शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाने का दावा करने वाला देश का एक और बड़ा नाम अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। कभी स्मार्टफोन की स्क्रीन और लैपटॉप के जरिए छोटे-छोटे वीडियो से पढ़ाई का अलख जगाने वाला यह स्टार्टअप अब बिक चुका है। इस खबर के सामने आने के बाद से ही देश के स्टार्टअप जगत और शिक्षा क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। आखिर कैसे एक छोटे से यूट्यूब चैनल से शुरू हुआ यह सफर इस मुकाम पर पहुंचा, आइए जानते हैं इसकी पूरी और दिलचस्प दास्तान।
यूट्यूब के एक छोटे से पन्ने से हुई थी शुरुआत
आज जिस प्लेटफॉर्म को अनअकैडमी के नाम से करोड़ों छात्र जानते हैं, उसकी नींव किसी बड़े कॉर्पोरेट ऑफिस में नहीं, बल्कि साल 2010 में एक साधारण से यूट्यूब चैनल के रूप में पड़ी थी। गौरव मुंजाल और उनके साथियों ने शुरुआत में यूट्यूब पर कोडिंग और तकनीक से जुड़े वीडियो ट्यूटोरियल डालने शुरू किए थे। उस समय किसी ने यह नहीं सोचा था कि यह छोटा सा प्रयास आने वाले समय में भारत के सबसे बड़े एडटेक (EdTech) साम्राज्यों में से एक बन जाएगा।
यूट्यूब पर छात्रों से मिलने वाले शानदार रिस्पॉन्स ने इन युवाओं को एक बड़ा विजन देने का काम किया। उन्हें समझ आ गया कि देश के दूर-दराज के इलाकों में ऐसे लाखों छात्र हैं जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कोचिंग के अभाव में अपने सपनों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इसी सोच को एक मंच देने के लिए साल 2015 में अनअकैडमी ऐप और वेबसाइट को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया गया।
जब एक आईएएस अधिकारी ने छोड़ दी सरकारी नौकरी
इस स्टार्टअप की कहानी में एक ऐसा मोड़ भी आया जिसने हर किसी को हैरान कर दिया था। यूपीएससी (UPSC) जैसी देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षा पास कर चुके रोमन सैनी ने आईएएस (IAS) के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे होने के बावजूद सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। रोमन सैनी का यह फैसला उस समय काफी चर्चा का विषय बना था।
एक डॉक्टर और आईएएस अफसर की आरामदायक और सुरक्षित नौकरी को छोड़कर शिक्षा के प्रसार के लिए मैदान में उतरना आसान नहीं था। रोमन सैनी ने गौरव मुंजाल के साथ हाथ मिलाया और अनअकैडमी को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। उनके जुड़ने के बाद प्लेटफॉर्म पर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों का तांता लग गया और देखते ही देखते यह स्टार्टअप युवाओं के बीच एक बड़ा ब्रांड बन गया।
नौकरियों का त्याग और वेंचर कैपिटलिस्ट का दौर
सिर्फ रोमन सैनी ही नहीं, बल्कि इस स्टार्टअप के सफर में कई ऐसे लोग जुड़े जिन्होंने अपनी स्थापित और उच्च वेतन वाली नौकरियों को अलविदा कह दिया। शिक्षा को देश के हर वर्ग तक मुफ्त या बेहद कम कीमत में पहुंचाने के वादे के साथ शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे एक बड़े कमर्शियल वेंचर में बदल गया।
कोविड-19 महामारी के दौरान जब देश भर के स्कूल और कोचिंग संस्थान बंद थे, तब एडटेक सेक्टर को पंख लग गए। इस दौरान अनअकैडमी को दुनिया भर के बड़े निवेशकों (Venture Capitalists) से भारी-भरकम फंडिंग मिली। वैल्यूएशन आसमान छूने लगी और कंपनी ने देश के कई बड़े क्रिकेट टूर्नामेंट्स और विज्ञापनों में अपना भारी निवेश किया। लेकिन हर चमकती हुई चीज सोना नहीं होती, और समय के साथ बाजार के समीकरण बदलने लगे।
बदलाव के दौर में अनअकैडमी का भविष्य
महामारी का दौर खत्म होने के बाद जब दोबारा से ऑफलाइन कोचिंग और स्कूल खुले, तो ऑनलाइन शिक्षा के क्षेत्र में मांग धीमी पड़ने लगी। लागत में कटौती, कर्मचारियों की छंटनी और वित्तीय घाटे से उबरने के लिए कंपनी को पिछले कुछ वर्षों में कई कड़े फैसले लेने पड़े। अब इस बड़े घटनाक्रम के तहत कंपनी के बिकने की खबर सामने आई है, जिसने पूरे बाजार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
- शुरुआत: साल 2010 में एक यूट्यूब चैनल के रूप में हुई थी शुरुआत।
- स्थापना: साल 2015 में गौरव मुंजाल, रोमन सैनी और अन्य साथियों द्वारा आधिकारिक ऐप लॉन्च।
- बड़ा कदम: रोमन सैनी द्वारा आईएएस की नौकरी का त्याग कर शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखना।
- वर्तमान स्थिति: बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच अब इस बड़े एडटेक प्लेटफॉर्म के अधिग्रहण की खबर।
यूट्यूब से लेकर एक यूनिकॉर्न बनने और अब इस नए मोड़ तक पहुंचने का अनअकैडमी का यह सफर भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए किसी रोलर कोस्टर राइड से कम नहीं रहा है। आने वाले दिनों में इस नए बदलाव का देश के ऑनलाइन शिक्षा बाजार और लाखों छात्रों पर क्या असर पड़ेगा, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इस पूरी कहानी ने यह साबित कर दिया है कि जोखिम उठाने वाले ही इतिहास रचते हैं।