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शुभेंदु के एक दावे ने पलटी बंगाल की सियासत, ममता बनर्जी के पैर की चोट पर किया बड़ा खुलासा

शुभेंदु के एक दावे ने पलटी बंगाल की सियासत, ममता बनर्जी के पैर की चोट पर किया बड़ा खुलासा

पश्चिम बंगाल की सियासत एक बार फिर उफान पर है। राज्य में छह अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के प्रचार का शोर अब अपने चरम पर पहुंच चुका है, लेकिन इस चुनावी शोर के बीच एक ऐसा बयान सामने आया है जिसने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। सूबे के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साल 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान की एक ऐसी घटना पर से पर्दा उठाया है, जिस पर आज भी बहस छिड़ी रहती है। मुख्यमंत्री के इस नए दावे के बाद सियासी तापमान काफी बढ़ गया है और दोनों तरफ से तीखे बयानों का दौर शुरू हो गया है।

नंदीग्राम उपचुनाव के आखिरी चरण में नया राजनीतिक भूचाल

नंदीग्राम सीट पर आगामी छह अक्टूबर को मतदान होना है और इसके नतीजे नौ अक्टूबर को सामने आएंगे। यह मुकाबला बंगाल की राजनीति में बेहद खास माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी अपनी इस पारंपरिक और प्रतिष्ठा वाली सीट को किसी भी कीमत पर अपने पाले में रखना चाहती है। दूसरी ओर, विपक्षी खेमे की ओर से भी पूरी ताकत झोंक दी गई है। इसी हाई-वोल्टेज चुनावी रण के बीच शुक्रवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कुछ ऐसा कह दिया, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया है।

नंदीग्राम में बीजेपी प्रत्याशी हसिरानी रथ के पक्ष में प्रचार करने पहुंचे मुख्यमंत्री ने साल 2021 के उन ऐतिहासिक पलों को याद किया जब पूरे राज्य की निगाहें इसी सीट पर टिकी थीं। उस चुनाव में कड़े मुकाबले के बाद राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए थे। अब मुख्यमंत्री ने पहली बार खुलकर उन रहस्यों से पर्दा उठाया है, जो इतने सालों से पर्दे के पीछे थे।

भवानीपुर सीट छोड़ने और नंदीग्राम को खाली करने का असली सच

हालिया विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर और नंदीग्राम— दोनों ही महत्वपूर्ण सीटों पर शानदार जीत दर्ज की थी। इसके बाद से ही यह सवाल तैर रहा था कि आखिर उन्होंने कौन सी सीट अपने पास रखी और किसे छोड़ा। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद संवैधानिक बाध्यताओं के चलते उन्हें एक सीट छोड़नी ही थी। उन्होंने भवानीपुर को अपने पास रखा और नंदीग्राम सीट खाली कर दी।

इस फैसले के पीछे की असली वजह बताते हुए मुख्यमंत्री ने जनसभा में कहा, "मुझसे अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि दोनों सीटों पर जीतने के बाद मैंने भवानीपुर को क्यों चुना और नंदीग्राम सीट क्यों खाली कर दी? इसका सीधा और स्पष्ट कारण यह है कि अगर मैं भवानीपुर सीट छोड़ देता, तो जिस नेता को राज्य की जागरूक जनता ने पूरी तरह खारिज कर बाहर का रास्ता दिखा दिया था, उन्हें उप-चुनाव के जरिए राजनीति में फिर से पैर जमाने का खुला मौका मिल जाता। मैंने उस रास्ते को हमेशा के लिए बंद करने का काम किया है।"

'ममता बनर्जी का पैर फ्रैक्चर नहीं हुआ था, वह केवल सहानुभूति बटोरने का ड्रामा था'

इस भाषण का सबसे सनसनीखेज हिस्सा वह था जब मुख्यमंत्री ने 10 मार्च 2021 की घटना का जिक्र किया। उस दिन नंदीग्राम में नामांकन दाखिल करते समय ममता बनर्जी के पैर में चोट लग गई थी। इस चोट के बाद व्हीलचेयर पर बैठकर और पैर में प्लास्टर बंधवाकर उन्होंने पूरे पश्चिम बंगाल में धुआंधार प्रचार किया था। उस दौरान यह आरोप लगाया गया था कि शुभेंदु अधिकारी के इशारे पर 'बाहरी गुंडों' ने हमला कर उनका पैर तोड़ दिया है।

इन पुराने आरोपों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पूरी कहानी एक सोची-समझी राजनीतिक पटकथा थी। उन्होंने दावा किया, "ममता दीदी को चोट लगी और मेरा नाम लेकर पूरे चुनाव प्रचार के दौरान मुझे और मेरे समर्थकों को बदनाम करने की साजिश रची गई। लेकिन उसकी हकीकत कुछ और ही थी। चुनाव के बाद मैंने अस्पताल जाकर डॉक्टर से मेडिकल रिपोर्ट की मांग की थी। उस एक्स-रे रिपोर्ट में किसी भी तरह की मोच या फैक्चर का दूर-दूर तक कोई जिक्र नहीं है। वह एक्स-रे रिपोर्ट आज भी मेरे पास सुरक्षित है, और अगर जरूरत पड़ी तो मैं उसे सार्वजनिक करने से भी पीछे नहीं हटूंगा।"

नंदीग्राम उपचुनाव क्यों बन गया है सबसे बड़ा दंगल?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शुभेंदु अधिकारी का यह बयान सिर्फ एक पुराना किस्सा नहीं है, बल्कि इसके जरिए वह नंदीग्राम के मतदाताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इस उपचुनाव में मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है क्योंकि बीजेपी अपनी इस सीट को बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है, वहीं दूसरी तरफ जेल से जमानत पर बाहर आए उम्मीदवारों और स्थानीय समीकरणों ने मुकाबले को त्रिकोणीय और बेहद कड़ा बना दिया है।

मुख्य बिंदु जो इस चुनाव को बनाते हैं बेहद अहम:

  • 6 अक्टूबर को मतदान: नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए वोटिंग छह अक्टूबर को होगी।
  • 9 अक्टूबर को परिणाम: वोटों की गिनती और नतीजे नौ अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे, जो राज्य की राजनीति की दशा और दिशा तय करेंगे।
  • हाई-प्रोफाइल उम्मीदवार: सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुकी इस सीट पर दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है।

बहरहाल, मुख्यमंत्री के इस ताजा और सनसनीखेज दावे के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आना तय माना जा रहा है। विपक्षी खेमे की तरफ से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है और आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार का रुख किस दिशा में मुड़ता है, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। फिलहाल, नंदीग्राम की हर एक गली और नुक्कड़ पर सियासी सरगर्मी अपने चरम पर है और हर किसी की नजरें नौ अक्टूबर के नतीजों पर टिकी हैं।

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रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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