भारतीय सिनेमा जगत में जब भी किसी बड़े ब्रांड या पॉपुलर फ्रेंचाइजी का डिजिटल प्लेटफॉर्म से बड़े पर्दे पर आगमन होता है, तो उम्मीदें और उत्सुकता अपने चरम पर होती हैं। ऐसा ही कुछ बहुप्रतीक्षित क्राइम-थ्रिलर फिल्म 'मिर्जापुर: द मूवी' के साथ भी हुआ। सीरीज की जबरदस्त फैन फॉलोइंग को देखते हुए मेकर्स ने इसे सिनेमाघरों में उतारा, जहां शुरुआती दिनों में बॉक्स ऑफिस पर इसने ताबड़तोड़ कमाई के नए रिकॉर्ड बनाए। लेकिन दूसरी तरफ, इस फिल्म की क्वालिटी और कहानी को लेकर तीखी आलोचनाओं का दौर भी शुरू हो गया है। देश की जानी-मानी और बेबाक लेखिका-कॉलमनिस्ट शोभा डे ने इस ब्लॉकबस्टर फिल्म पर अपना तीखा गुस्सा जाहिर किया है, जो इस समय सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है।
शोभा डे का तीखा रिव्यू: 'शायद यह फिल्म बननी ही नहीं चाहिए थी'
अपने दो टूक और स्पष्ट बयानों के लिए पहचानी जाने वाली शोभा डे ने हाल ही में रिलीज हुई 'मिर्जापुर: द मूवी' को देखने के बाद अपना अनुभव सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर इस फिल्म के निर्देशन, पटकथा और समग्र प्रभाव पर गंभीर सवाल खड़े किए। शोभा डे ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि इस फिल्म को देखकर उन्हें भारी निराशा हुई है और उनके मन में बस यही सवाल गूंज रहा था कि आखिर ऐसी बेतुकी फिल्म बनाई ही क्यों गई।
शोभा डे ने बताया कि उन्होंने इसके पहले ओटीटी पर इस लोकप्रिय सीरीज के ओरिजिनल एपिसोड्स नहीं देखे थे, लेकिन चारों तरफ मचे जबरदस्त हाइप और ब्रांड वैल्यू को देखकर वह सिनेमाघर की तरफ खिंची चली गईं। हालांकि, उनका यह सिनेमाई सफर बेहद दर्दनाक और उबाऊ साबित हुआ। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कुल मिलाकर यह फिल्म उनके लिए पूरी तरह से समय और पैसे की बर्बादी साबित हुई।
अभिनय पर क्या बोलीं शोभा डे?
फिल्म के कलाकारों के प्रदर्शन पर बात करते हुए शोभा डे ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कुछ कलाकारों के अभिनय की सराहना भी की, तो कुछ मुख्य कलाकारों की परफॉर्मेंस पर जमकर अपनी भड़ास निकाली।
- सकारात्मक पक्ष: उन्होंने फिल्म में विलेन के रूप में नजर आए रवि किशन के 'बब्बन बाबूआ यादव' वाले किरदार और मुख्य अभिनेता अली फजल यानी 'गुड्डू पंडित' के तेवर की जमकर तारीफ की। उनके मुताबिक, इन कलाकारों ने अपने हिस्से का काम पूरी ऊर्जा के साथ किया है।
- कालीन भैया पर फूटा गुस्सा: इसके विपरीत, पंकज त्रिपाठी द्वारा निभाए गए प्रतिष्ठित किरदार 'कालीन भैया' को लेकर शोभा डे काफी नाराज नजर आईं। उन्होंने कहा कि पंकज त्रिपाठी का वही पुराना अंदाज, ठेठ लहजा और एक जैसे फिक्स एक्सप्रेशन अब दर्शकों को बोर करने लगे हैं। उनमें अब कोई नयापन या ताजगी देखने को नहीं मिलती है।
- बीना त्रिपाठी का किरदार: उन्होंने रसिक दुगल द्वारा निभाए गए 'बीना त्रिपाठी' के किरदार और उनके साथ फिल्माए गए कुछ दृश्यों पर भी कड़ी हैरानी जताई। शोभा डे ने इस किरदार को सीधे तौर पर 'वैम्प' और शेक्सपियर के प्रसिद्ध नाटक की 'लेडी मैकबेथ' जैसा करार दिया।
'15 मिनट सो गई, पीछे बैठी महिलाएं खर्राटे ले रही थीं'
