शिक्षा का असली उद्देश्य केवल किताबों के पन्ने पलटना और डिग्रियां हासिल करना नहीं है, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक और बेहतर इंसान तैयार करना है। इसी उद्देश्य के साथ अपनी स्वर्णिम यात्रा के सौ साल पूरे कर चुका प्रयागराज का प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान एक नए मील के पत्थर पर खड़ा है। प्रयागराज के छोटा बघाड़ा स्थित एनी बेसेन्ट सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज ने अपनी स्थापना के सौ गौरवशाली वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस ऐतहासिक अवसर पर आयोजित शताब्दी वर्ष समारोह का शुभारंभ बेहद भव्य और उल्लासपूर्ण माहौल में हुआ, जिसमें शिक्षा जगत और न्यायपालिका के कई दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की।
सौ वर्षों की गौरवशाली शैक्षणिक यात्रा
किसी भी शिक्षण संस्थान के लिए सौ वर्षों का सफर तय करना अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। इस एक सदी के दौरान इस विद्यालय ने अनगिनत पीढ़ियों को गढ़ा है और उन्हें समाज तथा देश के निर्माण में योगदान देने के योग्य बनाया है। जब कोई संस्था समय की कसौटी पर खरी उतरती है, तो उसकी नींव में शिक्षकों का समर्पण और समाज का विश्वास होता है। एनी बेसेन्ट विद्यालय ने इस लंबी यात्रा में तमाम उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन इसके मूल उद्देश्य यानी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और चरित्र निर्माण में कभी कोई कमी नहीं आई।
वर्तमान में जब यह विद्यालय 'विद्या भारती' से जुड़ चुका है, तो इसकी शैक्षणिक गुणवत्ता में भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का एक मजबूत धागा भी जुड़ गया है। अब यहाँ पढ़ने वाले बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी जड़ों, संस्कारों और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने का विशेष कार्य किया जा रहा है, जो आज के समय की सबसे बड़ी मांग है।
शताब्दी समारोह का भव्य शुभारंभ और दीप प्रज्वलन
समारोह के पहले दिन कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक और पवित्र वातावरण में हुई। मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और पुष्पार्चन के साथ इस ऐतिहासिक उत्सव का आगाज किया गया। इस दौरान उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के चेहरों पर एक अलग ही उत्साह और गर्व का भाव साफ झलक रहा था।
कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत करते हुए भारतीय शिक्षा समिति पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रदेश निरीक्षक शेषधर द्विवेदी ने मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और विद्यालय की इस लंबी विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे एक छोटे से पौधे के रूप में शुरू हुआ यह शिक्षण संस्थान आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है, जिसकी छांव में हजारों छात्र अपना भविष्य संवार रहे हैं।
महापौर गणेश केसरवानी के विचार: राष्ट्रभक्ति और संस्कार
समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए प्रयागराज के महापौर गणेश केसरवानी ने विद्यालय की जमकर सराहना की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि एनी बेसेन्ट विद्यालय ने पिछले सौ वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में जो उल्लेखनीय योगदान दिया है, वह वाकई वंदनीय है।
"विद्या भारती से जुड़ने के बाद यह ऐतिहासिक विद्यालय विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ राष्ट्रभक्ति, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति से जुड़े संस्कार भी प्रदान कर रहा है। आने वाले समय में यह विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में और भी नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।" - गणेश केसरवानी, महापौर
महापौर ने इस बात पर जोर दिया कि आज के भौतिकवादी युग में बच्चों को नैतिक शिक्षा देना सबसे जरूरी है, ताकि वे अपनी संस्कृति को न भूलें और देश के विकास में पूरी ईमानदारी से अपनी भूमिका निभा सकें।
न्यायमूर्ति शेखर यादव और सूर्य प्रकाश केसरवानी का मार्गदर्शन
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति शेखर यादव ने शिक्षा के वास्तविक और नैतिक स्वरूप पर बहुत ही सारगर्भित बात रखी। उन्होंने विद्यार्थी जीवन में संस्कारों के महत्व को समझाते हुए कहा कि शिक्षा का दायरा सिर्फ परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह छात्र के समग्र व्यक्तित्व विकास का माध्यम है। जब तक शिक्षा में नैतिकता और चरित्र निर्माण का समावेश नहीं होगा, तब तक एक सशक्त समाज की कल्पना नहीं की जा सकती।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित न्यायमूर्ति सूर्य प्रकाश केसरवानी ने विद्यालय को शताब्दी वर्ष में प्रवेश करने पर बधाई दी और अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे इस विद्यालय की इस महान और गौरवशाली परंपरा को और आगे बढ़ाएं। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अनुशासित रहकर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करें और अपने शिक्षकों तथा माता-पिता का नाम रोशन करें।
आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
शताब्दी वर्ष समारोह केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि इसे एक बड़े सांस्कृतिक पर्व के रूप में मनाया जा रहा है। कार्यक्रम के अंत में डॉ. आनंद कुमार श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों, आचार्यों, और दूर-दूर से आए आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने जानकारी दी कि शताब्दी समारोह के दूसरे दिन यानी दो अक्टूबर को एक भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इस कवि सम्मेलन में देश और क्षेत्र के जाने-माने कवि अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे, जिसमें देशभक्ति और सामाजिक मुद्दों पर आधारित कविताएं मुख्य आकर्षण होंगी।
व्यापक जनभागीदारी और अनुशासन
इस ऐतिहासिक आयोजन में प्रयाग महानगर में विद्या भारती द्वारा संचालित सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्य, आचार्य, छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में शहर के प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। पूरा परिसर उत्सव के रंग में रंगा हुआ था। कार्यक्रम का कुशल संचालन विद्यालय के कोषाध्यक्ष डॉ. विनम्रसेन द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरी गरिमा के साथ सभी सत्रों को जोड़ा।
यह शताब्दी समारोह इस बात का प्रमाण है कि यदि सही दिशा में निष्ठा के साथ प्रयास किए जाएं, तो कोई भी शिक्षण संस्थान आने वाली पीढ़ियों के जीवन में एक अमिट सकारात्मक प्रभाव छोड़ सकता है। एनी बेसेन्ट विद्यालय का यह सौ वर्षों का सफर आने वाले समय में भी नए युवाओं को देश की सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।