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शाहजहांपुर में खौफ: घरों के दरवाजे और खंडहरों तक पहुंचे मगरमच्छ, लोगों की सांसे अटकी

शाहजहांपुर में खौफ: घरों के दरवाजे और खंडहरों तक पहुंचे मगरमच्छ, लोगों की सांसे अटकी

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और डरावनी तस्वीर सामने आ रही है। जिले के खुदागंज और उससे सटे ग्रामीण इलाकों में इन दिनों पानी के खूंखार जीव यानी मगरमच्छों की आमद ने लोगों की नींद उड़ा दी है। हालात यह हैं कि अब ये जलीय जीव सिर्फ नदियों या तालाबों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सीधे इंसानी बस्तियों, घरों के दरवाजों और खंडहरों तक पहुंच रहे हैं। हाल ही में हुई घटनाओं ने ग्रामीण इलाकों में ऐसा खौफ पैदा कर दिया है कि लोग रात के समय अपने घरों से बाहर निकलने में भी कांपने लगे हैं।

म्यूना और सैदपुर गांव में मची अफरा-तफरी

ताजा मामला खुदागंज क्षेत्र के दो अलग-अलग गांवों का है, जहां सोमवार की रात को अचानक मगरमच्छों के प्रकट होने से हड़कंप मच गया। ग्राम म्यूना में एक हैरान करने वाली घटना घटी, जब रात के सन्नाटे में एक विशालकाय मगरमच्छ चलकर सीधे एक स्थानीय निवासी के घर के बाहर आ धमका। मगरमच्छ ठीक लोहे के मुख्य गेट के पास आकर बैठ गया। जब घर के किसी सदस्य ने बाहर आहट और चहल-पहल महसूस की, तो उनकी नजर उस खूंखार जीव पर पड़ी। दृश्य देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।

वक्त गंवाए बिना ग्रामीणों ने तत्काल इमरजेंसी नंबर डायल 112 पर कॉल किया और साथ ही वन विभाग को इसकी सूचना दी। मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने सूझबूझ दिखाते हुए कड़ी मशक्कत के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित कब्जे में लिया और पास के कुचई घाट दोहा नदी में ले जाकर छोड़ दिया, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली।

खंडहर में छिपे बैठे मगरमच्छ को टॉर्च की रोशनी में देखा

म्यूना गांव की इस घटना से लोग अभी उबर भी नहीं पाए थे कि सैदपुर गांव से एक और डराने वाली खबर आ गई। सैदपुर निवासी राजाराम का परिवार सोमवार रात को अपने रोजमर्रा के कामों से निवृत्त होकर सोने की तैयारी कर रहा था। तभी राजाराम को अपने घर के पास बने एक पुराने खंडहर से कुछ अजीब सी आवाजें और हलचल सुनाई दी। शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद कोई सामान्य आवारा जानवर अंदर घुस आया होगा।

लेकिन जब काफी देर तक संदिग्ध हलचल बंद नहीं हुई, तो राजाराम ने हिम्मत जुटाकर टॉर्च जलाई और खंडहर के भीतर रोशनी डाली। टॉर्च की तेज रोशनी पड़ते ही जो नजारा दिखा, उसने होश उड़ा दिए। वहाँ एक भारी-भरकम मगरमच्छ चुपचाप बैठा हुआ था। राजाराम तुरंत पीछे हटे और अपने परिवार व गांव के लोगों को इसकी जानकारी दी। गांव के ही एक युवक आनंद ने तत्परता दिखाते हुए फौरन वन्यजीव अधिकारियों और वन विभाग की टीम को फोन किया। सुबह लगभग 8 बजे तक चले लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद वन कर्मियों ने आखिरकार उस मगरमच्छ को दबोच लिया और बहगुल नदी में सुरक्षित छोड़ दिया। इस पूरी कार्रवाई में रेंजर अनिल कुमार, अमित शर्मा, श्यामसिंह यादव और बाकर समेत स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।

क्यों आबादी की तरफ बढ़ रहे हैं जलजीव?

पर्यावरण और वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के मौसम में हुई भारी बारिश और नदियों में आए उफान के कारण जलीय स्रोतों का दायरा फैल जाता है। बाढ़ और जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव की वजह से मगरमच्छ अपने प्राकृतिक आवास यानी गहरे पानी से निकलकर बहते हुए जलधाराओं के जरिए खेतों, नहरों और अंततः मानव बस्तियों के करीब आ पहुंचते हैं। खुदागंज क्षेत्र में पिछले एक-दो महीनों के भीतर यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं की एक लंबी फेहरिस्त बन चुकी है जो प्रशासन और आम जनता, दोनों के लिए गहरी चिंता का विषय है।

पिछले कुछ हफ्तों में सामने आए डराने वाले मामले

  • 8 अगस्त: ग्राम जिगानियां में एक मगरमच्छ सीधे गांव की मुख्य गली में टहलते हुए पहुंच गया था।
  • अगस्त मध्य: मझिला गांव के पास सूथा मार्ग पर मढ़ी मंदिर के नजदीक खेतों में मगरमच्छ की मौजूदगी दर्ज की गई।
  • 25 अगस्त: दीपपुर नहर के पास इमली वाली मजार के समीप खेत की मेड़ पर मगरमच्छ देखा गया, जिससे किसानों में दहशत फैल गई।
  • 30 अगस्त: जलालपुर आबादी क्षेत्र में देर रात एक मगरमच्छ को सड़क पर खुलेआम घूमते हुए स्थानीय लोगों ने देखा।
  • सितंबर के शुरुआती पखवाड़े में: ग्राम अकबरी के एक तालाब में मगरमच्छ के तैरने की सूचना से हड़कंप मचा।
  • 4 अक्टूबर: ग्राम सुराही में मगरमच्छ के अचानक प्रकट होने से ग्रामीणों में भारी अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
  • हालिया घटना: तिलहर के धमनपुर गांव में मंगलवार सुबह तालाब के किनारे और उससे सटे खेत में मगरमच्छ के बैठने से आसपास के कई गांवों के लोग इकट्ठा हो गए।

ग्रामीणों की मांग: सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बाद ग्रामीण इलाकों में भारी भय का वातावरण है। किसानों और पशुपालकों का कहना है कि वे अपने खेतों में काम करने या मवेशियों को पानी पिलाने जाने से भी डरने लगे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि ऐसे संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी बढ़ाई जाए। साथ ही, नदियों और नहरों के किनारे चेतावनी बोर्ड लगाने तथा लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता है ताकि किसी भी अनहोनी या जनहानि को समय रहते टाला जा सके।

प्रशासन की टीमों ने भी लोगों से अपील की है कि वे जलस्रोतों के पास अकेले जाने से बचें और यदि कहीं भी इस तरह का वन्यजीव दिखाई दे, तो तुरंत वन विभाग या स्थानीय पुलिस को सूचना दें, ताकि समय रहते रेस्क्यू किया जा सके और इंसानों व वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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