राजधानी दिल्ली की सीमा पर एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ गई है। सिंघु बॉर्डर की दीवारों पर खालिस्तान के समर्थन में आपत्तिजनक और भड़काऊ नारे लिखने के मामले में दिल्ली पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने इस सनसनीखेज घटना को अंजाम देने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद से राष्ट्रीय राजधानी के बॉर्डर इलाकों में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। गिरफ्तार किए गए संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर पुलिस उन तमाम कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, जो इस नापाक साजिश के तार सीधे तौर पर विदेशों में बैठे देशविरोधी तत्वों से जोड़ती हैं।
घटना की शुरुआत और पुलिस की त्वरित कार्रवाई
यह पूरा मामला बीते 6 सितंबर का है, जब सिंघु बॉर्डर के पास अचानक सुबह लोगों ने दीवारों पर खालिस्तान के समर्थन में लिखे गए नारे देखे। इन नारों के साथ-साथ कुछ आपत्तिजनक बातें भी दीवारों पर उकेरी गई थीं, जिसका उद्देश्य इलाके में तनाव फैलाना और शांति व्यवस्था को बाधित करना था। मामला सामने आते ही स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा महकमे में हड़कंप मच गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने तुरंत एक्शन लिया। अज्ञात लोगों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर जांच का जिम्मा अनुभवी अधिकारियों को सौंपा गया। शुरुआती स्तर पर भले ही यह एक साधारण दीवार लेखन की घटना लग रही थी, लेकिन इसके राजनीतिक और सामरिक निहितार्थों को भांपते हुए पुलिस ने इसकी तह तक जाने का फैसला किया।
CCTV फुटेज बना मास्टर-की: ऐसे शिकंजे में फंसे आरोपी
अपराधियों को यह गलतफहमी थी कि वे रात के अंधेरे में इस हरकत को अंजाम देकर आसानी से बच निकलेंगे, लेकिन आधुनिक सर्विलांस तकनीक ने उनके इस मंसूबे पर पानी फेर दिया। जांच के दौरान पुलिस ने सिंघु बॉर्डर और उसके आसपास के रास्तों पर लगे दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगालनी शुरू की।
हफ्तों की तकनीकी छानबीन और डिजिटल फुटप्रिंट्स का विश्लेषण करने के बाद पुलिस को एक संदिग्ध कार और उस पर सवार लोगों की गतिविधियां नजर आईं। फुटेज से मिले सुरागों के आधार पर दिल्ली पुलिस की विशेष टीमों ने पंजाब में कई ठिकानों पर छापेमारी की और अंततः तीनों आरोपियों को दबोच लिया। पुलिस ने उस वाहन को भी अपने कब्जे में ले लिया है, जिसका इस्तेमाल इस आपराधिक कृत्य के लिए किया गया था।
गुरपतवंत सिंह पन्नू कनेक्शन और प्रतिबंधित संगठनों की साजिश
इस गिरफ्तारी के बाद मामले का दायरा काफी बड़ा हो गया है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से कम से कम एक का सीधा संपर्क प्रतिबंधित संगठन 'सिख्स फॉर जस्टिस' (SFJ) के प्रमुख और भारत द्वारा घोषित आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू से था।
दिलचस्प बात यह है कि इस घटना के तुरंत बाद पन्नू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो जारी कर इस घटना की जिम्मेदारी भी ली थी। अब दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि क्या इन तीनों आरोपियों को सीधे तौर पर पन्नू या उसके गुर्गों से निर्देश मिल रहे थे। क्या इस काम के लिए इन्हें हवाला के जरिए फंडिंग की गई थी? इन तमाम सवालों के जवाब तलाशने के लिए आरोपियों से लगातार मैराथन पूछताछ की जा रही है।
खुफिया सूत्रों के खुलासे: बदल रहा है देशविरोधी ताकतों का पैंतरा
सुरक्षा मामलों के जानकारों और खुफिया सूत्रों के मुताबिक, विदेशों में बैठे खालिस्तान समर्थक संगठनों की कार्यप्रणाली में पिछले कुछ समय में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां ये संगठन सीधे तौर पर हिंसा और बड़ी वारदातों को अंजाम देने की फिराक में रहते थे, वहीं अब उनका फोकस प्रोपेगेंडा फैलाने और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने पर शिफ्ट हो गया है।
इस तरह की घटनाओं के जरिए वे युवाओं को भड़काना चाहते हैं और देश की आंतरिक शांति को खंडित करने का प्रयास करते हैं। दीवारों पर नारे लिखना, सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो वायरल करना और युवाओं को थोड़े बहुत पैसों का लालच देकर ऐसे कामों में इस्तेमाल करना, इसी नई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
विस्तृत जांच और नेटवर्क की तलाश
दिल्ली पुलिस की जांच अब केवल इन तीन गिरफ्तार युवकों तक सीमित नहीं है। पुलिस का मानना है कि यह किसी बड़े सिंडिकेट का एक छोटा सा हिस्सा हो सकता है। जांच का दायरा बढ़ाते हुए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि पंजाब और दिल्ली के बीच इस नेटवर्क को कौन लोग ऑपरेट कर रहे थे।
- क्या इन आरोपियों के तार किसी पुराने आपराधिक या जबरन वसूली वाले गिरोह से जुड़े हैं?
- क्या इन्हें सीमा पार से हथियारों या पैसों की कोई अन्य मदद भी मुहैया कराई गई थी?
- इनके स्थानीय मददगार कौन थे, जिन्होंने इन्हें ठहरने या भागने में मदद की?
इन सभी बिंदुओं पर पुलिस की टीमें तेजी से काम कर रही हैं।
सुरक्षा व्यवस्था और आगे के कदम
सिंघु बॉर्डर किसान आंदोलन के दौरान लंबे समय तक चर्चा का केंद्र रहा था, और ऐसे संवेदनशील इलाकों में इस तरह की हरकतें होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। इस घटना के बाद से दिल्ली और हरियाणा सीमा पर गश्त बढ़ा दी गई है। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और कड़ी कर दी गई है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी नापाक कोशिश को समय रहते नाकाम किया जा सके।
आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं, क्योंकि पुलिस इन आरोपियों के कॉल डिटेल्स और सोशल मीडिया चैट्स को डिकोड करने में जुटी है। कानून के लंबे हाथ अब इस पूरी साजिश के मास्टरमाइंड तक पहुंचने ही वाले हैं, और देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।