आधुनिक युग की तेज रफ्तार जिंदगी में जहां एक तरफ तकनीक ने दूरियों को मिटाया है, वहीं दूसरी तरफ अपनों के बीच ही दूरियां बढ़ा दी हैं। इसी बदलते सामाजिक परिदृश्य के बीच पश्चिम बंगाल के हावड़ा शहर में रिश्तों की डोर को मजबूत करने के लिए एक बेहद सार्थक पहल देखने को मिली। रविवार, 20 सितंबर 2026 को हावड़ा के प्रतिष्ठित शरत सदन में ‘सर्वमंगलम्’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य परिवार और समाज के बीच की टूटती कड़ियों को जोड़ना और आपसी संबंधों को प्रगाढ़ करना था।
भव्य शुरुआत और सांस्कृतिक गरिमा
कार्यक्रम की शुरुआत बेहद ऊर्जावान और सांस्कृतिक माहौल में हुई। सबसे पहले पारंपरिक उद्घाटन गीत और राष्ट्र वंदना ‘वंदे मातरम्’ के साथ सभागार गूंज उठा। इसके बाद मंच पर उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों का परिचय कराया गया और उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस आयोजन की रूपरेखा कुटुंब प्रबोधन टोली, हावड़ा महानगर के तत्वावधान में केशव निवेदिता सेवा समिति के सहयोग से तैयार की गई थी। कार्यक्रम के अंत में ‘धनधान्य पुष्पभरा’ गीत की प्रस्तुति ने उपस्थित सभी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
दिग्गज हस्तियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस सामाजिक और सांस्कृतिक महाकुंभ में शहर और देश के कई प्रतिष्ठित चेहरे एक मंच पर नजर आए। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक नंदलाल जोशी (बाबाजी) मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा हावड़ा नगर निगम के आयुक्त तेजस्वी राणा, हावड़ा सिटी पुलिस के आयुक्त अखिलेश कुमार चतुर्वेदी (आईपीएस), प्रख्यात समाजसेवी रोशन लाल अग्रवाल, आनंद कुमार शर्मा और डॉ. संजय कुमार बसु की गरिमामयी उपस्थिति ने इस आयोजन के महत्व को और बढ़ा दिया।
प्रकृति और मनुष्य के अटूट रिश्ते पर चर्चा
संघ के वरिष्ठ प्रचारक नंदलाल जोशी ने ‘सर्वमंगलम्’ शब्द की गहराई और उसकी सार्थकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने संबोधन में बहुत ही गहरी बात कहते हुए समझाया कि ‘सर्वमंगलम्’ की मूल भावना में पूरे ब्रह्मांड और सभी के कल्याण की कामना छिपी है। उन्होंने मनुष्य और प्रकृति के बीच के नाजुक संतुलन का जिक्र करते हुए कहा कि प्रकृति के नियमों के विरुद्ध जाकर इंसान के लिए कुछ भी हासिल करना या टिके रहना असंभव है। हमें प्रकृति का सम्मान करते हुए ही आगे बढ़ना होगा।
सोशल मीडिया और बदलती पारिवारिक जीवनशैली
हावड़ा सिटी पुलिस के आयुक्त अखिलेश कुमार चतुर्वेदी ने आज के दौर की सबसे बड़ी समस्या यानी सोशल मीडिया के अत्यधिक प्रभाव और युवा पीढ़ी के साथ संवाद की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज लोग वर्चुअल दुनिया में तो जुड़े हैं, लेकिन वास्तविक जीवन में अपने ही परिवार के साथ पर्याप्त समय नहीं बिता पा रहे हैं। व्यस्त जीवनशैली के इस दौर में ऐसे आयोजनों की बहुत आवश्यकता है, जो लोगों को जमीन से जोड़ें। उन्होंने संघ की सामाजिक भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी जुड़ाव और मजबूत होता है।
पड़ोसियों से बढ़ती दूरियों पर चिंता
डॉ. संजय कुमार बसु ने ‘कुटुंब प्रबोधन’ के वास्तविक अर्थ को बहुत ही सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि ‘कुटुंब’ का दायरा केवल अपने घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हमारे पड़ोसी और आसपास के लोग भी शामिल हैं। वर्तमान समय की कड़वी सच्चाई यह है कि लोग अपने पड़ोसी से अनजान होते जा रहे हैं और उनके बीच दूरियां लगातार बढ़ रही हैं। डॉ. बसु ने जोर देकर कहा कि यदि हमें एक सशक्त और सुरक्षित समाज की स्थापना करनी है, तो हमें अपने पड़ोसियों के साथ मधुर संबंध स्थापित करने ही होंगे।
- परिवार और समाज के बीच संवाद बढ़ाना समय की मांग है।
- सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से युवा पीढ़ी को बचाना जरूरी है।
- पड़ोसियों के साथ बेहतर समन्वय से सामाजिक सुरक्षा बढ़ती है।
- पारंपरिक मूल्यों और संस्कृति को सहेजना हर नागरिक का कर्तव्य है।
मूल्यों के आधार पर ही संभव है सकारात्मक समाज का निर्माण
हावड़ा नगर निगम के आयुक्त तेजस्वी राणा ने समाज में व्यक्ति के आचार-व्यवहार और नैतिक मूल्यों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति अपने आचरण में सुधार नहीं लाएगा, तब तक बड़े बदलाव की कल्पना नहीं की जा सकती। यदि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम लगातार होते रहें, तो आम नागरिक भी समाज के विकास में अपनी सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।
द्वितीय चरण में भविष्य की रूपरेखा पर मंथन
कार्यक्रम के दूसरे और अंतिम चरण में पैनल चर्चा और संवाद का दौर चला। इसमें मुख्य रूप से परिवार, समाज, संस्कृति और आपसी संबंधों के ताने-बाने को कैसे बचाया जाए, इस पर विस्तार से चर्चा हुई। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि इस तरह के आयोजनों का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा ताकि आने वाली पीढ़ी को हमारी संस्कृति और संस्कारों से जोड़ा जा सके। कुल मिलाकर, हावड़ा का यह ‘सर्वमंगलम्’ कार्यक्रम केवल एक सभा नहीं, बल्कि एक ऐसा वैचारिक मंच साबित हुआ जिसने हर किसी को अपने परिवार और समाज के प्रति आत्ममंथन करने के लिए मजबूर कर दिया।