया।
हेल्प डेस्क लगाने को लेकर क्यों भड़का विवाद?
मामले की शुरुआत तब हुई जब विभिन्न छात्र संगठनों ने परिसर में नए विद्यार्थियों की सहायता के लिए अपने-अपने हेल्प डेस्क स्थापित करने शुरू किए। इन डेस्क का मुख्य उद्देश्य नए छात्रों को काउंसलिंग, प्रवेश प्रक्रिया, हॉस्टल अलॉटमेंट, डिपार्टमेंट की लोकेशन और छात्रवृत्ति से जुड़ी बुनियादी जानकारियां आसानी से उपलब्ध कराना होता है।
हालांकि, आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुछ छात्र संगठनों को तो अपने काउंटर संचालित करने की खुली छूट दी, जबकि अन्य संगठनों को ऐसा करने से रोक दिया गया। इस दोहरे रवैये ने परिसर की राजनीति में सुलग रही चिंगारी को हवा दे दी।
एनसुई (NSUI) ने लगाए गंभीर भेदभाव के आरोप
छात्र संगठन एनसुई (NSUI BHU) के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर खुलकर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। संगठन का दावा है कि प्रशासन ने सत्ताधारी विचारधारा से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) को तो हेल्प डेस्क लगाने की पूरी अनुमति दे दी, लेकिन विपक्षी संगठनों को रोकने के लिए अपनी प्रशासनिक ताकत का इस्तेमाल किया गया।
एनसुई के नेताओं का तर्क है कि यदि हेल्प डेस्क लगाने का उद्देश्य नए छात्रों की मदद करना है, तो यह नियम सभी छात्र संगठनों के लिए एक समान होना चाहिए। किसी एक खास संगठन को तरजीह देना और बाकियों को परिसर से बाहर का रास्ता दिखाना उच्च शिक्षण संस्थानों में स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
कार्रवाई के दौरान हुई धक्का-मुक्की और हंगामा
विवाद उस वक्त अपने चरम पर पहुंच गया जब विश्वविद्यालय प्रशासन और सुरक्षाकर्मियों ने कथित तौर पर एनसुई के हेल्प डेस्क को जबरन हटाने की कार्रवाई की। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इस दौरान प्रशासन के लोगों ने उनके साथ बदसलूकी और धक्का-मुक्की भी की।
- हेल्प डेस्क पर लगाए गए बैनर और पोस्टर हटाए गए।
- बैठने के लिए लाई गई कुर्सियों को भी जब्त करने या हटाने का प्रयास किया गया।
- कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों के बीच तीखी नोकझोक हुई।
इस अचानक हुई कार्रवाई से नाराज छात्रों ने मौके पर ही जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते वहां भारी भीड़ जमा हो गई और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की जाने लगी।
समानता और निष्पक्षता की उठी मांग
प्रदर्शन के दौरान छात्र नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि बीएचयू जैसे स्वायत्त और केंद्रीय संस्थान में वैचारिक आधार पर प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। यदि प्रशासन के पास हेल्प डेस्क को लेकर कोई नीति या नियमावली है, तो उसे बिना किसी भेदभाव के सभी पंजीकृत या सक्रिय छात्र संगठनों पर लागू किया जाना चाहिए।
छात्रों का कहना है कि नए सत्र में आने वाला हर नया विद्यार्थी विश्वविद्यालय के लिए समान है, और उसकी मदद करने का अधिकार हर उस संगठन को होना जो छात्रों के हित में काम करना चाहता है।
प्रदर्शन में शामिल प्रमुख चेहरे
इस विरोध प्रदर्शन और प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाने वालों में एनसुई बीएचयू इकाई के कई प्रमुख कार्यकर्ता शामिल रहे। विरोध प्रदर्शन के दौरान मुरारी यादव, आशुतोष, विवेक, आलोक, प्रियदर्शन मीना, निक्सन, प्रिंस, निशांत गुप्ता और वैभव जायसवाल समेत तमाम छात्र नेता मौजूद रहे। इन सभी ने एक स्वर में मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को अपने इस रवैये पर स्पष्टीकरण देना चाहिए और भविष्य के लिए पारदर्शी नीतियां बनानी चाहिए.
छात्र हितों के नाम पर आगे की रणनीति
घटना के बाद से ही बीएचयू परिसर में राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। हालांकि प्रशासन की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन छात्र संगठनों ने साफ कर दिया है कि वे विद्यार्थियों के अधिकारों और उनकी प्राथमिक जरूरतों से जुड़े मुद्दों पर पीछे हटने वाले नहीं हैं।
संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि वे लोकतांत्रिक दायरे में रहकर अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे। आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि नए सत्र की शुरुआत के साथ ही परिसरों में छात्र संघ और राजनीतिक संगठनों की गतिविधियां तेज होना स्वाभाविक है। फिलहाल, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस पूरे मामले में आगे क्या रुख अपनाता है और क्या सभी संगठनों के लिए कोई सर्वमान्य व्यवस्था बनाई जाती है या नहीं।