उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार द्वारा राजस्व सेवाओं को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों के दूरगामी सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इस नई व्यवस्था के तहत अब आम जनता को छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की विवशता से मुक्ति मिलने जा रही है। वाराणसी के प्रबुद्ध अधिवक्ताओं ने सरकार के इस कदम की न केवल सराहना की है, बल्कि इसे सुशासन की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है।
वाराणसी कलेक्ट्रेट परिसर के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. देवेश श्रीवास्तव ‘बच्ची’ ने इस डिजिटल पहल का पुरजोर स्वागत करते हुए कहा कि तकनीक के समावेश से प्रशासनिक तंत्र में व्याप्त सुस्ती और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगेगा। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे आम आदमी का जीवन इन डिजिटल सुधारों के बाद आसान होने जा रहा है।
अब घर बैठे होंगे राजस्व से जुड़े तमाम जटिल काम
पारंपरिक रूप से राजस्व विभाग से जुड़े कार्य, जैसे कि भूमि का विभाजन, प्रमाण-पत्र बनवाना या खतौनी में सुधार करवाना, आम नागरिकों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होते थे। लोगों को महीनों तहसीलों और कलेक्ट्रेट के चक्कर काटने पड़ते थे, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती थी। लेकिन अब योगी सरकार के इस डिजिटल मॉडल ने पूरी तस्वीर ही बदल दी है।
नई व्यवस्था के लागू होने से नागरिकों को पारदर्शिता के साथ समयबद्ध तरीके से सेवाएं मिलेंगी। आवेदन की स्थिति क्या है, यह अब घर बैठे ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकता है। इससे बिचौलियों और भ्रष्ट तत्वों की भूमिका स्वतः समाप्त हो जाती है.
प्रमुख डिजिटल बदलाव और उनकी विशेषताएं
1. धारा 116 के तहत भूमि विभाजन की ऑनलाइन प्रक्रिया
जमीनी विवादों और पारिवारिक बंटवारे के मामलों में धारा 116 के अंतर्गत भूमि विभाजन के लिए अब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें:
- ऑनलाइन आवेदन की सुविधा दी गई है।
- नोटिस और उद्घोषणा की प्रक्रिया डिजिटल होगी।
- लेखपाल की रिपोर्ट की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा सकेगी।
इस पूरी चेन के ऑनलाइन होने से फाइलें टेबल से गायब होने या जानबूझकर लटकाए जाने जैसी शिकायतों पर पूरी तरह लगाम लगेगी।
2. जीआईएस (GIS) तकनीक का इस्तेमाल
भूमि अभिलेखों को अधिक प्रामाणिक और त्रुटिरहित बनाने के लिए जीआईएस (GIS - Geographic Information System) तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। इससे भूमि का भौगोलिक विवरण और उसकी सटीक स्थिति डिजिटल मैप पर स्पष्ट होगी, जिससे भविष्य में भूमि विवादों की गुंजाइश न्यूनतम रह जाएगी।
3. ईडब्ल्यूएस (EWS) प्रमाण-पत्र बनवाना हुआ बेहद आसान
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के युवाओं और नागरिकों के लिए प्रमाण-पत्र बनवाना अब जी का जंजाल नहीं रहेगा। इस प्रक्रिया के ऑनलाइन होने से आवेदकों को अब विभिन्न कार्यालयों के अनगिनत फेरे नहीं लगाने पड़ेंगे। निर्धारित दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करने के बाद तय समय सीमा के भीतर प्रमाण-पत्र उपलब्ध हो जाएगा, जिससे छात्र-छात्राओं और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को सबसे बड़ी राहत मिली है।
4. खतौनी में क्षेत्रफल की बारीक और सटीक जानकारी
जमीन के कागजात यानी खतौनी को लेकर अक्सर हेरफेर की शिकायतें आती थीं। सरकार ने इस समस्या की जड़ पर वार करते हुए खतौनी में क्षेत्रफल का विवरण अब छह दशमलव अंकों तक दर्ज किए जाने की व्यवस्था लागू की है। यह तकनीकी सुधार भूमि अभिलेखों की सटीकता को कई गुना बढ़ा देता है, जिससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या ओवरराइटिंग की संभावना खत्म हो जाती है।
अधिकारियों की जवाबदेही और नागरिकों का समय
डॉ. देवेश श्रीवास्तव ‘बच्ची’ ने इस बात पर जोर दिया कि राजस्व मामलों में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से न केवल आम लोगों का बहुमूल्य समय बचेगा, बल्कि पूरी व्यवस्था में अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय होगी। जब हर एक फाइल का डिजिटल मूवमेंट दर्ज होगा, तो किसी भी स्तर पर होने वाली देरी के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को पकड़ा जा सकेगा।
"व्यवस्था के डिजिटलीकरण से आम नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से न्याय अधिक सुलभ होगा। यह सुशासन की असली तस्वीर है।" - डॉ. देवेश श्रीवास्तव ‘बच्ची’, अधिवक्ता
भविष्य की सुगम प्रशासनिक व्यवस्था की नींव
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम राज्य को डिजिटल इंडिया के सपने के सबसे करीब ले जाता है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। कागजी कार्रवाई कम होने से पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल रही है और प्रशासनिक कामकाज की रफ्तार बेमिसाल तरीके से तेज हुई है।
निसंदेह, इन सुधारों से न केवल आम जनता का शासन प्रणाली पर विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है, बल्कि उत्तर प्रदेश देश के उन अग्रणी राज्यों में शुमार हो गया है जहाँ राजस्व सेवाओं का आधुनिकीकरण सबसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया है।