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प्रयागराज कोर्ट में अली अहमद की पेशी पर बवाल, काले कोट में दिखे संदिग्ध चेहरे

प्रयागराज कोर्ट में अली अहमद की पेशी पर बवाल, काले कोट में दिखे संदिग्ध चेहरे

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक बेहद संवेदनशील और चौकाने वाला मामला सामने आया है। माफिया अतीक अहमद के बेटे अली अहमद की हालिया कचहरी पेशी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस पेशी के दौरान कुछ ऐसे चेहरे कैमरे में कैद हुए हैं, जिन्होंने वकीलों की तरह काला कोट पहन रखा था। लेकिन शुरुआती चर्चाओं और सामने आए वीडियो फुटेज के आधार पर यह अंदेशा जताया जा रहा है कि इनमें से कई लोग सीधे तौर पर अतीक और अशरफ के परिवार या उनके रिश्तेदारों से जुड़े हो सकते हैं। इस घटना ने एक बार फिर अदालत परिसर की सुरक्षा और पुलिस तंत्र की मुस्तैदी पर कई बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।

कचहरी परिसर में दिखा ‘काले कोट’ का सुरक्षा कवच

जिस वक्त अली अहमद को भारी सुरक्षा के बीच अदालत में पेशी के लिए लाया गया, उस समय का माहौल काफी तनावपूर्ण था। इस दौरान कुछ लोग, जिन्होंने वकीलों का आधिकारिक पहनावा यानी काला कोट (Black Coat) पहन रखा था, अली के आसपास साये की तरह चलते हुए नजर आए। प्रत्यक्षदर्शियों और सामने आए वीडियो फुटेज से ऐसा प्रतीत होता है कि ये लोग केवल भीड़ का हिस्सा नहीं थे, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत अली अहमद के चारों ओर सुरक्षा घेरा या कवच बनाकर चल रहे थे।

जैसे ही मीडिया के कैमरों और सीसीटीवी फुटेज पर इन चेहरों की नजर पड़ी, सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए। सवाल यह उठ रहा है कि क्या वकीलों के लिबास का इस्तेमाल करके कोई अनधिकृत व्यक्ति या माफिया परिवार से जुड़ा शख्स इतनी संवेदनशील पेशी के दौरान आरोपी के इतने करीब तक पहुंच सकता है? यदि ऐसा हुआ है, तो यह अदालत की सुरक्षा में एक बड़ी चूक मानी जा सकती है।

चर्चा में आए कई नाम और रिश्तेदार

सामने आ रही शुरुआती जानकारियों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में कई ऐसे नाम सामने आ रहे हैं जो सीधे तौर पर अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ के परिवार से ताल्लुक रखते हैं। सूत्रों और वायरल हो रही तस्वीरों के आधार पर जिन चेहरों की चर्चा हो रही है, उनमें निम्नलिखित नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं:

  • जकी अहमद: अतीक अहमद का सगा साला।
  • मशरूर और सैफी: अतीक के चचेरे साले।
  • फैसल बाबा: अशरफ का साला।
  • अल्तमश और मोनिश: अशरफ के साले के भांजे।
  • नाहिद: फरार चल रही शास्ता परवीन के मामा का बेटा।

इनके अलावा भी कुछ अन्य संदिग्ध चेहरे इस पूरी भीड़ में नजर आए हैं। हालांकि, अभी तक इन तमाम नामों और चेहरों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस या प्रशासनिक स्तर पर नहीं की गई है, लेकिन तस्वीरों के सामने आने के बाद इनकी पहचान को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है।

अदालत की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

अतीक अहमद और उसके परिवार से जुड़े मामले हमेशा से देश भर में सुर्खियों में रहे हैं। सुरक्षा की दृष्टि से अली अहमद की पेशी को अति-संवेदनशील श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे मामलों में कचहरी परिसर के भीतर प्रवेश के कड़े नियम होते हैं। केवल अधिकृत वकीलों, न्यायिक अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को ही एक निश्चित दायरे में जाने की अनुमति मिलती है।

ऐसे में यदि कोई व्यक्ति बिना वैध पहचान या सिर्फ वकीलों का भेष बदलकर आरोपी के अत्यधिक करीब पहुंच जाता है, तो यह सुरक्षा में तैनात कर्मियों की कार्यप्रणाली पर सीधा प्रहार है। क्या प्रवेश द्वारों पर चेकिंग के दौरान इन लोगों की अनदेखी की गई? या फिर ये लोग पहले से ही किसी साठगांठ के तहत परिसर के भीतर मौजूद थे? इन तमाम सवालों के जवाब तलाशने के लिए अब खुफिया एजेंसियां और स्थानीय पुलिस अंदरखाने मंथन कर रही हैं।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक भूमिका

इस पूरे मामले में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों का पक्ष भी बेहद स्पष्ट और संतुलित है। केवल तस्वीरों या वीडियो में नजर आने मात्र से किसी भी व्यक्ति को अपराधी या किसी गैरकानूनी गतिविधि में लिप्त नहीं ठहराया जा सकता। कानून की नजर में हर व्यक्ति तब तक निर्दोष है जब तक उसके खिलाफ ठोस सबूत न मिल जाएं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन सभी तस्वीरों और वीडियो फुटेज की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच की जा सकती है। इसके अलावा निम्नलिखित बिंदुओं पर भी गहराई से पड़ताल होने की संभावना है:

  • कचहरी परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए यह ट्रैक करना कि ये संदिग्ध लोग किस गेट से अंदर दाखिल हुए।
  • क्या ये लोग किसी रजिस्टर्ड वकील के साथ या उनके मुंशी के रूप में आए थे?
  • पेशी के दौरान अली अहमद या उसके वकीलों से इनकी क्या बातचीत हुई और इनका उद्देश्य क्या था?
  • उस दिन कचहरी की सुरक्षा ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मियों के बयान और लॉग बुक की जांच।

आगे क्या हो सकता है?

आने वाले दिनों में प्रयागराज पुलिस इस मामले में बड़ा कदम उठा सकती है। यदि जांच के दौरान यह साबित होता है कि वकीलों के भेष में कुछ अनधिकृत लोग सुरक्षा व्यवस्था को धेंगा दिखाकर आरोपी के करीब पहुंचे थे, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही, ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले सुरक्षाकर्मियों पर भी गाज गिर सकती है।

फिलहाल, यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर से इस बात की याद दिलाता है कि भले ही माफिया का साम्राज्य कमजोर हुआ हो, लेकिन उसके नेटवर्क और समर्थकों की गतिविधियां अभी भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। जनता और मीडिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस प्रशासन इन संदिग्ध चेहरों की पहचान करके जनता के सामने क्या आधिकारिक तथ्य रखता है।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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