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देवेंद्र फडणवीस ने वाशी में बनाई गणपति की मूर्ति, पीओपी मुक्त गणेशोत्सव का संदेश

देवेंद्र फडणवीस ने वाशी में बनाई गणपति की मूर्ति, पीओपी मुक्त गणेशोत्सव का संदेश

महाराष्ट्र की संस्कृति और परंपराओं का सबसे बड़ा महापर्व गणेशोत्सव इस बार एक बेहद खास और अनूठे संदेश के साथ शुरू होने जा रहा है। गणपति बप्पा के आगमन से ठीक पहले राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनुकरणीय पहल की है। नवी मुंबई के वाशी में आयोजित एक राज्यस्तरीय पर्यावरणपूरक महागणेश मूर्ति कार्यशाला में शिरकत करते हुए मुख्यमंत्री ने न केवल इस अभियान का शुभारंभ किया, बल्कि अपने हाथों से गणेशजी की मूर्ति गढ़कर समाज को एक स्पष्ट संदेश भी दिया।


वाशी में सजी महागणेश मूर्ति कार्यशाला

गुरुवार को नवी मुंबई के वाशी इलाके में एक विशेष महागणेश मूर्ति कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्यभर में गणेशोत्सव के दौरान पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly) मूर्तियों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। आधुनिकता की दौड़ में पिछले कुछ दशकों से प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) और हानिकारक रासायनिक रंगों से बनी मूर्तियों का चलन तेजी से बढ़ा है, जो उत्सव के बाद जलस्रोतों में मिलकर गंभीर जल प्रदूषण का कारण बनते हैं।

इसी चिंता को दूर करने के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया गया, ताकि नागरिकों और विशेष रूप से युवा पीढ़ी को पारंपरिक और प्राकृतिक तरीकों से गणेशोत्सव मनाने के लिए प्रेरित किया जा सके। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस कार्यशाला में पहुंचकर खुद मिट्टी के गणेश गढ़े और साबित किया कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाना हर नागरिक का पहला कर्तव्य होना चाहिए।

विद्यार्थी बने इस महाअभियान के असली नायक

इस भव्य और अनूठे आयोजन के दौरान गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के परीक्षकों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और परिणामों की घोषणा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस अभूतपूर्व सफलता के असली नायक वे विद्यार्थी हैं, जिन्होंने इस कार्यशाला में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने सभी छात्रों की जमकर सराहना की और उनके हुक को सराहा।

इस कार्यक्रम में प्रदेश की पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे भी विशेष रूप से उपस्थित थीं। उन्होंने विद्यार्थियों को मनःपूर्वक बधाई देते हुए कहा, 'शाडू की मिट्टी से बप्पा को आकार देने वाले इन हजारों विद्यार्थियों ने खुद को 'वसुंधरा रक्षक' के रूप में साबित कर दिखाया है। हमारी संस्कृति को जीवित रखते हुए पर्यावरण की रक्षा करने का यह संदेश घर-घर तक पहुंचाना ही इस उपक्रम का मूल उद्देश्य है।' इसके साथ ही उन्होंने पर्यावरण विभाग, जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट और कला निदेशालय के संयुक्त प्रयासों की भी सराहना की।

संस्कृति और पर्यावरण का गहरा नाता: मुख्यमंत्री फडणवीस

उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भारतीय सनातन संस्कृति और प्रकृति के बीच के अटूट रिश्ते पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विघ्नहर्ता भगवान गणेश बुद्धि के देवता हैं और हमारी संस्कृति में पर्यावरण को अनन्यसाधारण महत्व दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने पंचमहाभूतों का जिक्र करते हुए कहा, 'सृष्टि का निर्माण करने वाले इन पांच मूल तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) की रक्षा होगी, तभी मानव जीवन सुरक्षित और स्वस्थ रह सकता है। गणेशोत्सव हमारी आस्था का पर्व है, लेकिन इसे मनाते समय हमें यह ध्यान रखना होगा कि हमारी खुशियां प्रकृति के लिए संकट न बन जाएं।'

आकार नहीं, बल्कि भावना और सेवा है अहम

बाजार में बिकने वाली बड़ी-बड़ी और भव्य मूर्तियों को लेकर मुख्यमंत्री ने एक बेहद व्यावहारिक और आध्यात्मिक संदेश दिया। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अत्यधिक बड़ी मूर्तियों, प्लास्टर ऑफ पेरिस और कृत्रिम रंगों के प्रयोग से बचें।

फडणवीस ने कहा, 'मूर्ति छोटी हो या बड़ी, भगवान के प्रति भक्ति और आस्था हमेशा एक जैसी ही रहती है। ईश्वर का आशीर्वाद कभी भी मूर्ति के बड़े आकार या उसकी भव्यता पर निर्भर नहीं करता, बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि हम प्रकृति और समाज की कितनी निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं।' उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे इस बार के गणेशोत्सव को पूरी तरह से पर्यावरणपूरक बनाएं और जल प्रदूषण रोकने में अपना योगदान दें।

दिग्गजों की मौजूदगी ने बढ़ाई अभियान की शोभा

इस उच्च स्तरीय और प्रेरणादायक कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के कई दिग्गज मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। समारोह की गरिमा बढ़ाने वालों में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे, वन मंत्री गणेश नाईक, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष सिद्धेश कदम, विधायक मंदा म्हात्रे, और विधायक रविंद्र फाटक शामिल थे।

इसके अलावा प्रशासनिक स्तर पर पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की सचिव जयश्री भोज, नवी मुंबई की महापौर सुजाता पाटिल, नवी मुंबई महानगरपालिका आयुक्त कैलास शिंदे, ठाणे के जिलाधिकारी डॉ. श्रीकृष्ण पांचाल और कला निदेशालय के निदेशक डॉ. नितिन इंगले समेत कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इन सभी ने एक स्वर में नागरिकों से पर्यावरण के अनुकूल गणेशोत्सव मनाने का संकल्प लेने की अपील की।

जल प्रदूषण रोकने की दिशा में मील का पत्थर

विशेषज्ञों का मानना है कि गणेशोत्सव के दौरान विसर्जन के बाद जलस्रोतों पर जो दबाव पड़ता है, वह पर्यावरण के लिए एक बड़ी चुनौती है। पीओपी पानी में घुलता नहीं है और इसके ऊपर किए गए लेड, मर्करी जैसे भारी धातुओं वाले रंग जलीय जीवों के लिए घातक साबित होते हैं।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की यह पहल और वाशी की यह कार्यशाला इस समस्या के समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। जब राज्य का मुखिया खुद मिट्टी के गणेश बनाकर जनता के सामने एक मिसाल पेश करता है, तो उसका प्रभाव समाज के हर वर्ग तक सकारात्मक रूप से पहुंचता है। इस गणेशोत्सव पर हर नागरिक को यह प्रण लेना चाहिए कि वे परंपरा और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाते हुए उत्सव मनाएंगे।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer (स्थानीय खबरें)

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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