भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और मौसम विभाग के साझा अभियानों के तहत अंतरिक्ष में तैनात अत्याधुनिक मौसम उपग्रह 'INSAT-3DS' ने इस बार मॉनसून के एक ऐसे रूप को कैमरे में कैद किया है, जिसे देखकर मौसम वैज्ञानिक भी हैरान हैं। सैटेलाइट से मिली ताजा तस्वीरों में पूर्वी और मध्य भारत के आसमान पर बादलों का एक ऐसा विशाल और घना घेरा नजर आ रहा है, जो आने वाले दिनों में भारी तबाही या राहत—दोनों का संदेश दे रहा है।
यह वेदर अपडेट ऐसे समय में सामने आया है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में मॉनसून का व्यवहार बेहद असमय और असमान हो गया है। एक तरफ जहां कुछ इलाके पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ क्षेत्रों में बादलों का डेरा इस बात का संकेत है कि आने वाले 48 से 72 घंटे बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। आइए जानते हैं INSAT-3DS की इन तस्वीरों के क्या हैं मायने और देश के मौसम पर इसका क्या असर पड़ेगा।
INSAT-3DS की तस्वीरों में क्या दिखा?
मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, INSAT-3DS सैटेलाइट द्वारा भेजे गए इन्फ्रारेड और वॉटर वेपर डेटा से पता चलता है कि बंगाल की खाड़ी से उठने वाली नमी भरी हवाओं ने पूर्वी भारत (बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा) तथा मध्य भारत (मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़) के ऊपर एक मजबूत चक्रवाती सिस्टम बना लिया है।
इन तस्वीरों में बादलों की डेंसिटी (घनत्व) बहुत ज्यादा दिखाई दे रही है, जिसका मतलब साफ है कि इन क्षेत्रों में बादलों की मोटाई अधिक है और वे अत्यधिक ऊंचाई तक विकसित हो चुके हैं। ऐसे बादल आम तौर पर मूसलाधार बारिश, तेज हवाओं और आकाशीय बिजली (वज्रपात) का कारण बनते हैं।
पूर्वी और मध्य भारत में रेड अलर्ट जैसे हालात
सैटेलाइट डेटा के विश्लेषण से यह स्पष्ट हो गया है कि पूर्वी और मध्य भारत के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक झमाझम बारिश का दौर जारी रहेगा। जिन इलाकों में नदियां पहले से उफान पर हैं, वहां जलस्तर और बढ़ने की आशंका जताई गई है।
- बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश: यहाँ लगातार बादलों की आवाजाही बनी रहेगी और कुछ स्थानों पर भारी से अति भारी बारिश हो सकती है।
- मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़: मध्य भारत का यह बेल्ट इस समय सबसे ज्यादा एक्टिव मॉनसून जोन बना हुआ है। यहाँ खेतों में पानी भरने से खरीफ की फसलों को लेकर किसानों की चिंताएं बढ़ सकती हैं।
- पश्चिम बंगाल और झारखंड: तटीय और अंदरूनी हिस्सों में लगातार मानसूनी बौछारें जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं।
पश्चिमी और दक्षिणी भारत का हाल: बारिश की कमी से चिंता
एक तरफ जहां पूर्वी और मध्य भारत बादलों के साए में है, वहीं इसके ठीक विपरीत तस्वीर देश के पश्चिमी, दक्षिणी और उत्तर-पश्चिमी हिस्सों से आ रही है। INSAT-3DS की तस्वीरें बताती हैं कि इन क्षेत्रों में फिलहाल मॉनसून की सक्रियता बेहद कमजोर पड़ गई है।
महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों, गुजरात, राजस्थान और दक्षिण भारत के प्रायद्वीपीय इलाकों में आसमान या तो बिल्कुल साफ है या फिर बादलों की आवाजाही नाममात्र की है। मॉनसून के इस असंतुलन (Monsoon Break) के कारण इन इलाकों में एक बार फिर सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले एक हफ्ते तक इन इलाकों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो फसलों की सिंचाई पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।
दिल्ली-एनसीआर में क्या रहेगा मौसम का मिजाज?
देश की राजधानी दिल्ली और इससे सटे एनसीआर (नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद) के लोगों के लिए मौसम मिला-जुला रहने वाला है। सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, दिल्ली के ऊपर कोई बहुत बड़ा वेदर सिस्टम एक्टिव नहीं है, लेकिन आसपास के लोकल फैक्टर्स और नमी के कारण यहां बादलों की लुकाछिपी जारी रहेगी।
मौसम विभाग का अनुमान है कि दिल्ली-एनसीआर में गरज-चमक के साथ छिटपुट बौछारें (Scattered Showers) पड़ सकती हैं। हालांकि, इससे उमस भरी गर्मी से बहुत ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद कम ही है। तापमान सामान्य के आसपास बना रहेगा।
वैज्ञानिकों की चेतावनी और किसानों के लिए सलाह
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण मॉनसून का पैटर्न लगातार बदल रहा है। कभी बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश (Cloudburst or Heavy Spell) हो जाती है, तो कभी लंबे समय तक सूखा पड़ जाता है। INSAT-3DS जैसी सैटेलाइट तकनीक हमें इन बदलावों की सटीक जानकारी समय रहते दे देती है, जिससे आपदा प्रबंधन में मदद मिलती है।
किसानों के लिए विशेष निर्देश: जिन इलाकों (पूर्वी और मध्य भारत) में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है, वहां किसानों को सलाह दी जाती है कि वे कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखें और खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी का प्रबंध करें। वहीं, सूखे की मार झेल रहे पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों के किसानों को सिंचाई के वैकल्पिक साधनों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