फिल्म की खामियों का कच्चा चिट्ठा खोलते हुए शोभा डे ने इसके ड्रामेटिक और थ्रिलर वाले दावों की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने मजाकिया और व्यंग्यात्मक लहजे में स्वीकार किया कि फिल्म की रफ्तार और नीरसता इतनी अधिक थी कि वह थियेटर में लगभग 15 मिनट के लिए गहरी नींद में सो गई थीं। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी बताया कि उनके ठीक पीछे बैठी दो महिला दर्शक फिल्म के दौरान गहरी नींद में जा चुकी थीं और उनके खर्राटे लेने की आवाजें साफ सुनाई दे रही थीं।
उन्होंने अपनी रील में चुटकी लेते हुए कहा कि यह फिल्म शायद सिर्फ एक खास वर्ग या पुरुषों के मनोरंजन के लिए बनाई गई है, आम दर्शकों या महिला वर्ग के लिए इसमें कुछ खास नहीं है। अपने गुस्से को बयां करते हुए उन्होंने कैप्शन में यह तक हिसाब लगाया कि उन्होंने फिल्म के टिकट पर 900 रुपये और इंटरवल के दौरान भेलपुरी पर 260 रुपये खर्च किए, जिसके बदले उन्हें केवल 4 घंटे तक यह सोचने के मजबूर होना पड़ा कि वह आखिरकार ऐसी बिना सिर-पैर की फिल्म क्यों देख रही हैं।
बॉक्स ऑफिस पर नोटों की बारिश
एक तरफ जहां समीक्षकों और बौद्धिक वर्ग की तरफ से इस फिल्म को तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ आम दर्शकों यानी जनता जनार्दन का रुख इसके बिल्कुल विपरीत है। क्रिटिक्स के नेगेटिव रिव्यू के बावजूद 'मिर्जापुर: द मूवी' बॉक्स ऑफिस पर सुनामी बनकर उभरी है और टिकट खिड़की पर ताबड़तोड़ कमाई के नए आयाम गढ़ रही है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो फिल्म ने रिलीज होने के बाद अपने शुरुआती सात दिनों के भीतर ही दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस से 212.44 करोड़ रुपये का शानदार कारोबार कर लिया है। फिल्म की शुरुआत बेहद धमाकेदार रही थी और इसने पहले ही दिन 25.75 करोड़ रुपये का बंपर कलेक्शन किया था। इसके बाद वीकेंड पर इसकी रफ्तार और तेज हो गई, जहां दूसरे दिन कमाई बढ़कर 32 करोड़ रुपये और तीसरे दिन रविवार को सर्वाधिक 36 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। हालांकि, मंडे टेस्ट के बाद वर्किंग डेज में इसके कलेक्शन में थोड़ी गिरावट जरूर दर्ज की गई, लेकिन कुल मिलाकर फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी है।
सिनेमा बनाम क्रिटिक्स की बहस
शोभा डे द्वारा 'मिर्जापुर: द मूवी' की गई तीखी आलोचना ने एक बार फिर से इस पुरानी बहस को जिंदा कर दिया है कि क्या बॉक्स ऑफिस के आंकड़े ही किसी फिल्म की असल सफलता का पैमाना होते हैं या फिर उसकी कलात्मक गुणवत्ता और पटकथा मायने रखती है? मास और क्लास के बीच की यह खाई इस फिल्म के मामले में पूरी तरह से उजागर हो गई है। जहां एक तरफ मास ऑडियंस एक्शन, थ्रिल और अपने चहेते किरदारों को बड़े पर्दे पर देखकर सिनेमाघरों में सीटियां बजा रही है, वहीं क्लास ऑडियंस या पारंपरिक समीक्षक इसे बिना सिर-पैर की हिंसा और समय की बर्बादी करार दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नकारात्मक समीक्षाओं का असर इस फिल्म की बॉक्स ऑफिस रफ़्तार पर कोई खास ब्रेक लगा पाता है या नहीं।