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मेटा पर बच्चों की सेफ्टी से खिलवाड़ का गंभीर आरोप, पूर्व इंजीनियर के खुलासे से हड़कंप

मेटा पर बच्चों की सेफ्टी से खिलवाड़ का गंभीर आरोप, पूर्व इंजीनियर के खुलासे से हड़कंप

सोशल मीडिया दिग्गजों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर से दुनिया भर में तीखे सवाल खड़े होने लगे हैं। फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा (Meta) पर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। यह आरोप किसी बाहरी आलोचक ने नहीं, बल्कि कंपनी के ही एक पूर्व इंजीनियरिंग डायरेक्टर ने अदालत में दिए गए अपने बयान के दौरान लगाए हैं। इस खुलासे के बाद से डिजिटल प्राइवेसी और टेक जगत में हड़कंप मच गया है।

अदालत में पूर्व इंजीनियर का बड़ा खुलासा

मेटा के पूर्व इंजीनियरिंग डायरेक्टर आर्टुरो बेहार (Arturo Behar) ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान कंपनी की अंदरूनी नीतियों की पोल खोल दी है। बेहार का दावा है कि मेटा ने बच्चों की सुरक्षा के नाम पर केवल दिखावे के लिए टूल्स तैयार किए हैं, जो असल में प्रभावी तरीके से काम नहीं करते हैं। उनका कहना है कि कंपनी जानती है कि उसके प्लेटफॉर्म्स पर बच्चे किस तरह के खतरों का सामना कर रहे हैं, इसके बावजूद सुरक्षा इंतजामों को मजबूत करने के बजाय उन्हें कमजोर ही रखा गया है ताकि बिजनेस पर कोई आंच न आए।

बेहार के इन बयानों ने टेक कंपनियों के इस दावे की हवा निकाल दी है कि वे यंग यूजर्स की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं। अदालत में सामने आए इन तथ्यों ने मेटा के बिजनेस मॉडल पर सीधे तौर पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

'टेक ए ब्रेक' फीचर और नोटिफिकेशन पर उठे सवाल

अपने दावों को पुख्ता करते हुए आर्टुरो बेहार ने इंस्टाग्राम के मशहूर 'टेक ए ब्रेक' (Take a Break) फीचर का विशेष तौर पर जिक्र किया। उन्होंने अदालत को बताया कि:

  • यह फीचर डिफ़ॉल्ट रूप से (Default) बंद रहता है।
  • यूजर को खुद जाकर अपनी सेटिंग्स में इसे मैन्युअली एक्टिवेट करना पड़ता है।
  • यही वजह है कि अधिकांश किशोर या बच्चे इस फीचर का इस्तेमाल ही नहीं कर पाते और वे लगातार स्क्रीन से चिपके रहते हैं।

बेहार के अनुसार, मेटा का पूरा बिजनेस मॉडल इस बात पर टिका है कि यूजर ज्यादा से ज्यादा समय तक उनके प्लेटफॉर्म पर स्क्रॉलिंग करता रहे। स्क्रीन टाइम जितना ज्यादा होगा, कंपनी उतनी ही ज्यादा विज्ञापन आधारित कमाई (Ad Revenue) कर पाएगी। यही कारण है कि नोटिफिकेशन के डिज़ाइन भी कुछ इस तरह तैयार किए जाते हैं कि यूजर का ध्यान बार-बार ऐप की तरफ खींचा चला जाए।

मेटा की सफाई: 'हम सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं'

दूसरी तरफ, इन गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद मेटा ने अपना पक्ष रखते हुए तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी के प्रवक्ता का कहना है कि मेटा ने यूजर्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर कई आधुनिक सेफ्टी फीचर्स विकसित किए हैं।

कंपनी का यह भी दावा है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए वह लगातार माता-पिता, बाल मनोवैज्ञानिकों, और विभिन्न तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम कर रही है। हालांकि, पूर्व इंजीनियर के इन अंदरूनी खुलासे ने मेटा के इन दावों की पोल खोल दी है और अब जनता के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या सोशल मीडिया कंपनियां मुनाफे के आगे बच्चों की जानबूझकर अनदेਖ कर रही हैं?

29 अमेरिकी राज्यों में चल रहे हैं मुकदमे

यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं है। अमेरिका के 29 राज्यों में मेटा के खिलाफ बच्चों का डेटा अवैध रूप से इस्तेमाल करने और उन्हें सोशल मीडिया की गंभीर लत (Addiction) का शिकार बनाने को लेकर पहले से ही कई मुकदमे चल रहे हैं। इन मुकदमों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और उनकी डिजिटल प्राइवेसी से जुड़े बेहद संवेदनशील मुद्दों को उठाया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत में ये आरोप साबित हो जाते हैं, तो मेटा को भारी-भरकम आर्थिक जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह संभावित जुर्माना करीब 19.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही, कंपनी को अपनी नीतियों और बिजनेस मॉडल में आमूल-चूल बदलाव करने के लिए भी मजबूर होना पड़ सकता है।

मुनाफा बनाम बाल सुरक्षा: भविष्य की बड़ी चुनौती

यह पूरा मामला अब सिर्फ एक कंपनी या एक फीचर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरी टेक इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा नैतिक सवाल बन गया है। बहस अब इस बात पर केंद्रित हो गई है कि सोशल मीडिया कंपनियों की अरबों-खरबों की कमाई और बच्चों की मानसिक व शारीरिक सुरक्षा के बीच आखिर संतुलन कैसे बिठाया जाए। क्या आने वाले समय में सरकारें इन टेक दिग्गजों पर लगाम कसने के लिए कोई कड़े कानून बनाएंगी? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल मेटा की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: मेटा पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर मुख्य आरोप क्या हैं?

उत्तर: मेटा पर आरोप है कि उसने बच्चों की सुरक्षा के लिए जो टूल्स बनाए हैं, वे नाकाफी हैं और कंपनी मुनाफे के चक्कर में बच्चों को सोशल मीडिया का आदी बना रही है।

Q2: यह विवाद किसने और कहां उठाया?

उत्तर: यह विवाद मेटा के पूर्व इंजीनियरिंग डायरेक्टर आर्टुरो बेहार ने अदालत में सुनवाई के दौरान अपने बयानों के जरिए उठाया है।

Q3: क्या मेटा को इस मामले में किसी बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है?

उत्तर: हाँ, अमेरिका के कई राज्यों में मुकदमे चल रहे हैं और यदि आरोप साबित होते हैं, तो कंपनी पर खरबों रुपये का जुर्माना लग सकता है और उसके बिजनेस मॉडल में बदलाव करने पड़ सकते हैं।

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अल्का सिंह

अल्का सिंह

Senior Content Writer

अल्का सिंह स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े विषयों पर गहन शोध के साथ लेखन करती हैं। उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को केवल सामान्य जानकारी ही नहीं, बल...

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