बरेली कलेक्ट्रेट में किसान एकता संघ के बैनर तले किसानों ने धान खरीद की जटिल शर्तों और गन्ना समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया, मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन।
धान खरीद की जटिल शर्तों और गन्ना किसानों की समस्याओं के विरोध में कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश के बरेली में मंगलवार को किसानों ने धान खरीद की पेचीदा शर्तों और गन्ना किसानों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। किसान एकता संघ के बैनर तले हाथों में गन्ने लेकर पहुंचे किसानों ने सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया और मुख्यमंत्री को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि सरकार धान खरीद में लागू की गई फार्मर रजिस्ट्री और सैटेलाइट एग्रीकल्चर सर्वे की अनिवार्यता को तुरंत समाप्त करे, ताकि अन्नदाताओं को अपनी फसल बेचने में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
धान खरीद में तकनीकी बाधाओं से बढ़ी किसानों की मुश्किलें
किसान एकता संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री एवं प्रमुख किसान नेता डॉ. रवि नागर ने प्रदर्शन के दौरान सरकार की मौजूदा धान खरीद नीति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा धान खरीद में फार्मर रजिस्ट्री और सैटेलाइट सर्वे को अनिवार्य किए जाने से किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। स्थिति यह है कि हजारों किसानों की पूरी कृषि भूमि की फार्मर रजिस्ट्री अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। इसके साथ ही तकनीकी खामियों और पोर्टल की समस्याओं के कारण सैटेलाइट सर्वे का सही विवरण भी ऑनलाइन दर्ज नहीं हो पा रहा है, जिससे किसान अपना धान बेचने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
नेताद्वय ने यह भी बताया कि धान की तौल पूरी होने के बाद चारों तौल मजदूरों के अंगूठे के निशान लेने की जो नई अनिवार्यता थोपी गई है, उसने पूरी खरीद प्रक्रिया को अत्यधिक जटिल बना दिया है। किसानों ने मांग की है कि इन सभी अव्यवहारिक बाध्यताओं को बिना देरी के समाप्त किया जाए और पहले की तरह एक सरल, सुगम तथा पारदर्शी धान खरीद व्यवस्था दोबारा बहाल की जाए, जिससे किसी भी किसान को असुविधा न हो।
गन्ने का मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की पुरजोर मांग
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने गन्ने के लाभकारी मूल्य का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। वक्ताओं ने कहा कि पिछले कुछ समय में खेती से जुड़े जरूरी इनपुट जैसे खाद, बीज, डीजल, कीटनाशक, सिंचाई के साधन और मजदूरी की लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। इसके मुकाबले गन्ने का वर्तमान भाव किसानों के लिए नाकाफी साबित हो रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए किसानों ने सरकार से गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने की मांग की, ताकि गन्ना उत्पादक किसानों को उनकी लागत का सही रिटर्न मिल सके।
नवाबगंज तहसील के सहदपुर सरौरा गांव में नया क्रय केंद्र खोलने की मांग
इस अवसर पर किसानों ने स्थानीय स्तर की एक अन्य बड़ी मांग भी प्रशासन के सामने रखी। उन्होंने नवाबगंज तहसील के सहदपुर सरौरा गांव में नया गन्ना क्रय केंद्र स्थापित किए जाने की जोरदार मांग उठाई। किसानों का कहना था कि इस क्षेत्र के किसान लंबे समय से अपने इलाके में नया क्रय केंद्र खोलने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब तक इस समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है, जिससे उन्हें दूरदराज के केंद्रों पर जाने की मजबूरी बनी हुई है।
कलेक्ट्रेट पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान राष्ट्रीय सचिव यज्ञ प्रकाश गंगवार, प्रदेश अध्यक्ष युवा मोर्चा पंडित राजेश शर्मा, मंडल उपाध्यक्ष गिरीश गोस्वामी, मंडल महासचिव डॉ. अंशु भारती, जिला प्रवक्ता सुरेंद्र तिवारी, जिला मीडिया प्रभारी संजय पाठक, जिला सचिव घनश्याम गुर्जर, राम गौतम, राजेंद्र खलीफा, वीरेश भगत, खेतल सिंह गुर्जर, प्रेमपाल गंगवार, लोकपाल, हरदयाल, वेद प्रकाश, शालिग्राम, धनपाल मौर्य, आनंदपाल, वीरेंद्र सिंह, हरिशंकर, मानसिंह, हुलासी राम, देवपाल गंगवार, सोनू गंगवार और बृज बिहारी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय किसान मौजूद रहे।