लखनऊ पुलिस ने विदेशी साइबर अपराधियों के नेटवर्क का खुलासा करते हुए 6 सिम बॉक्स और 192 सक्रिय ई-सिम बरामद किए हैं। डिजिटल अरेस्ट और ठगी की आशंका।
विदेशी कॉल को स्थानीय नंबरों में बदलने वाले बड़े साइबर नेटवर्क का हुआ पर्दाफाश, चीन निर्मित उपकरणों से चल रहा था खेल
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस ने विदेशी साइबर अपराधियों के एक बड़े नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई की है। साइबर सेल और पुलिस टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए छह एडवांस सिम बॉक्स (SIM Box) बरामद किए हैं। इन सभी उपकरणों में 32-32 पोर्ट लगे हुए थे, जिनकी तकनीकी जांच में कुल 192 ई-सिम (e-SIM) सक्रिय पाए गए हैं। इस नेटवर्क का इस्तेमाल मुख्य रूप से विदेश से आने वाली अवैध कॉलों को भारतीय मोबाइल नंबरों के माध्यम से स्थानीय कॉल के रूप में डायवर्ट करने के लिए किया जा रहा था।
यह पूरी कार्रवाई एडीसीपी क्राइम आईपीएस किरण यादव के नेतृत्व में अंजाम दी गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बरामद किए गए सिम बॉक्स पर 'मेड इन चाइना' (Made in China) लिखा हुआ मिला है। शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई है कि इन संदिग्ध उपकरणों को देश में आयात करते समय संभवतः साउंड एम्पलीफायर या अन्य सामान्य इलेक्ट्रॉनिक सामान के रूप में घोषित किया गया था, लेकिन इनका असल इस्तेमाल टेलीकॉम नेटवर्क को बायपास कर कॉल्स रूट करने के लिए हो रहा था।
किस तरह काम करता था यह सिम बॉक्स नेटवर्क?
साइबर विशेषज्ञों और पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि सिम बॉक्स तकनीक का उपयोग कर अंतरराष्ट्रीय अपराधियों द्वारा विदेश से की जाने वाली कॉलों को भारतीय मोबाइल नंबरों से जोड़ दिया जाता है। जब पीड़ित के फोन पर घंटी बजती है, तो उसे कॉलर आईडी पर कोई विदेशी नंबर नहीं बल्कि एक सामान्य भारतीय मोबाइल नंबर दिखाई देता है। इससे ठगों के लिए स्थानीय व्यक्ति का भरोसा जीतना आसान हो जाता है और वे अपनी असली पहचान व भौगोलिक स्थिति पूरी तरह छिपा लेते हैं।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के तंत्र का इस्तेमाल हाल के दिनों में तेजी से बढ़े 'डिजिटल अरेस्ट' के मामलों, फर्जी निवेश योजनाओं और शेयर बाजार धोखाधड़ी जैसे गंभीर साइबर अपराधों को अंजाम देने के लिए किया जा सकता था। हालांकि, पुलिस इस बात की गहराई से तकनीकी जांच कर रही है कि इन उपकरणों के जरिए किन-किन लोगों को अब तक निशाना बनाया गया है और इस सिंडिकेट से जुड़े वास्तविक चेहरे कौन हैं।
सुरक्षा और निगरानी के लिए लगाए गए थे आधुनिक इंतजाम
छापेमारी के दौरान पुलिस को घटनास्थल पर एक वाई-फाई से कनेक्टेड फेस डोर बेल (Wi-Fi Face Door Bell) भी लगी हुई मिली। जांच एजेंसियों का अनुमान है कि इस आधुनिक गैजेट का इस्तेमाल परिसर के बाहर आने-जाने वाले लोगों और पुलिस या अन्य एजेंसियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाता था ताकि किसी भी संभावित खतरे से पहले सतर्क हुआ जा सके।
आपूर्तिकर्ता और सप्लाई चेन की हो रही है तलाश
लखनऊ पुलिस अब इस बात की तह तक जाने का प्रयास कर रही है कि ये 32-पोर्ट वाले छह सिम बॉक्स देश के भीतर कैसे पहुंचे, इन्हें किसने मंगाया था और इनके संचालन के लिए तकनीकी सहायता या वित्तीय संसाधन किसने उपलब्ध कराए थे। पुलिस देश के अन्य हिस्सों की एजेंसियों से भी संपर्क साध रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस तरह के नेटवर्क देश के दूसरे शहरों में भी सक्रिय हैं। मामले की विवेचना अभी जारी है और कई अन्य खुलासे होने की उम्मीद है।