उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में इन दिनों भक्ति और अध्यात्म की त्रिवेणी बह रही है। जिले के सैयदराजा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक भैरही (नरहन) गांव का पूरा वातावरण इन दिनों मंत्रोच्चार और भजन-कीर्तन से सराबोर हो चुका है। मौका है गांव के प्रसिद्ध श्री राधा-कृष्ण मंदिर परिसर में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय भव्य संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का। भाद्रपद मास के पवित्र और ऊर्जावान माहौल के बीच शुरू हुए इस अनुष्ठान ने आसपास के पूरे इलाके में एक अलौकिक और सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर दिया है।
ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व से जुड़ा आयोजन
सनातन संस्कृति में भाद्रपद मास का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि इसी माह में जगत के पालनहार भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। नरहन गांव के इस राधा-कृष्ण मंदिर में आयोजित होने वाला यह तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान 2 सितंबर से शुरू होकर 4 सितंबर तक चलेगा। आयोजन समिति के अनुसार, इस विशेष कार्यक्रम का समापन सीधे तौर पर श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव और एक विशाल भंडारे के साथ होगा। ग्रामीण इलाकों में इस तरह के आयोजनों से न केवल सामाजिक समरसता बढ़ती है, बल्कि युवा पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति और प्राचीन परंपराओं से जुड़ने का सुनहरा अवसर मिलता है.
शाम ढलते ही गूंजने लगे कथा के स्वर
कार्यक्रम की शुरुआत आज यानी 2 सितंबर की शाम को हो चुकी है। निर्धारित समयानुसार प्रतिदिन शाम 6 बजे से लेकर रात्रि 9 बजे तक कथा का यह सिलसिला अनवरत जारी रहेगा। पहले ही दिन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं में कथा सुनने को लेकर गजब का उत्साह नजर आया। ढोल-मंजीरे और हारमोनियम की मधुर धुनों के बीच जब पंडाल में भजन गूंजे, तो पूरा इलाका कृष्णमय हो गया।
प्रसिद्ध कथा वाचिका मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी का मनमोहक अंदाज
इस तीन दिवसीय धार्मिक महायज्ञ में कथा का रसपान कराने के लिए प्रख्यात कथा वाचिका 'मानस मयूरी' शालिनी त्रिपाठी विशेष रूप से उपस्थित हैं। शालिनी त्रिपाठी अपने ओजस्वी और बेहद सरल तथा संगीतमय अंदाज के लिए जानी जाती हैं। उनके श्रीमुख से कथा सुनने के लिए न केवल नरहन बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। उनका कथा वाचन करने का अनूठा तरीका श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है। कठिन से कठिन दार्शनिक प्रसंगों को भी आम जनमानस की भाषा में बेहद सहजता से समझाना उनकी खूबी है, जिससे हर आयु वर्ग के लोग कथा से आसानी से जुड़ पा रहे हैं।
भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का होगा सुंदर वर्णन
आयोजन के इन तीन दिनों के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के विभिन्न पहलुओं, उनकी अलौकिक बाल लीलाओं, माखन चोरी, गोवर्धन प्रसंग और उनके प्रेम व धर्म से जुड़े संदेशों का बहुत ही मार्मिक और सुंदर संगीतमय वर्णन किया जाएगा। कथा के दौरान विभिन्न प्रसंगों पर आधारित झांकियां और प्रस्तुतियां भी दी जाएंगी, जो उपस्थित भक्तों के मन को मोह लेंगी।
भव्य मंदिर सजावट और जन्माष्टमी की तैयारियां
इस बड़े आयोजन को लेकर मंदिर समिति और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर व्यापक तैयारियां की हैं। श्री राधा-कृष्ण मंदिर को फूलों, रंग-बिरंगी लाइटों और आकर्षक सजावट से दुल्हन की तरह सजाया गया है। रात के समय मंदिर की रोशनी देखते ही बनती है। आने वाले श्रद्धालुओं के बैठने के लिए विशाल पंडाल और गर्मी से राहत के लिए पंखों आदि की पुख्ता व्यवस्था की गई है।
कथा के अंतिम दिन यानी जन्माष्टमी की रात को भगवान श्रीकृष्ण के प्रकटोत्सव पर एक अत्यंत भव्य और आकर्षक झांकी प्रस्तुत की जाएगी। मध्यरात्रि 12 बजे जब कन्हैया का जन्म होगा, तो पूरा मंदिर परिसर 'नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की' के जयकारों से गूंज उठेगा।
द्विवेदी परिवार की ओर से विशाल भंडारे का आयोजन
इस तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के अंतिम चरण में, यानी समापन के दिन, द्विवेदी परिवार की तरफ से क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं और आगंतुकों के लिए एक विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस महाप्रसाद वितरण में हजारों की संख्या में भक्तों के शामिल होने की संभावना है। आयोजन समिति ने सैयदराजा और आसपास के सभी क्षेत्रों के धर्मप्रेमियों से यह अपील की है कि वे अपने परिवार और मित्रों के साथ अधिक से अधिक संख्या में पधारें।
कार्यक्रम की मुख्य बातें:
- आयोजन स्थल: श्री राधा-कृष्ण मंदिर, नरहन (भैरही), सैयदराजा, चंदौली
- तिथियां: 2 सितंबर से 4 सितंबर तक
- कथा समय: प्रतिदिन शाम 6:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक
- कथा वाचिका: मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी
- विशेष आकर्षण: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव और विशाल भंडारा
फिलहाल, नरहन गांव का यह धार्मिक माहौल इस बात का गवाह है कि ग्रामीण अंचलों में आज भी सनातन संस्कृति और सामूहिक उत्सवों के प्रति लोगों की आस्था अटूट है। तीन दिनों तक चलने वाले इस आध्यात्मिक उत्सव से पूरा क्षेत्र भक्ति के रंग में रंग चुका है।