Breaking
► देवेंद्र फडणवीस ने वाशी में बनाई गणपति की मूर्ति, पीओपी मुक्त गणेशोत्सव का संदेश ► नासिक मनपा बैठक में हंगामा: पानी के भारी बिल और रिश्वतखोरी पर भड़के पार्षद ► BRICS Summit 2026: दिल्ली में जुटा ग्लोबल विजन, पीएम मोदी बोले- विश्व कल्याण पर होगी चर्चा ► नागपुर में त्योहारों से पहले LPG पर बड़ा फैसला, नियमों की अनदेखी पर पुलिस व आपूर्ति विभाग का एक्शन ► अक्षत त्रिपाठी नोटिस केस: सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट सस्पेंड ► MPSC Exam Reform: पेपर लीक पर सख्त हुई सरकार, 30 सितंबर को नासिक पहुंचेगी उच्चस्तरीय समिति ► महाराष्ट्र में बैंक लगातार 4 दिन रहेंगे बंद, चेक कर लें जरूरी काम वरना होगी परेशानी ► सांसें थमीं पर धड़कन बाकी: जाते-जाते 4 जिंदगियां रोशन कर गया भोपाल का विकास ► यूपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 5 IAS और 6 PCS अधिकारियों के तबादले, बहराइच और जालौन को मिला नया DM ► लाल सागर में बदला समीकरण, मोचा पर हूतियों का कब्जा, ईरान ने बताया अल्लाह की जीत ► देवेंद्र फडणवीस ने वाशी में बनाई गणपति की मूर्ति, पीओपी मुक्त गणेशोत्सव का संदेश ► नासिक मनपा बैठक में हंगामा: पानी के भारी बिल और रिश्वतखोरी पर भड़के पार्षद ► BRICS Summit 2026: दिल्ली में जुटा ग्लोबल विजन, पीएम मोदी बोले- विश्व कल्याण पर होगी चर्चा ► नागपुर में त्योहारों से पहले LPG पर बड़ा फैसला, नियमों की अनदेखी पर पुलिस व आपूर्ति विभाग का एक्शन ► अक्षत त्रिपाठी नोटिस केस: सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट सस्पेंड ► MPSC Exam Reform: पेपर लीक पर सख्त हुई सरकार, 30 सितंबर को नासिक पहुंचेगी उच्चस्तरीय समिति ► महाराष्ट्र में बैंक लगातार 4 दिन रहेंगे बंद, चेक कर लें जरूरी काम वरना होगी परेशानी ► सांसें थमीं पर धड़कन बाकी: जाते-जाते 4 जिंदगियां रोशन कर गया भोपाल का विकास ► यूपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 5 IAS और 6 PCS अधिकारियों के तबादले, बहराइच और जालौन को मिला नया DM ► लाल सागर में बदला समीकरण, मोचा पर हूतियों का कब्जा, ईरान ने बताया अल्लाह की जीत

लाल सागर में बदला समीकरण, मोचा पर हूतियों का कब्जा, ईरान ने बताया अल्लाह की जीत

लाल सागर में बदला समीकरण, मोचा पर हूतियों का कब्जा, ईरान ने बताया अल्लाह की जीत

अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सामरिक हलचल के केंद्र बिंदु यमन से इस वक्त की एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। लाल सागर के मुहाने पर स्थित रणनीतिक रूप से बेहद अहम बंदरगाह शहर मोचा पर अब हूती लड़ाकों का पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो चुका है। इस नाटकीय घटनाक्रम के बाद से मध्य पूर्व से लेकर पश्चिमी देशों तक राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। एक तरफ जहां यमन की सरकार ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए वैश्विक ताकतों से फौरन दखल देने की अपील की है, वहीं दूसरी ओर ईरान ने इस सफलता पर खुलकर खुशी जताई है। ईरानी संसद के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इसे 'अल्लाह की जीत' करार दिया गया है, जिससे इस क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ने के पूरे आसार बन गए हैं।

मोचा शहर पर हूतियों का कब्जा और सामरिक महत्व

यमन का मोचा शहर सामान्य तटीय इलाका नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शिपिंग और ऑयल सप्लाई के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील चोकपॉइंट्स में से एक माना जाता है। यह शहर लाल सागर और बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य के बेहद करीब स्थित है। यहाँ से गुजरने वाले समुद्री मार्ग से दुनिया का एक बहुत बड़ा कमर्शियल ट्रेड और पेट्रोलियम सप्लाई होती है।

विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी समर्थित सरकारी सेना और ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों (अंसार अल्लाह) के बीच पिछले कुछ दिनों से भीषण संघर्ष चल रहा था। हूतियों द्वारा किए गए अचानक और आक्रामक हमलों के आगे सरकारी सेना को अंततः पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। इस रणनीतिक जीत के बाद अब बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य पर हूतियों का शिकंजा और अधिक मजबूत हो गया है, जो दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है।

ईरानी संसद अध्यक्ष का बड़ा बयान: 'यमन के लोगों की जीत'

हूतियों की इस सैन्य बढ़त के बाद तेहरान से तीखी और उत्साही प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी संसद के अध्यक्ष बाघेर गालीबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा करते हुए इस घटनाक्रम को ऐतिहासिक बताया। गालीबाफ ने लिखा कि बहादुर यमनी लोग निश्चित रूप से विजयी होंगे और यह सर्वशक्तिमान ईश्वर की अनुमति से संभव हुआ है।

अपने इस बयान के समर्थन में उन्होंने देश के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के एक पुराने संदेश का भी जिक्र किया। खामेनेई ने पहले कहा था कि यमन की जनता का जिहाद और उनका निरंतर प्रतिरोध तब तक जारी रहना चाहिए जब तक उन्हें मुकम्मल जीत हासिल नहीं हो जाती। हालांकि, ईरान लगातार दुनिया के सामने यह दावा करता रहा है कि यमन के हूती संगठन स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं और वे तेहरान के निर्देशों पर नहीं चलते, लेकिन इस तरह खुले समर्थन ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संदेह को और गहरा कर दिया है।

वैश्विक व्यापार पर मंडराया संकट, यमन सरकार की गुहार

मोचा बंदरगाह के पतन के बाद यमन के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख रशाद अल-अलीमी ने मोचा और बाब अल-मंडब के घटनाक्रम को केवल एक स्थानीय आंतरिक संघर्ष मानने से इनकार कर दिया है। उनका साफ कहना है कि यह एक गंभीर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संकट है, जो सीधे तौर पर ग्लोबल ट्रेड को प्रभावित कर रहा है।

अल-अलीमी ने दुनिया के तमाम प्रभावशाली देशों और वैश्विक ताकतों से अपील की है कि वे तुरंत हस्तक्षेप करें। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य को दूसरा होर्मुज स्ट्रेट नहीं बनने दिया जा सकता और न ही यमन को किसी अन्य रूप में ईरान के सांचे में ढलने दिया जा सकता है। उन्होंने इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए निर्णायक अंतरराष्ट्रीय कदमों की मांग की है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को औपचारिक पत्र

स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए यमन की विदेश मंत्री अफराह अल-जुबा ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) को एक औपचारिक पत्र लिखा है। इस पत्र में यमन के पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में तेजी से बदलती परिस्थितियों पर चिंता जताते हुए एक मजबूत, स्पष्ट और एकजुट अंतरराष्ट्रीय रुख अपनाने का आग्रह किया गया है। यमन सरकार चाहती है कि यूएन इस मामले में कड़े कदम उठाए ताकि समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखा जा सके और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कोई बड़ी बाधा उत्पन्न न हो।

ईरान और अमेरिका के बीच जुबानी जंग तेज

इस पूरे घटनाक्रम के बैकग्राउंड में अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक तनाव भी अपने चरम पर है। कुछ समय पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया था कि हूती समूह पूरी तरह से तेहरान के प्रॉक्सी के रूप में काम कर रहा है और मध्य पूर्व में अशांति फैला रहा है।

गुरुवार को ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने इन अमेरिकी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने पलटवार करते हुए वाशिंगटन पर क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति और वर्चस्ववादी नीतियों के जरिए जानबूझकर अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाया। बघई ने जोर देकर कहा कि यमन में अगर वास्तविक और स्थायी शांति स्थापना करनी है, तो बाहरी ताकतों के हस्तक्षेप को पूरी तरह से समाप्त करना होगा।

आगे क्या हो सकता है?

मोचा बंदरगाह पर हूतियों का अधिकार होना भू-राजनीतिक मानचित्र पर एक बड़ा बदलाव है। एक तरफ जहां इस जीत से ईरान और उसके समर्थक गुटों का हौसला बढ़ा है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी देशों और खाड़ी के अन्य देशों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा कि संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक महाशक्तियां इस तटीय संकट से निपटने के लिए क्या ठोस रणनीति अपनाती हैं। क्या अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए कोई बड़ी सैन्य कार्रवाई देखने को मिलेगी या कूटनीतिक स्तर पर कोई नया समाधान निकलेगा, इस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।

About the Author

ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor (विदेश खबरें)

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

Read More